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Maharashtra Shiv Sena (UBT) Crisis: 6 rebel MPs from Uddhav's camp reach Delhi for a meeting with Shah; Raut f
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Maharashtra Shiv Sena UBT Crisis:उद्धव के 6 बागी सांसद पहुंचे दिल्ली शाह के साथ बैठक, भड़के राउत!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Wed, 15 Jul 2026 04:30 AM IST
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महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद सियासी हलचल लगातार बढ़ती जा रही है। इस घटनाक्रम को लेकर शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने एक बार फिर पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द हो सकती है और उन्हें कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ेगा।
संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी इस पूरे मामले में कानूनी लड़ाई लड़ रही है और उन्हें पूरा विश्वास है कि दल बदलने वाले सांसदों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, "ये जो छह लोग भागकर चले गए हैं, उनका सर्वाइव करना इतना आसान नहीं है। उनकी सदस्यता रद्द होने वाली है। मेरी बात याद रखिएगा, ये न घर के रहेंगे और न घाट के रहेंगे।" राउत ने स्पष्ट किया कि शिवसेना (यूबीटी) इस मामले को कानूनी और संवैधानिक स्तर पर पूरी मजबूती से आगे बढ़ाएगी।
उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे आमतौर पर दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के रूप में जाना जाता है, का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सांसदों द्वारा दूसरे गुट में विलय का दावा करना कानून के अनुरूप नहीं है। राउत के अनुसार, जब तक मूल राजनीतिक दल औपचारिक रूप से किसी विलय का निर्णय नहीं लेता, तब तक उसके सांसदों को स्वयं लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष पत्र देकर विलय की इच्छा जताने का अधिकार नहीं है।
राउत ने कहा कि उनकी पार्टी ने पहले भी यह स्पष्ट किया था कि मूल पार्टी के आधिकारिक निर्णय के बिना किसी भी प्रकार का विलय संवैधानिक और कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सांसदों ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना कदम उठाया है। उनके मुताबिक, संविधान की दसवीं अनुसूची में इस प्रकार की स्थिति के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसलिए इस मामले का फैसला संवैधानिक और कानूनी व्याख्या के आधार पर होगा।
गौरतलब है कि शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद हाल ही में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ जुड़ गए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दल-बदल और पार्टी के वास्तविक अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) इस घटनाक्रम को अदालत और संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष चुनौती देने की तैयारी में है, जबकि शिंदे गुट इसे अपने राजनीतिक विस्तार और समर्थन का प्रमाण बता रहा है।
अब इस पूरे विवाद पर सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि इस मामले में कानूनी चुनौती आगे बढ़ती है, तो यह तय होगा कि सांसदों का दल परिवर्तन संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं। आने वाले दिनों में इस मामले पर होने वाले निर्णय का महाराष्ट्र की राजनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
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