West Bengal Exit Polls: मतदान में कीर्तिमान, अब नतीजों की बारी; TMC की दो पत्तियों के मुकाबले कमल कितना दमदार?
West Bengal Exit Poll 2026 Updates: विधानसभा चुनाव 2026 में पश्चिम बंगाल के मतदाताओं ने पुराने तमाम रिकॉर्ड्स तोड़ डाले। दोनों चरणों में हुई बंपर वोटिंग के बाद अब नजरें 4 मई को आने वाले चुनाव परिणाम पर टिकी हैं। इससे पहले एग्जिट पोल के माध्यम से राजनीतिक पंडित इस बात का विश्लेषण कर रहे हैं कि क्या बंगाल में बदलाव की बयार बह चली है या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस का किला बचाने में सफल रहेंगी? क्या हैं बंगाल के एग्जिट पोल के अनुमान? जानिए इस खबर में
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतदान हुए हैं। कई सर्वे एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल के अनुमान जारी कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या तृणमूल कांग्रेस इस बार भी सत्ता को बनाए रखने में कामयाब हो पाएगी या भाजपा पहली बार भद्रलोक कहे जाने वाले बंगाल में अपने दम पर राजनीतिक पैठ बनाने में सफल रहेगी। 2021 के चुनाव में अनुमानों के उलट नतीजे आए थे। ममता बनर्जी बीते 15 वर्ष से बंगाल में मुख्यमंत्री हैं। खेला होबे जैसे चुनावी नारे के साथ भाजपा को पटखनी देने वाली सीएम ममता और उनके प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य कैसा है?
बंगाल में कौन कितना दमदार, एग्जिट पोल अनुमान क्या?
पांच साल के बाद 2026 चुनाव में किस्मत आजमा रहे प्रत्याशियों और दलों की क्या स्थिति रहेगी? ममता बनर्जी की पार्टी- तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक चिह्न- दो पत्तियों के मुकाबले भाजपा के चुनावी निशान कमल में कौन कितना दमदार है? इतिहास में हुई सर्वाधिक वोटिंग के बाद सर्वे एजेंसियों राज्य की जनता का मिजाज कैसा है? क्या बंगाल की जनता बदलाव का मूड बना चुकी है? ऐसे तमाम सवालों के जवाब इस एग्जिट पोल अपडेट्स में पढ़िए-
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भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के संपन्न होने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत का रथ अब और तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस, वामपंथ और टीएमसी के पिछले 70 वर्ष के इतिहास में पहली बार बंगाल ने बिना किसी हिंसा और जनहानि के पूरी तरह भयमुक्त मतदान देखा है। भंडारी के अनुसार, भारी संख्या में जनता का बाहर निकलकर वोट देना इस बात का प्रमाण है कि बंगाल में बदलाव तय है और इन नतीजों के बाद इंडी गठबंधन के भीतर राहुल गांधी का नेतृत्व और अधिक कमजोर साबित होगा।
