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Hindi News ›   India News ›   Joint Parliamentary panel backs Corporate Laws (Amendment) Bill, 2026

Corporate Law: कॉरपोरेट कानून संशोधन विधेयक-2026 को संसदीय समिति की मंजूरी, छोटे कारोबारों को मिलेगी बड़ी राहत

Mon, 03 Aug 2026 10:19 PM IST
Pavan पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Mon, 03 Aug 2026 10:19 PM IST
सार

संयुक्त संसदीय समिति ने बताया कि उसे 130 ज्ञापन प्राप्त हुए, जिनमें 900 से अधिक सुझाव शामिल थे। समिति ने छह सांसदों के अलावा विभिन्न मंत्रालयों, नियामक संस्थाओं, उद्योग संगठनों, पेशेवर निकायों, बैंकों, कानूनी विशेषज्ञों और कॉरपोरेट क्षेत्र के प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा की।

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Joint Parliamentary panel backs Corporate Laws (Amendment) Bill, 2026
नया संसद भवन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संसद की संयुक्त समिति ने कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 का समर्थन किया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि कंपनियों से जुड़े छोटे-मोटे प्रक्रियागत उल्लंघनों को और अधिक अपराध की श्रेणी से बाहर (डीक्रिमिनलाइज) किया जाए। साथ ही छोटे कारोबार, स्टार्टअप और वन पर्सन कंपनियों (ओपीसी) के लिए अनुपालन (कॉम्प्लायंस) नियम आसान बनाए जाएं और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) से जुड़े प्रावधानों में भी राहत दी जाए। सोमवार को संसद में पेश की गई समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि विधेयक का उद्देश्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यापार करने में आसानी) को बढ़ावा देना है। इसके तहत छोटे कारोबारों पर नियमों का बोझ कम करने, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, बदलते कारोबारी माहौल के अनुरूप नए प्रावधान जोड़ने और कानून की अस्पष्टताओं को दूर करने का प्रस्ताव है।
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छोटे उल्लंघनों पर जेल नहीं, सिर्फ जुर्माना
समिति ने कहा कि अब कम जोखिम वाले प्रक्रियागत उल्लंघनों को अदालत में आपराधिक मामलों की तरह चलाने के बजाय आंतरिक न्यायिक व्यवस्था (इन-हाउस एडजुडिकेशन) के जरिए केवल आर्थिक दंड से निपटाया जाए। वहीं, धोखाधड़ी और गंभीर अपराधों के मामलों में आपराधिक कार्रवाई जारी रहेगी। समिति ने कुछ नियमों के उल्लंघन पर 50,000 रुपये का निश्चित जुर्माना तय करने की सिफारिश की है। साथ ही राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण के आदेशों का पालन न करने पर जेल की सजा का प्रावधान हटाने और जुर्माने की वसूली नए धारा 454बी के तहत करने की भी सिफारिश की गई है।
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छोटे कारोबारों को सीएसआर में भी राहत
रिपोर्ट में छोटे कारोबारों के लिए सीएसआर नियमों में अतिरिक्त छूट देने का सुझाव दिया गया है। समिति ने यह भी सिफारिश की है कि छोटी कंपनियों को नकद के बजाय वस्तु या सेवाओं के रूप में सीएसआर योगदान करने की अनुमति दी जाए। हालांकि, समिति ने स्पष्ट किया कि अनिवार्य वैधानिक ऑडिट से छूट केवल छोटी कंपनियों को मिले, सार्वजनिक कंपनियों को नहीं।
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विदेशी कंपनियों के लिए भारत आना होगा आसान
समिति ने सुझाव दिया है कि विदेशी कंपनियों को अपने मूल देश में कंपनी बंद किए बिना भारत के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर में आसानी से री-डोमिसाइल होने की अनुमति दी जाए। इससे भारत को वैश्विक निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, आईएफएससी में काम करने वाली कंपनियों और एलएलपी को विदेशी मुद्रा में शेयर पूंजी जारी करने और बनाए रखने की भी अनुमति देने का प्रस्ताव है।


डिजिटल होगी कंपनी संचालन व्यवस्था
विधेयक में कंपनी संचालन को अधिक डिजिटल बनाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत-
  • हाइब्रिड और वर्चुअल शेयरधारक बैठकें आयोजित की जा सकेंगी।
  • इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग और ऑटोमेटेड फाइलिंग की सुविधा मिलेगी।
  • हालांकि, हर कंपनी को साल में कम से कम एक वार्षिक आम बैठक भौतिक रूप से आयोजित करनी होगी।

130 ज्ञापन और 900 से अधिक सुझावों पर बनी रिपोर्ट
समिति ने उद्योग और वित्तीय क्षेत्र की राय जानने के लिए मुंबई का अध्ययन दौरा भी किया, जहां स्टार्टअप, निवेश कंपनियों, ट्रस्ट, बैंकिंग संस्थानों और पूंजी बाजार से जुड़े संगठनों से बातचीत की गई। विधेयक का मुख्य उद्देश्य कंपनी कानून की प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनुपालन का बोझ कम करना और कॉरपोरेट गवर्नेंस को मजबूत बनाना है, ताकि भारतीय कारोबारी माहौल वैश्विक मानकों के अनुरूप अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेशकों के लिए अनुकूल बन सके।
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