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Chandipura Virus: गुजरात में मानसून के दौरान 22 बच्चों की मौत, कितना खतरनाक है यह वायरस?

Mon, 03 Aug 2026 09:06 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 03 Aug 2026 09:06 PM IST
सार

Chandipura Virus: गुजरात में इस मानसून चांदीपुरा वायरस ने चिंता बढ़ा दी। अब तक 184 संदिग्ध मामलों में 35 बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई है और 22 बच्चों की मौत हो चुकी है। कई बच्चे अभी अस्पतालों में भर्ती हैं। सरकार ने सभी अस्पतालों को सतर्क रहने और गंभीर मरीजों को तुरंत आईसीयू में भर्ती करने के निर्देश दिए हैं। चांदीपुरा वायरस क्या है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है?

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Chandipura Virus 22 children die in Gujarat during the monsoon; how dangerous is virus
क्या मानसून में बढ़ जाता है चांदीपुरा वायरस का खतरा? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

गुजरात में मानसून के दौरान चांदीपुरा वायरस (सीएचपीवी) के मामले तेजी से सामने आए हैं। राज्य में अब तक इस वायरस से 22 बच्चों की मौत हो चुकी है। सरकार के मुताबिक, 184 संदिग्ध मामलों में से 35 बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि 11 नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। सात बच्चों का इलाज अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि लक्षण दिखते ही बच्चों को बिना देरी आईसीयू में भर्ती किया जाए, ताकि गंभीर स्थिति और अंगों के खराब होने से बचाया जा सके।

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गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने सोमवार को बताया कि संक्रमण के सभी मरीज 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि गांधीनगर, साबरकांठा-हिम्मतनगर, पाटन, राजकोट और भावनगर के सिविल अस्पतालों में भर्ती बच्चों का विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इलाज किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि संक्रमित बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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चांदीपुरा वायरस के कितने मामले सामने आए हैं?

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, अब तक राज्य में 184 संदिग्ध मरीजों की पहचान की गई है। इनमें से 35 मामलों में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि हो चुकी है और 11 नमूनों की जांच जारी है। अब तक 22 बच्चों की इस वायरस से मौत हुई है। सात बच्चे अभी उपचाराधीन हैं। सरकार ने कहा कि संक्रमण किसी एक गांव या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग इलाकों से मामले सामने आ रहे हैं। इसी वजह से पूरे राज्य में निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी गई है।

सरकार ने बचाव के लिए क्या कदम उठाए हैं?

राज्य सरकार ने पशुपालन वाले क्षेत्रों में विशेष अभियान शुरू किया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें इन इलाकों में कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं ताकि सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) को खत्म किया जा सके। यही कीट चांदीपुरा वायरस फैलाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। सरकार ने सभी सरकारी और निजी बाल रोग अस्पतालों को निर्देश दिया है कि जिन बच्चों में वायरस के लक्षण दिखाई दें, उन्हें तुरंत ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सुविधा वाले आईसीयू में भर्ती किया जाए। सरकार का मानना है कि समय पर इलाज शुरू होने से मल्टी ऑर्गन फेल्योर जैसी गंभीर स्थिति को रोका जा सकता है।

चांदीपुरा वायरस क्या है और क्यों है खतरनाक?

चांदीपुरा एन्सेफलाइटिस एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से सैंडफ्लाई और कुछ अन्य कीड़ों के जरिए फैलती है। यह वायरस दिमाग में सूजन पैदा करता है और बच्चों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। इस वायरस की पहचान पहली बार वर्ष 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव के एक मरीज में हुई थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान इस वायरस का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों में तेज बुखार, सुस्ती या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल ले जाना जरूरी है।

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