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Kerala: निलंबित आईएएस अधिकारी ने मुख्यमंत्री पर लगाए गंभीर आरोप, सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का दावा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Thu, 30 Apr 2026 03:21 PM IST
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सार

बी. अशोक ने निलंबन के बाद पिनाराई विजयन पर राजनीतिक हस्तक्षेप, धन दुरुपयोग और नौकरशाही की स्वतंत्रता कमजोर करने के आरोप लगाए; सरकार के खिलाफ कानूनी जीतों को वजह बताया।

Kerala Suspended IAS Officer Levels Serious Allegations Against Chief Minister Claims Misuse of Public Funds
पिनरई विजयन - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. बी. अशोक ने अपने निलंबन के एक दिन बाद मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप, सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और नौकरशाही की स्वतंत्रता के क्षरण का दावा किया। अशोक ने आज मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि उनका निलंबन आईएएस एसोसिएशन की सरकार के खिलाफ कानूनी जीतों से जुड़ा है।

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एसोसिएशन ने सरकार का खिलाफ जीते मामले

अशोक ने बताया कि एसोसिएशन ने 2023 से सरकार के खिलाफ पांच मामले जीते हैं। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री का गुस्सा समझा जा सकता है। अशोक ने दोनों वामपंथी सरकारों की तुलना करते हुए कहा कि पहले विजयन प्रशासन (2016-2021) ने सिविल सेवकों का सम्मान किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे कार्यकाल में शासन शैली में बदलाव आया, जिसमें करीब एक दर्जन सेवानिवृत्त अधिकारी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल रहे हैं। उन्होंने पूर्व मुख्य सचिव के.एम. अब्राहम की मुख्यमंत्री कार्यालय में एक नए पद पर नियुक्ति को अभूतपूर्व बताया। 

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अशोक ने स्पष्ट किया कि वह तुरंत निलंबन को अदालत में चुनौती नहीं देंगे। उन्होंने इसे सम्मान का प्रतीक बताया और कहा कि यह कार्रवाई सरकार द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार का व्यापक पैटर्न दर्शाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले छह महीनों में सरकार के तीसरे कार्यकाल को सुरक्षित करने के लिए अधिकारियों के एक समूह को जुटाया गया था, जिसमें बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान के लिए सार्वजनिक धन का उपयोग भी शामिल था। उनके अनुसार, इस उद्देश्य के लिए मुंबई स्थित एक पीआर एजेंसी को 130 करोड़ रुपये का अनुबंध दिया गया था।

राजनीतिक हस्तक्षेप और नौकरशाही की स्वतंत्रता

अशोक ने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम गंभीर अनियमितताएं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि एक खतरनाक मिसाल कायम की जा रही है। यह सिविल सेवा को राजनीतिक सत्ता के अधीन एक निकाय में बदलने का जोखिम पैदा करता है। उन्होंने कहा कि नौकरशाही की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है।

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