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Assam Flood: 103 लोगों की मौत, सात लाख से ज्यादा विस्थापित; 433 गांव जलमग्न, बाढ़ के बाद कैसे लौटेगी जिंदगी?
Mon, 17 Aug 2026 07:36 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी।
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 17 Aug 2026 07:36 AM IST
सार
असम में इस साल की बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। 19 जुलाई से शुरू हुए बाढ़ के दौर में अब तक 103 लोगों की मौत बताई गई है। 433 गांव जलमग्न हैं और सात लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। हजारों लोग अब भी राहत शिविरों में रह रहे हैं। घर, फसल और रोजगार तबाह होने के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि प्रभावित परिवार दोबारा अपनी जिंदगी कैसे शुरू करेंगे? आइए, विस्तार से बाढ़ के हालातों को समझने की कोशिश करते हैं...
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असम के कई इलाकों में बाढ़ से हाहाकार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
असम में बाढ़ हर साल आती है, लेकिन इस बार ऊपरी असम के शिवसागर और चराइदेव में हालात बेहद गंभीर रहे। 19 जुलाई से 27-28 जुलाई के बीच बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया। इस दौरान अब तक 103 लोगों की मौत हो चुकी है। 433 गांव जलमग्न हैं और सात लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। बाढ़ का पानी घटने के बावजूद राज्य के कई इलाकों में तबाही के निशान अब भी साफ दिखाई दे रहे हैं।
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बाढ़ की शुरुआत कैसे हुई और सबसे ज्यादा असर कहां पड़ा?
19 जुलाई को नगालैंड के मोन जिले की पहाड़ियों में हुई तेज बारिश के बाद नीचे बहने वाली दिखौ नदी में अचानक पानी बढ़ गया। इसके बाद बाढ़ का पानी कई गांवों में घुस गया। शिवसागर और चराइदेव के अलावा गोलाघाट समेत कई इलाकों में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अब भी करीब 49 हजार विस्थापित लोग राहत शिविरों और वितरण केंद्रों में रहने को मजबूर हैं।
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घर बचे तो भी लोगों के सामने कौन सी नई मुसीबत है?
बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों में घरों के अंदर कीचड़ और गाद जमा है। नतून बस्ती, हिलनी, सिंगेल बस्ती और गंगेडाढ़ा में लोगों के घरों में सामान तक कीचड़ में दब गया है। कहीं दीवारें गिर गई हैं तो कहीं कपड़े, बर्तन, अनाज और बच्चों की किताबें खराब हो गई हैं। कई मवेशी बह गए और गौशालाएं खाली हो गईं। अब लोगों के सामने घरों के साथ रोजगार और बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू करने की चुनौती है।
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