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Assam: जिधर होगा जेन-जी, उसके हाथ होगी पूर्वोत्तर के द्वार की चाबी; मतदान से पहले ऐसे बीता बड़े चेहरों का दिन

Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Wed, 08 Apr 2026 09:15 PM IST
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Assam poll 2026 Gen Z Voters Could Decide the Gateway to the Northeast
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा - फोटो : @ANI
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असम विधानसभा चुनाव में जिधर जेन-जी जाएगा, पूर्वोत्तर के द्वार की चाबी उसी दल के हाथ लगेगी। ऐसा माना जा रहा है। भाजपा को असम में हैट्रिक लगाने का भरोसा है। वहीं, कांग्रेस 10 साल बाद सत्ता में वापसी का दावा कर रही है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा मतदान से ठीक एक दिन पहले बाबा बैजनाथ धाम जाकर आशीर्वाद ले आए हैं, लेकिन चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में कांग्रेस ने भ्रष्टाचार पर करारा हमला बोलकर चुनाव को थोड़ा जटिल बना दिया है।

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प्रद्युम्न बरुआ कहते हैं कि भाजपा ने 2021 की तरह इस चुनाव को बेहद सतर्कता से लड़ा है। प्रद्युम्न के मुताबिक असम चुनाव की जमीन आखिरी सप्ताह में ज्यादा तेजी से बदलती महसूस हुई। विपक्षी गठबंधन थोड़ा मजबूती से चुनाव लड़ता दिखाई दिया है। हिमांशु राय करीब दो दशक से गोवाहाटी में कारोबार कर रहे हैं। हिमांशु कहते हैं कि अरुणोदय योजना के तहत असम की महिलाओं को 3600 करोड़ रुपये की राशि वितरित हुई है। असम में महिलाओं की आबादी पुरुष मतदाताओं के बराबर है। यह एक बड़ा फैक्टर है और भाजपा का उत्साह बढ़ाता है।
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इस बार असम में भाजपा 89 सीट पर उसकी सहयोगी असम गण परिषद 25 सीट पर और वोडो पीपुल्स फ्रंट 11 सीट पर चुनाव लड़ रही है। असम गण परिषद ने मुस्लिम प्रभाव वाले 12 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार कर पूरे मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। हालांकि पिछले चुनाव में एनडीए का हिस्सा रही यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी अकेले चुनाव लड़ रही है।

कांग्रेस के गगोई को पता है कि अब नहीं तो आगे बड़ी मुश्किल होगी राह...
कांग्रेस का भरोसा गौरव गगोई पर है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने असम में विधानसभा चुनाव में काफी समय दिया। गुटबाजी और आंतरिक कलह को रोकने की भरपूर कोशिश की है। कांग्रेस के एक बड़े नेता ने अमर उजाला से फोन पर कहा कि पिछले चुनाव में विपक्ष को 50 सीटें मिली थी। सत्ता पक्ष 75 सीटें पाया था। हम पिछली बार ही सरकार बनाते, लेकिन आंतरिक गुटबाजी ने बड़ा नुकसान कर दिया था। इस बार वह बात नहीं है। 
2026 के विधानसभा चुनाव में बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ अलग चुनाव लड़ रही है। लेकिन अहोम को साधने के लिए तीनों गगोई (गौरव गगोई, अखिल गगोई, लुरिन ज्योति गगोई) साथ हैं। लुरिन गगोई की आल इंडिया लीडर हिल्स कांफ्रेंस दो सीटों पर चुनाव लड़ रही है। अखिल की असम जातीय परिषद 10 सीटों पर। 11 सीटों पर सीपीएम और 101 सीटों कांग्रेस चुनाव लड़ रही है।

दोनों गठबंधनों के अपने-अपने मुद्दे
असम के पिछले तमाम चुनाव से घुसपैठ बड़ा मुद्दा है। भ्रष्टाचार के मुद्दे को भी कांग्रेस ने सोच-समझकर हवा दी है। आखिरी समय में इसको लेकर राजनीति के तवे को पूरी तरह से गरम कर दिया है। जबकि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की कोशिश मतों के ध्रुवीकरण की तरफ ज्यादा रही। 

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री की बिगड़ी भाषा, अल्पसंख्यकों में नाराजगी से काफी उम्मीदें हैं। उसे 36 सीटों को प्रभावित करने वाले बागवानी मजदूरों से भी उम्मीद है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि वहां प्रधानमंत्री के जाने, चाय बागान में पत्तियां चुनने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को लग रहा है कि राज्य के 73 लाख मतदाता 19-29 साल की आयु वर्ग के हैं। जबकि 30-39 आयु वर्ग के 62 लाख मतदाता हैं। यह असम का जेन जी है और राज्य सरकार के भ्रष्टाचार से कुपित है। इस तरह से इस बार असम का भाग्य महिला, युवा, अल्पसंख्यक तय कर देंगे। देखना है राज्य के ढाई करोड़ मतदाता किसे राज्य की चाबी सौंपते हैं।

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