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'150 लोगों के लिए आठ करोड़ को परेशान किया': पूर्व ECI ने क्यों कहा- एसआईआर का मकसद मतदाता सूची से नाम हटाना

Wed, 15 Jul 2026 12:22 PM IST
नितिन गौतम पीटीआई, अमर उजाला
पीटीआई, अमर उजाला Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 15 Jul 2026 12:22 PM IST
सार

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि एसआईआर प्रक्रिया का मकसद मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर करना है।

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SIR process focussed on exclusion Ex CEC Quraishi ask how many foreign nationals found ec
एसवाई कुरैशी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया मतदाता सूची से नाम हटाने पर अधिक केंद्रित है और इससे लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि एसआईआर से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
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'एसआईआर में लोगों को मतदाता सूची से बाहर करने पर फोकस'
अपनी नई किताब 'इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज, नॉट अ मेमॉयर' के विमोचन से पहले  पीटीआई वीडियो को दिए एक इंटरव्यू में कुरैशी ने कहा कि मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया में इस बात पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है कि कितने लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएं, जैसे अधिक से अधिक नाम हटाने पर चुनाव आयोग को इनाम मिलने वाला हो। कुरैशी ने कहा कि मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन ऐसी स्थिति बनाई जा रही है जैसे चुनाव आयोग लोगों को यह सुविधा इनाम के रूप में दे रहा हो।
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'पहले छोटी-मोटी गलतियों को नजरअंदाज किया जाता था'
कुरैशी ने कहा, 'एसआईआर प्रक्रिया का ध्यान अधिकतर नाम हटाने पर है। ऐसा लगता है कि कितने लोगों को मतदाता सूची से बाहर किया जा सकता है, यही इसका मुख्य उद्देश्य बन गया है।' उन्होंने अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए जाते थे कि छोटी-मोटी गलतियों को नजरअंदाज किया जाए ताकि कोई मतदाता सूची से बाहर न हो। कुरैशी ने कहा, 'अब ध्यान इस बात पर है कि कितने लोगों को बाहर किया जाए, जैसे ज्यादा से ज्यादा नाम हटाने पर अंक मिलेंगे। करोड़ों लोगों को बाहर कर दिया गया है।' कुरैशी 30 जुलाई 2010 से 10 जून 2012 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे।
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'150 लोगों के लिए आठ करोड़ लोगों को परेशान किया गया'
  • उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि 2002-03 में अंतिम गहन पुनरीक्षण के बाद यह निर्णय लिया गया था कि अब गहन पुनरीक्षण की जरूरत नहीं है, क्योंकि मतदाता सूचियां कंप्यूटरीकृत हो चुकी हैं।
  • उन्होंने कहा कि अगर किसी नए मतदाता को जोड़ना हो तो बूथ लेवल अधिकारी फॉर्म-6 उपलब्ध कराते हैं और प्रक्रिया पूरी होने के बाद नाम जोड़ा जाता है। वहीं, किसी मृत व्यक्ति या स्थान बदल चुके मतदाता का नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भरा जाता है। कुरैशी ने कहा कि यह प्रक्रिया मौके पर ही पूरी हो जाती थी।
  • बिहार में अवैध प्रवासियों की पहचान के नाम पर शुरू किए गए एसआईआर अभियान का जिक्र करते हुए कुरैशी ने सवाल उठाया कि करीब आठ करोड़ लोगों को परेशान किया गया, लेकिन कितने विदेशी नागरिक पाए गए, इसकी जानकारी चुनाव आयोग ने अब तक नहीं दी है।
  • उन्होंने कहा, 'आज तक चुनाव आयोग ने यह आंकड़ा नहीं बताया। क्यों? देश जानना चाहता है, हम जानना चाहते हैं। कृपया बताइए कि कितने विदेशी नागरिक मिले?' कुरैशी ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार करीब 500 विदेशी नागरिक पाए गए, जिनमें 150 बांग्लादेशी और 350 नेपाली हिंदू महिलाएं थीं, जो शादी के बाद बिहार आई थीं।
  • उन्होंने सवाल उठाया, '150 बांग्लादेशियों को खोजने के लिए आठ करोड़ लोगों को परेशान किया गया और इस प्रक्रिया में लाखों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। इससे क्या उद्देश्य पूरा हुआ? क्या यह ठीक है? बिल्कुल नहीं।'

SIR process focussed on exclusion Ex CEC Quraishi ask how many foreign nationals found ec
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी - फोटो : एक्स@PTI
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों द्वारा एसआईआर की आलोचना पर कुरैशी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसी बाहरी संस्था को भारत में चुनाव कराने के तरीके पर टिप्पणी करनी पड़ी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसे केवल देश का आंतरिक मामला बताकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'यह गंभीर मामला है। इसकी जांच होनी चाहिए और इसका जवाब दिया जाना चाहिए।' कुरैशी ने कहा कि यदि भारत इस मामले पर चुप रहता है तो इससे संदेह और मजबूत होगा।

'मतदान हर व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार'
कुरैशी ने संविधान के अनुच्छेद 326 का हवाला देते हुए कहा कि कुछ सीमाओं के अधीन हर व्यक्ति को मतदाता के रूप में पंजीकृत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन ऐसी स्थिति बनाई जा रही है जैसे यह चुनाव आयोग की ओर से दिया गया कोई उपकार हो।'

चुनाव आयोग ने चरणबद्ध तरीके से 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर प्रक्रिया का तीसरा चरण शुरू किया है, जिसमें 36.73 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली, ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम, मणिपुर, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना, पंजाब, कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड, नगालैंड, त्रिपुरा, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव शामिल हैं। इससे पहले बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, गोवा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप में एसआईआर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।

'यूपीए सरकार के दौरान कोई दबाव नहीं था'
यूपीए-2 सरकार के कार्यकाल के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त रहे एसवाई कुरैशी ने कहा है कि अपने कार्यकाल में उन्हें सरकार की ओर से किसी भी तरह के दबाव का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस समय चुनाव आयोग की छवि ऐसी थी कि कोई भी ऐसा करने की हिम्मत नहीं करता था। कुरैशी से जब पूछा गया कि क्या उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान सरकार की ओर से किसी दबाव का सामना करना पड़ा था, तो उन्होंने कहा, 'नहीं, बिल्कुल नहीं। दबाव का कोई सवाल ही नहीं था, क्योंकि चुनाव आयोग की छवि ऐसी थी कि कोई भी हमसे संपर्क करने की हिम्मत नहीं करता था।'

चुनाव की तारीखों के बारे में कुरैशी ने कहा कि उन्हें पता था कि खुफिया ब्यूरो के अधिकारी चुनाव आयोग के कार्यालय के आसपास यह पता लगाने की कोशिश करते रहते थे कि चुनाव कब होने वाले हैं। उन्होंने कहा, 'सरकार को हमेशा सबसे आखिर में पता चलता था कि हम चुनाव कब कराने जा रहे हैं।' कुरैशी ने कहा, 'हम चुनाव की घोषणा प्रेस कॉन्फ्रेंस में करते थे और उसी समय सरकार को भी इसकी जानकारी मिलती थी।'
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