ममता बनर्जी की वकालत पर सवाल: कलकत्ता हाईकोर्ट में पेशी के बाद कार्रवाई तेज; BCI ने 48 घंटे में मांगी रिपोर्ट
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से ममता बनर्जी की वकालत और पंजीकरण स्थिति पर 48 घंटे में रिपोर्ट मांगी है। यह कार्रवाई उनके कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील के रूप में पेश होने के बाद की गई है।
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की वकालत और पेशेवर स्थिति को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बीसीआई ने यह रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई तब सामने आई जब ममता बनर्जी बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील की वेशभूषा में एक मामले की सुनवाई के दौरान पेश हुईं। यह मामला कथित चुनाव बाद हिंसा और पार्टी कार्यालयों पर हमलों से जुड़ा हुआ था।
BCI ने मांगा रिकॉर्ड, एनरोलमेंट की जांच शुरू
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को भेजे पत्र में कहा है कि ममता बनर्जी के नामांकन, वकालत की स्थिति, और कार्यकाल के दौरान किसी भी प्रकार के निलंबन या पुनः बहाली से जुड़े सभी रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जाएं। बीसीआई ने स्पष्ट किया कि यह जानकारी उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल (2011 से 2026) के दौरान उनकी पेशेवर स्थिति को समझने के लिए आवश्यक है।
कानूनी नियमों पर उठे सवाल
नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति संवैधानिक पद पर कार्यरत होता है या किसी अन्य लाभकारी पद पर रहता है, तो उसे वकालत का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित करना होता है। सेवा समाप्त होने के बाद ही इसे पुनः सक्रिय किया जा सकता है। इसी संदर्भ में बीसीआई ने यह जांच शुरू की है कि क्या सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
हाईकोर्ट में पेशी के बाद मामला चर्चा में
ममता बनर्जी के कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील के रूप में पेश होने के बाद यह मामला चर्चा में आया। मीडिया रिपोर्ट्स में उनके कानूनी वेशभूषा में अदालत में उपस्थित होने की खबरें सामने आने के बाद यह विवाद और बढ़ गया।
BCI ने मांगा स्पष्ट जवाब
बीसीआई के अनुसार, फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है, लेकिन सभी तथ्यों की पुष्टि आवश्यक है। पत्र में कहा गया है कि रिकॉर्ड के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि उनकी एनरोलमेंट और वकालत की स्थिति क्या रही है।
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