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Kerala: 'धान उत्पादन को बोझ बताना किसान और केरल विरोधी सोच', सीएम विजयन ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 08 Feb 2026 02:28 PM IST
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सार
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार ने केरल से धान किसानों को दी जा रही अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि (बोनस) बंद करने की मांग की है। इस दौरान उन्होंने कि धान उत्पादन को बोझ बताना किसान और केरल विरोधी सोच है।
पिनारई विजयन, सीएम, केरल
- फोटो : ANI
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विस्तार
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि धान उत्पादन बढ़ने को देश पर बोझ बताना किसानों के खिलाफ सोच को दिखाता है और यह केरल के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैये का संकेत है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय सचिव ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि देश में धान का उत्पादन जरूरत से ज्यादा हो गया है और इसकी खरीद पर आने वाला खर्च सरकारी खजाने पर बोझ बन रहा है। इस संबंध में एक पत्र राज्य के मुख्य सचिव को मिला है।
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'धान किसानों को अतिरिक्त बोनस देती है केरल सरकार'
सीएम विजयन ने कहा कि केरल सरकार केंद्र द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के ऊपर धान किसानों को अतिरिक्त बोनस देती है। उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार को इससे परेशानी क्यों हो रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केरल धान की खरीद पर प्रति किलो 6.31 रुपये अतिरिक्त देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग हजारों करोड़ रुपये के कॉरपोरेट कर्ज माफ करने में हिचकिचाते नहीं, वही धान किसानों को दी जा रही छोटी-सी मदद को बड़ा बोझ बता रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, उत्पादन बढ़ने को नुकसान बताकर राज्य पर बोनस नीति की समीक्षा का दबाव बनाया जा रहा है, जो न सिर्फ किसानों बल्कि पूरे केरल के खिलाफ रवैये को दिखाता है।
सीएम विजयन ने उठाया सवाल
मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह कदम भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने कहा कि एक तरफ केंद्र ऐसी बातें कर रहा है, वहीं दूसरी ओर धान किसानों के लिए केंद्र का हिस्सा समय पर जारी भी नहीं किया जा रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले सत्तारूढ़ एलडीएफ के संयोजक टी. पी. रामकृष्णन ने भी केंद्र से अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि बंद करने के निर्देश को तुरंत वापस लेने की मांग की थी। रामकृष्णन ने आरोप लगाया था कि इससे देश की खाद्य आत्मनिर्भरता कमजोर होगी और उन्होंने इसके खिलाफ जोरदार विरोध की अपील की थी।
इससे पहले, 9 जनवरी को केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय सचिव वी. वुअलनाम ने केरल के मुख्य सचिव ए. जयथिलक को पत्र लिखकर गेहूं और धान पर दी जा रही अतिरिक्त प्रोत्साहन नीति की समीक्षा करने और इसे बंद करने पर विचार करने को कहा था। पत्र में यह भी सुझाव दिया गया था कि दालों, तिलहनों और मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाए, ताकि पोषण सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और टिकाऊ कृषि जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल किया जा सके।
यह भी पढ़ें - SIR Row: 'एसआईआर के लिए ग्रुप बी के 8505 अधिकारी उपलब्ध कराने को तैयार', चुनाव आयोग से बोली बंगाल सरकार
हर साल सरकारी खजाने पर पड़ रहा बोझ
पत्र में कहा गया था कि गेहूं और धान के रिकॉर्ड उत्पादन के कारण सरकारी भंडार सार्वजनिक वितरण प्रणाली, बफर स्टॉक और अन्य जरूरतों से कहीं ज्यादा हो गया है। इससे हर साल सरकारी खजाने पर भारी और लगातार बोझ पड़ रहा है। इस मुद्दे पर केरल के कृषि मंत्री पी. प्रसाद ने भी केंद्र के सुझाव को 'अस्वीकार्य' बताया है और साफ कहा है कि धान की खेती पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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'धान किसानों को अतिरिक्त बोनस देती है केरल सरकार'
सीएम विजयन ने कहा कि केरल सरकार केंद्र द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के ऊपर धान किसानों को अतिरिक्त बोनस देती है। उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार को इससे परेशानी क्यों हो रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केरल धान की खरीद पर प्रति किलो 6.31 रुपये अतिरिक्त देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग हजारों करोड़ रुपये के कॉरपोरेट कर्ज माफ करने में हिचकिचाते नहीं, वही धान किसानों को दी जा रही छोटी-सी मदद को बड़ा बोझ बता रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, उत्पादन बढ़ने को नुकसान बताकर राज्य पर बोनस नीति की समीक्षा का दबाव बनाया जा रहा है, जो न सिर्फ किसानों बल्कि पूरे केरल के खिलाफ रवैये को दिखाता है।
सीएम विजयन ने उठाया सवाल
मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह कदम भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने कहा कि एक तरफ केंद्र ऐसी बातें कर रहा है, वहीं दूसरी ओर धान किसानों के लिए केंद्र का हिस्सा समय पर जारी भी नहीं किया जा रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले सत्तारूढ़ एलडीएफ के संयोजक टी. पी. रामकृष्णन ने भी केंद्र से अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि बंद करने के निर्देश को तुरंत वापस लेने की मांग की थी। रामकृष्णन ने आरोप लगाया था कि इससे देश की खाद्य आत्मनिर्भरता कमजोर होगी और उन्होंने इसके खिलाफ जोरदार विरोध की अपील की थी।
इससे पहले, 9 जनवरी को केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय सचिव वी. वुअलनाम ने केरल के मुख्य सचिव ए. जयथिलक को पत्र लिखकर गेहूं और धान पर दी जा रही अतिरिक्त प्रोत्साहन नीति की समीक्षा करने और इसे बंद करने पर विचार करने को कहा था। पत्र में यह भी सुझाव दिया गया था कि दालों, तिलहनों और मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाए, ताकि पोषण सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और टिकाऊ कृषि जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल किया जा सके।
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हर साल सरकारी खजाने पर पड़ रहा बोझ
पत्र में कहा गया था कि गेहूं और धान के रिकॉर्ड उत्पादन के कारण सरकारी भंडार सार्वजनिक वितरण प्रणाली, बफर स्टॉक और अन्य जरूरतों से कहीं ज्यादा हो गया है। इससे हर साल सरकारी खजाने पर भारी और लगातार बोझ पड़ रहा है। इस मुद्दे पर केरल के कृषि मंत्री पी. प्रसाद ने भी केंद्र के सुझाव को 'अस्वीकार्य' बताया है और साफ कहा है कि धान की खेती पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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