सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Protest against CAPF bill at Rajghat, relatives of personnel left behind promotion will appeal the President

CAPF: राजघाट पर सीएपीएफ बिल का विरोध, पदोन्नति में पिछड़े कार्मिकों के परिजन राष्ट्रपति से लगाएंगे गुहार

डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Asmita Tripathi Updated Thu, 09 Apr 2026 04:45 PM IST
विज्ञापन
सार

सीएपीएफ बिल' को लेकर गुरुवार को दिल्ली में राजघाट पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के पूर्व अफसरों, जवानों और परिजनों के विरोध की गूंज सुनाई दी। महात्मा गांधी के समाधि स्थल 'राजघाट' पर शांतिपूर्ण तरीके से सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) बिल 2026 का विरोध किया गया।

Protest against CAPF bill at Rajghat, relatives of personnel left behind promotion will appeal  the President
राजघाट पर सीएपीएफ बिल का विरोध - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

सीएपीएफ बिल' को लेकर गुरुवार को दिल्ली में राजघाट पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के पूर्व अफसरों, जवानों और परिजनों के विरोध की गूंज सुनाई दी। महात्मा गांधी के समाधि स्थल 'राजघाट' पर शांतिपूर्ण तरीके से सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) बिल 2026 का विरोध किया गया। पूर्व अफसरों एवं उनके परिजनों ने इस बिल को काले कानून की संज्ञा दी है। पिछले दिनों संसद ने इस बिल को मंजूरी दी है। अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि इस बिल को खत्म किया जाए। जवानों से लेकर कैडर अफसर, ये सभी पदोन्नति में पिछड़ रहे हैं। अगर सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो सीएपीएफ कार्मिकों के परिजन 15 जून को इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक कूच करेंगे। राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर उनसे केंद्रीय बलों के जांबाज कैडर अफसरों और जवानों के करियर को खराब होने से बचाने की गुहार लगाई जाएगी।

Trending Videos


पीएम और गृह मंत्री से नहीं मिला मुलाकात का समय ... 
अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों पूर्व अर्धसैनिकों, वीरांगनाओं, जवानों, व अधिकारियों के परिजनों ने राजघाट पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध व्यक्त किया। एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, उक्त मांगों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से कई बार मुलाकात का समय मांगा है, लेकिन अभी तक वहां से कोई बुलावा नहीं आया। उन्हें मजबूरी में शांति के पुजारी महात्मा गांधी की शरण में जाने के अलावा कोई चारा ही नहीं बचा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


कहीं 20 तो कहीं 16 साल में मिल रही पदोन्नति ...   
पूर्व कैडर अफसरों के मुताबिक, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सिपाही से हवलदार बनने में 20 साल का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर बनने में 15 साल लग जाते हैं। इंस्पेक्टर को सहायक कमांडेंट के पद तक पहुंचने में 14 से 15 वर्ष लग रहे हैं। सीधी भर्ती के द्वारा सेवा में आए सहायक कमांडेंट को अगली पदोन्नति यानी डिप्टी कमांडेंट बनने में 16 साल लग जाते हैं। इसी तरह से आगे के पदोन्नति क्रम का अंदाजा लगाया जा सकता है। पदोन्नति की यही रफ्तार रही तो अधिकांश कैडर अधिकारी कमांडेंट के पद से ही रिटायर हो जाएंगे। आईजी व एडीजी तक पहुंचना, ये तो एक सपना बन कर ही जाएगा। सीआरपीएफ के पूर्व आईजी केके शर्मा ने कहा, काले कानून का सबसे ज्यादा असर पदोन्नति पर पड़ेगा। 


13 हजार कैडर अधिकारी चिंतित ... 
अलायंस के अध्यक्ष एवं पूर्व एडीजी सीआरपीएफ एचआर सिंह ने कहा, आजादी के बाद पहली ऐसा लगा, जब सरकार निचले पदों पर कार्यरत सिपाही हवलदार, इंस्पेक्टर व कैडर अधिकारियों के बीच फूट डालो वाली राजनीति कर रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए ऐतिहासिक फैसले के बावजूद सरकार ने 'ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस' का दर्जा नहीं दिया। इसके विपरित, काला कानून बनाकर सरकार ने विभिन्न रैंकों में पदोन्नति क्रम को बाधित कर दिया है। इससे केंद्रीय बलों के सिपाहियों, हवलदारों और निरीक्षकों से लेकर 13 हजार कैडर अधिकारियों में अपने सुनहरे भविष्य को लेकर चिंता व्याप्त है। एचआर सिंह ने दावा किया है कि इसका असर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा। 

सहूलियत के हिसाब से 'सीएपीएफ' की व्याख्या ... 
बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद के मुताबिक, सरकार अपनी सहूलियत के हिसाब से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की व्याख्या कर रही है। जब इन बलों को पुरानी पेंशन देने का मामला सामने आया तो सरकार ने इन्हें 'संघ के सशस्त्र बल' मानने से इनकार कर दिया। दरअसल सरकार, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को ओपीएस देना ही नहीं चाहती थी। इसी कारण सरकार ने इन बलों को सिविल फोर्स बता दिया। अब 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) बिल, 2026' में लिखा है कि सीएपीएफ 'संघ के सशस्त्र बल' हैं। अगर ये बात सही है तो फिर इन बलों को पुरानी पेंशन मिलनी चाहिए।

फोर्स के नियंत्रण का आधार 'सशस्त्र बल' ...
केंद्र सरकार, सीएपीएफ को सिविलियन फोर्स बताती है। सीएपीएफ पर भारतीय सेना के कानून लागू होते हैं, फोर्स के नियंत्रण का आधार भी सशस्त्र बल हैं। इन बलों के लिए जो सर्विस रूल्स तैयार किए गए हैं, उनका आधार भी फौज है। इन सारी बातों के होते हुए भी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को 'पुरानी पेंशन' से वंचित किया गया है। एक जनवरी 2004 के बाद केंद्र सरकार की नौकरियों में भर्ती हुए सभी कर्मियों को पुरानी पेंशन के दायरे से बाहर कर उन्हें 'एनपीएस' में शामिल कर दिया गया था। इसी तर्ज पर सरकार ने सीएपीएफ जवानों को सिविल कर्मचारी मानकर उन्हें ओपीएस से बाहर निकालकर एनपीएस में शामिल कर दिया। 


क्या कहता है बीएसएफ एक्ट 1968 ... 
सरकार का मानना है कि देश में सेना, नेवी और वायु सेना ही 'सशस्त्र बल' हैं। बीएसएफ एक्ट 1968 में कहा गया है कि इस बल का गठन 'भारत संघ के सशस्त्र बल' के रूप में हुआ है। इसी तरह सीएपीएफ के बाकी बलों का गठन भी भारत संघ के सशस्त्र बलों के रूप में हुआ है। कोर्ट ने माना है कि 'सीएपीएफ' भी भारत के सशस्त्र बलों में शामिल हैं। इस लिहाज से उन पर 'एनपीएस' लागू नहीं होता। केंद्रीय गृह मंत्रालय, द्वारा 6 अगस्त 2004 को जारी पत्र में बताया गया है कि गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत केंद्रीय बल, 'संघ के सशस्त्र बल' हैं। 

सिविल महकमे के कर्मी नहीं लेते ऐसी शपथ ... 
सीएपीएफ जवानों को अलाउंस भी सशस्त्र बलों की तर्ज पर मिलते हैं। इन बलों में कोर्ट मार्शल का भी प्रावधान है। सीआरपीएफ के पूर्व अधिकारी सर्वेश त्रिपाठी ने कहा कि इस मामले में सरकार दोहरा मापदंड अपना रही है। अगर सीएपीएफ जवानों को सरकार, सिविलियन मानती है तो उनमें आर्मी की तर्ज पर बाकी प्रावधान क्यों हैं। फोर्स के नियंत्रण का आधार भी सशस्त्र बल है। जो सर्विस रूल्स हैं, वे भी सैन्य बलों की तर्ज पर बने हैं। अब इन्हें सिविलियन फोर्स बता रहे हैं। ऐसे में ये बल अपनी सर्विस का निष्पादन कैसे करेंगे। इन बलों को शपथ दिलाई गई थी कि इन्हें जल, थल और वायु में जहां भी भेजा जाएगा, ये वहीं पर काम करेंगे। सिविल महकमे के कर्मी तो ऐसी शपथ नहीं लेते हैं। अब सरकार ने सीएपीएफ बिल को संसद से मंजूर कराकर अर्धसैनिक बलों के कार्मिकों और अफसरों के हितों पर कुठाराघात किया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed