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Hindi News ›   India News ›   Birth and Death Registration Amendment Bill Passed in Lok Sabha Without Debate Amid Opposition Uproar

संसद: न चर्चा, न बहस... तीन मिनट में लोकसभा से पास हुआ जन्म-मृत्यु संशोधन विधेयक, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

Sat, 01 Aug 2026 06:24 AM IST
Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Sat, 01 Aug 2026 06:24 AM IST
सार

लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक महज तीन मिनट में पारित हो गया। बिना चर्चा विधेयक पारित होने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई।

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Birth and Death Registration Amendment Bill Passed in Lok Sabha Without Debate Amid Opposition Uproar
नित्यानंद राय - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

न चर्चा, न बहस, बस तीन मिनट और विपक्ष के हंगामे के बीच महत्वपूर्णजन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पर लोकसभा की मुहर लग गई। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक दूसरे पर संसदीय परंपरा को मटियामेट करने के आरोप लगाए। इससे एक दिन पहले राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम को राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण और दर्जा देने वाला विधेयक भी बिना किसी चर्चा के महज पांच मिनट में पारित हो गया।

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विपक्ष के हंगामे के बीच गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव रखा। आसन पर कार्यवाही संचालन कर रहे दिलीप सैकिया ने चर्चा के लिए एक-एक कर सदस्यों के नाम पुकारे। दिलचस्प यह है कि न तो सत्ता पक्ष और न ही विपक्ष के सदस्य ने चर्चा में दिलचस्पी दिखाई। इसके बाद महज तीन मिनट में विधेयक को ध्वनिमत से लोकसभा की मंजूरी मिल गई।
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विधेयक में जन्म और मृत्यु के दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद पंजीकरण कराने क लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को अनिवार्य बना दिया गया है। पहले एक साल से ज्यादा देरी होने पर जिला मजिस्ट्रेट, उप विभागीय मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होती थी।
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शीर्ष कोर्ट की चिंता का नहीं लिया संज्ञान
संसद में बिना चर्चा के विधेयक पारित कराने के बढ़ते चलन पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा था कि इससे अदालतों में मुकदमे का बोझ बढ़ता है। ट्रिब्यूनल सुधार बिल 2021 को बिना सार्थक चर्चा के पारित कराने पर चिंता जताते हुए तत्काली सीजेआई एनवी रमन्ना ने सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि चर्चा के बिना किसी विधेयक की खामियां सामने नहीं आती। उचित व्याख्या और प्रावधान न होने के कारण ऐसे कानून से पीड़ित लोग अदालत की शरण लेते हैं।

नहीं चली राज्यसभा की कार्यवाही नियम 267 को लेकर खरगे से ठनी
राज्यसभा में चल रहा व्यवधान शुक्रवार को भी जारी रहा। हंगामा थमता न देख सभापति ने सदन की कार्यवाही को सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इसी के साथ दसवें दिन लगातार प्रयास के बाद भी नहीं चला सदन। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर सड़क छाप राजनीति करने का आरोप लगाया। उच्च सदन में सभापति ने ससदीय कामकाज के बाद शून्यकाल शुरू कराया, इस बीच खरगे ने कहा कि उनके द्वारा नियम 267 के तहत दिए गए नोटिस पर चर्चा हो इस सभापति ने कहा कि उनके नोटिस को अस्वीकृत कर दिया गया है।

सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने

  • विपक्ष कार्य मंत्रणा समिति में विधेयक इसी रवैये के का समर्थन करता है और सदन में हंगामा। बिना चर्चा विधेयक पारित कराने पर मजबूर है। -किरेन रिजिजू, संसदीय कार्य मंत्री कारण सरकार
  • विपक्ष नहीं चाहता कि विधेयक बिना चर्चा के पारित हो। गृह मंत्री सदन में क्यों नहीं आते? सरकार ने बिना चर्चा के विधायी कार्यों को पूरा करने की आदत बना ली है। - धर्मेंद्र यादव, सांसद, सपा
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