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Bhojshala Row: भोजशाला से कितनी दूर है नमाज की नई जगह? सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार से मांगा जवाब

Wed, 22 Jul 2026 01:40 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 22 Jul 2026 01:40 PM IST
सार

Bhojshala Row: भोजशाला विवाद में नमाज के लिए दी गई वैकल्पिक जगह को लेकर मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि यह जगह भोजशाला परिसर से काफी दूर है। जानिए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या निर्देश दिए।

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Bhojshala row: SC to hear Muslim side's plea over alternate namaz site, seeks response of MP
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष की उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें कहा गया है कि मध्य प्रदेश सरकार ने नमाज के लिए जो दूसरी जगह तय की है, वह धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर से काफी दूर है।
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सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार से क्या पूछा?
चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह मध्य प्रदेश सरकार से यह जानकारी लें कि क्या विवादित परिसर के पास नमाज के लिए दूसरी जगह उपलब्ध कराई जा सकती है।
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मुस्लिम पक्ष ने क्या आपत्ति जताई?
मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने कहा कि अदालत ने राज्य सरकार को भोजशाला के पास नमाज के लिए खुली जगह देने का निर्देश दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जो जमीन तय की है, वह करीब दो किलोमीटर दूर है।
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अहमदी ने कहा, अदालत का आदेश था कि जमीन भोजशाला के पास हो। शुक्रवार की नमाज के लिए जो जमीन दी गई है, वह दो किलोमीटर दूर है। हम पहले ही शुक्रवार की नमाज नहीं पढ़ सके हैं। 

ये भी पढ़ें: 'समय बर्बाद न करें': CJP प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई का मामला, तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार क्यों?


मध्य प्रदेश सरकार ने क्या जवाब दिया?
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि नमाज के लिए तय की गई दूसरी जगह विवादित परिसर से करीब 900 मीटर दूर है। हालांकि, उन्होंने पीठ को भरोसा दिलाया कि वह खुद इस मामले को देखेंगे और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाएंगे। मेहता ने कहा, मैं खुद इस मामले को देखूंगा और जरूरत पड़ी तो इसे ठीक करूंगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत के पहले दिए गए आदेश का 'शब्दशः और पूरी भावना के साथ' पालन होना चाहिए। पीठ ने मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई और सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिया कि वह नमाज के लिए विवादित परिसर के पास जगह उपलब्ध कराने के संबंध में राज्य सरकार से निर्देश लेकर आएं।
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