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डिजिटल होगी जनगणना 2027: मोबाइल और जियो-टैगिंग से होगा डेटा संग्रह, पहली बार जाति गणना भी शामिल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: लव गौर
Updated Thu, 26 Feb 2026 08:39 AM IST
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सार
Census 2027: हर दस साल में होने वाली जनगणना इस बार पूरी तरह से डिजिटल होगी। जनगणना 2027 के लिए कागजी फॉर्म और रजिस्टरों की जगह अब इलेक्ट्रोनिक डिवाइस, जियो-टैगिंग मैपिंग टूल और एक केंद्रीकृत वेब आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। इस तरह से यह भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी।
डिजिटल होगी जनगणना 2027
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया के रूप में आयोजित किया जाएगा। इसके केंद्र में जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) नाम का विशेष डिजिटल पोर्टल होगा, जिसके जरिए दुनिया के सबसे बड़े प्रशासनिक अभ्यासों में से एक भारत की जनगणना का संचालन किया जाएगा।
पहली बार पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया
कागजी फॉर्म और रजिस्टरों की जगह अब हाथ से चलने वाले उपकरण, जियो-टैगिंग मैपिंग टूल और एक केंद्रीकृत वेब बेस्ड प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। करीब 32 लाख फील्ड कार्यकर्ताओं (गणनाकार और पर्यवेक्षक) मोबाइल डिवाइस के माध्यम से करोड़ों घरों से जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक आंकड़े एकत्र करेंगे। यह डाटा सीएमएमए प्रणाली के जरिए तुरंत ट्रांसमिट, संकलित और सत्यापित किया जा सकेगा, जिससे त्रुटियों में कमी आएगी और समय की बचत होगी।
भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को जारी सर्कुलर (परिपत्र) में कहा कि जनगणना 2027 में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा, जिससे डेटा संग्रह की गुणवत्ता, दक्षता और समयबद्धता बढ़ेगी।
परिपत्र में कहा, 'आगामी जनगणना 2027 में आंकड़ों के संग्रह और प्रसार की गुणवत्ता, दक्षता और समयबद्धता को बढ़ाने के लिए डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। आगामी जनगणना में आंकड़े डिजिटल माध्यम से एकत्र किए जाएंगे, जो जनगणना प्रक्रिया के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी कदम होगा।'
रियल-टाइम निगरानी संभव
सर्कुलर के अनुसार, सीएमएमएस के जरिए उपयोगकर्ता निर्माण, प्रशिक्षण मॉड्यूल, हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) का गठन, सुपरवाइजरी सर्किल का निर्धारण, गणनाकर्मियों की नियुक्ति, पहचान पत्र जारी करने और फील्ड ऑपरेशन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। इसमें कहा गया है कि सीएमएमएस जनगणना क्षेत्र के संचालन की नियुक्तियों, प्रशिक्षण और लगभग वास्तविक समय की निगरानी को सुविधाजनक बनाने के लिए भूमिका-आधारित पहुंच नियंत्रण को भी सक्षम बनाता है।
इसमें वेब-बेस्ड मैपिंग एप्लीकेशन भी होगा, जिससे घरों की जियो-टैगिंग की जाएगी। इससे सीमाओं का अधिक सटीक निर्धारण होगा और किसी क्षेत्र के छूटने या दोहराव की संभावना कम होगी। अधिकारियों के अनुसार, जियो-टैगिंग से भविष्य में आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचा विकास और योजना निर्माण के लिए उपयोगी डिजिटल डेटा तैयार होगा।
ये भी पढ़ें: Caste Census of India: कैसे होगी जनगणना, कब से कर सकेंगे स्व-गणना; पढ़ें पूरी योजना
पहली बार जाति गणना भी शामिल
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसमें पहली बार जाति गणना भी शामिल होगी। आजादी के बाद यह देश की 16वीं जनगणना होगी और नागरिकों को स्व-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया जाएगा।
जनगणना पहले 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था। अब इसे दो चरणों में कराया जाएगा...
ये भी पढ़ें: Census: उत्तराखंड में जनगणना के पहले चरण की अधिसूचना जारी, 25 अप्रैल से शुरू होगी मकान गणना
पहले चरण में नागरिकों से 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। गांव या शहरी वार्ड को छोटे-छोटे ब्लॉकों में बांटा जाएगा, जिन्हें हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) और गणना ब्लॉक (EB) कहा जाएगा। ये जनगणना की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाइयां होंगी।
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पहली बार पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया
कागजी फॉर्म और रजिस्टरों की जगह अब हाथ से चलने वाले उपकरण, जियो-टैगिंग मैपिंग टूल और एक केंद्रीकृत वेब बेस्ड प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। करीब 32 लाख फील्ड कार्यकर्ताओं (गणनाकार और पर्यवेक्षक) मोबाइल डिवाइस के माध्यम से करोड़ों घरों से जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक आंकड़े एकत्र करेंगे। यह डाटा सीएमएमए प्रणाली के जरिए तुरंत ट्रांसमिट, संकलित और सत्यापित किया जा सकेगा, जिससे त्रुटियों में कमी आएगी और समय की बचत होगी।
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भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को जारी सर्कुलर (परिपत्र) में कहा कि जनगणना 2027 में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा, जिससे डेटा संग्रह की गुणवत्ता, दक्षता और समयबद्धता बढ़ेगी।
परिपत्र में कहा, 'आगामी जनगणना 2027 में आंकड़ों के संग्रह और प्रसार की गुणवत्ता, दक्षता और समयबद्धता को बढ़ाने के लिए डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। आगामी जनगणना में आंकड़े डिजिटल माध्यम से एकत्र किए जाएंगे, जो जनगणना प्रक्रिया के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी कदम होगा।'
रियल-टाइम निगरानी संभव
सर्कुलर के अनुसार, सीएमएमएस के जरिए उपयोगकर्ता निर्माण, प्रशिक्षण मॉड्यूल, हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) का गठन, सुपरवाइजरी सर्किल का निर्धारण, गणनाकर्मियों की नियुक्ति, पहचान पत्र जारी करने और फील्ड ऑपरेशन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। इसमें कहा गया है कि सीएमएमएस जनगणना क्षेत्र के संचालन की नियुक्तियों, प्रशिक्षण और लगभग वास्तविक समय की निगरानी को सुविधाजनक बनाने के लिए भूमिका-आधारित पहुंच नियंत्रण को भी सक्षम बनाता है।
इसमें वेब-बेस्ड मैपिंग एप्लीकेशन भी होगा, जिससे घरों की जियो-टैगिंग की जाएगी। इससे सीमाओं का अधिक सटीक निर्धारण होगा और किसी क्षेत्र के छूटने या दोहराव की संभावना कम होगी। अधिकारियों के अनुसार, जियो-टैगिंग से भविष्य में आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचा विकास और योजना निर्माण के लिए उपयोगी डिजिटल डेटा तैयार होगा।
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पहली बार जाति गणना भी शामिल
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसमें पहली बार जाति गणना भी शामिल होगी। आजादी के बाद यह देश की 16वीं जनगणना होगी और नागरिकों को स्व-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया जाएगा।
जनगणना पहले 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था। अब इसे दो चरणों में कराया जाएगा...
- पहला चरण: अप्रैल से सितंबर 2026 तक मकान सूचीकरण, आवास गणना
- दूसरा चरण: फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना
ये भी पढ़ें: Census: उत्तराखंड में जनगणना के पहले चरण की अधिसूचना जारी, 25 अप्रैल से शुरू होगी मकान गणना
पहले चरण में नागरिकों से 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। गांव या शहरी वार्ड को छोटे-छोटे ब्लॉकों में बांटा जाएगा, जिन्हें हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) और गणना ब्लॉक (EB) कहा जाएगा। ये जनगणना की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाइयां होंगी।
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