हुमायूं कबीर बोले: 'ममता अपने दौर में हुई हिंसा को भूल गईं'; स्कूलों में वंदे मातरम् को गाने का किया समर्थन
हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी के कलकत्ता हाईकोर्ट दौरे को राजनीतिक ड्रामा बताया। उन्होंने चुनाव बाद हिंसा के आरोपों से इनकार करते हुए 2021 की घटनाओं का मुद्दा उठाया। कबीर ने शुभेंदु अधिकारी के स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ गाने के फैसले का समर्थन भी किया।
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आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कोलकाता हाईकोर्ट दौरे की आलोचना की। उन्होंने चुनाव बाद कथित हिंसा को लेकर किए गए इस दौरे को ड्रामा करार दिया और ऐसी किसी घटना से इन्कार किया। कबीर ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा स्कूलों में 'वंदे मातरम' गाने की घोषणा का भी समर्थन किया।
2021 की घटनाओं को नजरअंदाज करने का आरोप
कबीर ने चुनाव बाद हिंसा के आरोपों पर सवाल उठाए और बनर्जी पर 2021 में उनके कार्यकाल के दौरान हुई कथित घटनाओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 2021 में जब वह मुख्यमंत्री थीं, तब कई लोगों की जान खतरे में थी और कई मारे गए थे। अब उन घटनाओं को याद नहीं किया जा रहा है। कबीर ने आगे आरोप लगाया कि बनर्जी का हाईकोर्ट दौरा राजनीतिक रूप से प्रेरित है और केवल जनता का ध्यान आकर्षित करने के लिए है।
कबीर ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की 'वंदे मातरम' को सोमवार से राज्य के स्कूलों में गाने की घोषणा पर भी प्रतिक्रिया दी। इस कदम का समर्थन करते हुए कबीर ने कहा कि यह नारा और गीत देश की पहचान का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
चुनाव बाद हिंसा पर कबीर के आरोप
हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी के हाईकोर्ट दौरे को ड्रामा बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद कोई हिंसा नहीं हुई है। कबीर ने बनर्जी पर 2021 में उनके मुख्यमंत्री रहते हुए हुई हिंसा की घटनाओं को भूलने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, उस समय कई लोगों की जान खतरे में थी और कई मारे गए थे। कबीर ने इस दौरे को राजनीतिक लाभ के लिए किया गया एक नाटक करार दिया।
स्कूलों और कॉलेजों में 'वंदे मातरम' गाने का समर्थन
कबीर ने 'वंदे मातरम' को भारत का नारा और मातृभूमि का राष्ट्रीय गीत बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस फैसले पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। कबीर ने याद दिलाया कि पहले भी स्कूलों और कॉलेजों में 'वंदे मातरम' गाया जाता था। उन्होंने इस कदम को देश की पहचान के लिए महत्वपूर्ण बताया। यह बयान राज्य में राष्ट्रवाद और शिक्षा नीतियों पर चल रही बहस के बीच आया है।