Bengal Elections: 'ममता की बात क्यों सुनें', गृह मंत्री ने सीएम के पैसे लेकर समर्थन देने के आरोप का किया खंडन
गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक टिप्पणी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि आप भी ममता बनर्जी की बात सुन रहे हो।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दावे को खारिज कर दिया। दरअसल, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा सार्वजनिक रैलियों में भीड़ बढ़ाने के लिए दूसरे राज्यों से पैसे लेकर समर्थकों को ला रही है। आरोप का खंडन करते हुए गृह मंत्री शाह ने आरोप के पीछे के तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘यह भीड़ दिखाइए। क्या इतने सारे लोग बाहर से आ सकते हैं?’ उन्होंने आगे कहा, ‘क्या यार, आप भी ममता बनर्जी की बात सुन रहे हो,’ जिसका अर्थ था कि ऐसे दावों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।
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हम भारी बहुमत से चुनाव जीतेंगे- गृह मंत्री
ये टिप्पणियां मुख्यमंत्री बनर्जी ने 5 अप्रैल को किया था, जिसमेंं उन्होंने कहा था कि भाजपा अन्य राज्यों से समर्थकों को जुटा रही है और उन्हें चल रहे विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने के प्रयास में रैलियों में भाग लेने के लिए भुगतान कर रही है। आईएएनएस से बात करते हुए गृह मंत्री ने पार्टी की संभावनाओं पर अपना विश्वास दोहराते हुए कहा कि भाजपा राज्य में निर्णायक बहुमत हासिल करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा, 'हम भारी बहुमत से चुनाव जीतेंगे।'
झड़प की बात को खारिज किया
भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पों की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए, गृह मंत्री ने व्यापक हिंसा की आशंकाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, 'बिल्कुल भी झड़प नहीं हुई है; चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रहे हैं। बंगाल को कवर करने वाले लोग जानते हैं कि हर चुनाव में कितने लोग मारे जाते थे।'
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इसी बीच, उत्तर 24 परगना के जगतदल में तनाव बढ़ गया, जहां रविवार रात दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हुई। इस घटना में पत्थरबाजी, गोलीबारी और देसी बमों का इस्तेमाल हुआ, जिसमें कई लोग घायल हो गए। कम से कम तीन लोग घायल हुए, जबकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के एक जवान के पैर में गोली लगी। अधिकारियों ने बताया कि यह झड़प एक पुलिस स्टेशन के पास हुई, जब भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जलेबी मठ मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के लिए लगाए गए पोस्टर और झंडे हटा दिए गए थे। पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान में छिटपुट हिंसा की घटनाओं के बावजूद 92.03 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह चुनाव 1951 के बाद राज्य में अब तक का सबसे अधिक मतदान था।

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