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Bombay High Court: 26/11 के बरी हुए आरोपी फहीम अंसारी की याचिका खारिज, ऑटो चलाने की अनुमति देने से किया इनकार

पीटीआई, मुंबई। Published by: Nirmal Kant Updated Thu, 30 Apr 2026 03:41 PM IST
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सार

Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फहीम अंसारी को अनुमति प्रमाणपत्र न देने का पुलिस का फैसला सही है। कोर्ट ने गोपनीय खुफिया रिपोर्ट के आधार पर माना कि उनके दोबारा ऐसी गतिविधियों में शामिल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। पढ़िए रिपोर्ट-

Man acquitted in 26/11 terror case denied police clearance considering national security: HC
बॉम्बे हाई कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहाकि पुलिस ने सार्वजनिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक हित को ध्यान में रखा। इसी कारण 26/11 आतंकी हमले के मामले में बरी हुए फहीम अंसारी को अनुमति प्रमाणपत्र नहीं दिया गया। अदालत के अनुसार आजीविका के लिए ऑटो रिक्शा चलाने की अनुमति से इनकार करना सही फैसला था।
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हाईकोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने पुलिस की ओर से दी गई गोपनीय खुफिया रिपोर्ट पर गौर किया। जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस आरआर भोंसले की पीठ ने बुधवार को अपने फैसले में टिप्पणी की कि अंसारी के दोबारा ऐसे ही गतिविधियों में शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि उसे सरकारी अधिकारियों की राय से अलग होने का कोई कारण नहीं दिखता और इसमें कोई गलती भी नहीं पाई गई।
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कोर्ट ने यह भी कहा कि अंसारी के आपराधिक इतिहास को देखते हुए और सार्वजनिक सुरक्षा व राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में यह फैसला उचित और तर्कसंगत तरीके से लिया गया है। 

फहीम अंसारी ने याचिका में क्या कहा था?
फहीम अंसारी ने पिछले साल जनवरी में याचिका दायर की थी और पुलिस से अनुमति प्रमाणपत्र मांगा था, ताकि वह सार्वजनिक सेवा वाहन चलाने की अनुमति प्राप्त कर सके, जो वाणिज्यिक ऑटो रिक्शा चलाने के लिए जरूरी होता है। उन्होंने कहा था कि 26/11 मामले में उनकी गिरफ्तारी और मुकदमे को आधार बनाकर उन्हें सार्वजनिक सुविधाओं और अवसरों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

सरकार ने किया याचिका का विरोध
सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस सत्यापन के दिशानिर्देशों के अनुसार गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के बारे में नकारात्मक टिप्पणी दर्ज करना जरूरी होता है। सरकार ने अंसारी के खिलाफ संवेदनशील जानकारी वाली एक गोपनीय रिपोर्ट भी अदालत में पेश की, जिसके आधार पर प्रमाणपत्र देने से इनकार किया गया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?
■ कोर्ट ने कहा कि अंसारी के लिए कुछ नौकरियों में अवसर सीमित हो सकते हैं, लेकिन उनके लिए रोजगार के कई अन्य रास्ते अभी भी खुले हैं।
■ पीठ ने माना कि अधिकारियों ने सही तरीके से अनुमति प्रमाणपत्र देने से इनकार किया और यह फैसला आम जनता की सुरक्षा के हित में लिया गया। 
■ कोर्ट ने कहा कि जिन अपराधों में अंसारी शामिल रहे और जिनमें उनकी भूमिका आतंकी गतिविधियों को सहयोग देने की बताई गई, उसे देखते हुए पुलिस को आशंका थी। इसलिए एहतियात के तौर पर प्रमाणपत्र नहीं दिया गया।
■ कोर्ट के अनुसार, ये अपराध बेहद गंभीर थे और देश की सुरक्षा के लिए खतरा थे। खुफिया रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अंसारी को 'उच्च जोखिम' वाला व्यक्ति माना है।
■ कोर्ट ने आगे कहा कि कुछ नौकरियों, जैसे कमर्शियल ऑटो रिक्शा चलाने के लिए, अंसारी को उच्च जोखिम के रूप में देखा गया है।

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तय नियमों के अनुसार की पुलिस ने सत्यापन प्रक्रिया
पीठ ने यह भी माना कि पुलिस की से की गई सत्यापन प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार थी। कोर्ट ने कहा कि अंसारी के पुराने रिकॉर्ड (सीआरपीएफ पर हमले के एक मामले में सजा, प्रतिबंधित आतंकी सगंठन लश्कर-ए-तैयबा से कथित संबंध और 2008 में मुंबई में हमले) में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें अनुमति प्रमाणपत्र नहीं दिया गया। 


 
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