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Controversy over Rahul Gandhi's 'Chhatron Ki Goonj' (Voice of Students) event at the Dehradun rally; Congress
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Rahul Gandhi Dehradun Rally: राहुल के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर विवाद,जमकर भड़के कांग्रेसी नेता!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Wed, 15 Jul 2026 01:32 AM IST
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देहरादून के परेड ग्राउंड में 17 जुलाई को प्रस्तावित कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद गहरा गया है। कार्यक्रम की तैयारियां शुरू होने से पहले ही स्थल की अनुमति को लेकर नया विवाद सामने आ गया, जिसके बाद कांग्रेस और प्रशासन आमने-सामने आ गए। कांग्रेस का कहना है कि उसने परेड ग्राउंड में 15 से 17 जुलाई तक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए समय रहते नगर निगम से आवेदन किया था और निर्धारित शुल्क भी जमा कर दिया था। इसके बाद नगर निगम ने आवश्यक शर्तों के साथ कार्यक्रम की अनुमति भी जारी कर दी थी। कांग्रेस के अनुसार, अनुमति मिलने के बाद कार्यक्रम की तैयारियों के तहत मंच, पंडाल और अन्य आवश्यक सामग्री लेकर ट्रक परेड ग्राउंड पहुंचे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें मैदान के भीतर प्रवेश करने से रोक दिया। इससे कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी फैल गई और देर रात बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता एवं कार्यकर्ता परेड ग्राउंड पहुंच गए। उन्होंने ट्रकों को मैदान के अंदर जाने देने की मांग को लेकर नारेबाजी की और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया, जिससे पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए किसी बड़े विवाद को नहीं होने दिया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम और प्रशासन भारतीय जनता पार्टी के दबाव में काम कर रहे हैं तथा जानबूझकर राहुल गांधी के कार्यक्रम में बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।
उनका कहना है कि पहले अनुमति देने के बाद अब अचानक आपत्ति उठाना राजनीतिक दुर्भावना को दर्शाता है। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि परेड ग्राउंड में भारत सरकार का लोक संवर्धन कार्यक्रम पहले से संचालित है। यह कार्यक्रम मूल रूप से 15 जुलाई तक निर्धारित था, लेकिन हरेला पर्व के अवसर पर इसे 16 और 17 जुलाई तक बढ़ा दिया गया। इसी कारण परेड ग्राउंड की उपलब्धता को लेकर नई स्थिति उत्पन्न हुई और कार्यक्रम स्थल के उपयोग पर आपत्ति दर्ज की गई। प्रशासन का तर्क है कि सरकारी कार्यक्रम के चलते मैदान पूरी तरह खाली नहीं कराया जा सकता, इसलिए कांग्रेस के कार्यक्रम की तैयारियों के लिए ट्रकों को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। अब इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों में बाधा और राजनीतिक भेदभाव बता रही है, जबकि प्रशासन अपने निर्णय को सरकारी कार्यक्रम और व्यवस्थागत आवश्यकताओं के आधार पर उचित ठहरा रहा है। ऐसे में 17 जुलाई को प्रस्तावित राहुल गांधी के कार्यक्रम के आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है और सभी की नजरें प्रशासन के अगले निर्णय तथा दोनों पक्षों के बीच होने वाली आगे की बातचीत पर टिकी हैं।
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