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Bengal Polls: मालदा मामले में एनआईए का एक्शन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज किए 12 FIR; शुरू की गहन जांच

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Shubham Kumar Updated Thu, 09 Apr 2026 03:04 AM IST
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सार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मालदा में न्यायाधीशों के घेराव के मामले में सियासत तेज होती जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद एनआईए ने 12 एफआईआर दर्ज कर मामले की गहन जांच शुरू की। मामला एसआईआर कार्य से जुड़े न्यायाधीशों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा है। 

Bengal Polls NIA Takes Action in Malda Case 12 FIR Registered Following Supreme Court Order
एनआईए - फोटो : एएनआई
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विस्तार

पश्चिम बंगाल में इस महीने होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा तेजी से चढ़ रहा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर लगातार विवाद और मालदा में न्यायाधीशों के घेराव जैसी घटनाओं ने राज्य की राजनीति को हिला कर रख दिया है। ऐसे में अब इस घेराव घटना पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का एक कड़ा एक्शन सामने आया है। बुधवार को एनआईए ने इस मामले में 12 एफआईआर दर्ज किए और फिर इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी।

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एनआईए की तरफ से उठाया गया यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद उठाया गया। इससे पहले न्यायालय ने इसे राज्य प्रशासन की गंभीर विफलता और राजनीतिक हस्तक्षेप के संकेत के रूप में देखा था। ऐसे में अब इस कदम से स्पष्ट हो गया है कि चुनावी माहौल में कानून और व्यवस्था की रक्षा के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ी जाएगी। 
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एनआईए ने बयान जारी कर दी जानकारी
मामले में एनआईए ने देर रात बयान जारी कर कहा कि उसने मालदा जिले के पीएस मोथाबाड़ी के 7 एफआईआर और पीएस कालियाचक के 5 एफआईआर पुनः दर्ज किए हैं। ये मामले एसआईआर कार्य से जुड़े न्यायाधीशों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से संबंधित हैं। जांच टीमें पहले ही मालदा पहुंच गई हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
बता दें कि इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को इस मामले को अपने संज्ञान में लेकर एनआईए को हस्तांतरण करने का आदेश दिया था। न्यायालय ने कहा कि प्रशासन की विश्वसनीयता घट रही है और राजनीतिक हस्तक्षेप किया जा रहा है। सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत एक अप्रैल की घटना से जुड़े 12 मामलों को एनआईए को ट्रांसफर किया था।

सात न्यायाधीशों को घेरा गया था
इस घेराव में सात न्यायाधीश, जिनमें तीन महिलाएं और एक पांच साल का बच्चा भी शामिल था, नौ घंटे से अधिक समय तक भीड़ के कब्जे में रहे। उन्हें खाना-पानी भी नहीं मिला। घटना कालियाचक इलाके में हुई थी और इसे विरोधी तत्वों द्वारा योजनाबद्ध हमला बताया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला को फटकार लगाते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से माफी मांगने को कहा। पुलिस से कहा गया कि सभी 26 गिरफ्तार आरोपियों को एनआईए को सौंपा जाए।

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पहले से गिरफ्तार है प्रमुख संदिग्ध

गौरतलब है कि जांच में प्रमुख संदिग्ध मोफाकरुल इस्लाम और मौलाना मोहम्मद शाहजहां अली कादरी पहले से गिरफ्तार हैं। इसके बाद न्यायालय ने कहा कि यह घटना राज्य प्रशासन की पूरी विफलता को उजागर करती है और न्यायाधीशों को धमकाने की सुनियोजित कोशिश थी। मालदा में चल रही एसआईआर प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के 700 न्यायाधीश तैनात हैं, जो 60 लाख से अधिक अपात्र मतदाताओं की शिकायतों का निपटारा कर रहे हैं। घटना के बाद न्यायाधीशों की गाड़ियों पर पत्थर और ईंट-पट्ठर से हमला भी किया गया।

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