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Congress: कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर और शशि थरूर आए आमने-सामने, खुले पत्र लिखकर एक-दूसरे पर साधा निशाना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Thu, 12 Mar 2026 06:07 PM IST
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सार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणि शंकर अय्यर और शशि थरूर ने खुले पत्रों के जरिए एक-दूसरे की आलोचना की है। अय्यर ने थरूर के बयानों पर नाराजगी जताते हुए उनसे अलग रास्ता अपनाने की बात कही। वहीं थरूर ने जवाब में कहा कि उनके विचारों और चरित्र पर की गई टिप्पणियां अनावश्यक हैं। पूरा मामला क्या है, पढ़िए रिपोर्ट-
मणि शंकर अय्यर, शशि थरूर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं मणि शंकर अय्यर और शशि थरूर आमने-सामने आ गए हैं। दोनों ने खुले पत्र के जरिये एक-दूसरे पर निशाना साधा है। अय्यर ने कहा कि वह अब अपने पार्टी सहयोगी थरूर से अलग रास्ता अपना रहे हैं। जबकि, थरूर ने कहा कि वरिष्ठ नेता ने उनके बारे में कई अनावश्यक टिप्पणियां की हैं।
कहां से शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब अय्यर ने थरूर के नाम खुला पत्र लिखा। यह खुला पत्र इसी हफ्ते की शुरुआत में एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। अय्यर ने कहा कि छह मार्च को एक टेलीविजन चैनल के कार्यक्रम में थरूर ने ईरान के खिलाफ जारी 'गैरकानूनी और पापी युद्ध' पर जो जवाब दिया, उससे वह अंदर तक हिल गए। अय्यर के मुताबिक, इस्राइल यह युद्ध अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ मिलकर लड़ रहा है।
मणि शंकर अय्यर ने क्या कहा?
अय्यर ने लिखा कि (थरूर के बयान से) वह इतने परेशान हो गए कि उन्हें नींद नहीं आई और रात में तीन बजे उठकर उन्होंने यह खुला पत्र लिखना शुरू किया। अय्यर ने दावा किया कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में थरूर के लिए वोट देकर अपने राजनीतिक करियर को दांव पर लगा दिया था, जबकि उन्हें पता था कि थरूर बुरी तरह हार जाएंगे।
उन्होंने कहा कि अगले दिन उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में लेख लिखकर यह भी कहा था कि विजेता मल्लिकार्जुन खरगे को बड़े दिल से थरूर के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करना चाहिए, जबकि उनके पीछे गांधी परिवार और जी-23 समूह के शेष नेताओं का भी समर्थन था।
अय्यर ने लिखा कि उन्होंने जोर देकर कहा था कि खरगे को थरूर को कांग्रेस में सम्मानजनक स्थान देना चाहिए, ताकि पार्टी उनकी प्रतिभा का पूरा उपयोग कर सके। अय्यर के अनुसार, इसके बाद से गांधी परिवार और खरगे उनसे मिलने से इनकार करते रहे, लेकिन उन्हें लगा कि नैतिक रूप से वह सही थे। अय्यर ने अपने लेख 'शशि थरूर को खुला पत्र: नैतिक भूल और अन्य बातें' में कहा कि अब उन्हें लगता है कि उन्होंने गलत मुद्दे का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पिछली रात थरूर की ओर से 'जिसकी ताकत उसकी बात सही' जैसी सोच का समर्थन करना उन्हें बेहद चौंकाने वाला लगा।
उन्होंने कहा कि थरूर ने कहा था कि वह समझते हैं कि विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका के खिलाफ सख्त रुख लेने से क्यों बचते हैं, क्योंकि भारत को खासकर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित परिणामों का डर है। अय्यर ने यह भी कहा कि अगर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में थरूर विदेश नीति से जुड़े फैसलों को यह कहते हुए सरकार पर छोड़ देते हैं कि सरकार के पास ही सारी जानकारी होती है, तो फिर वह अपने इस बड़े पद पर आखिर कर क्या रहे हैं।
अय्यर ने कहा कि उनकी आंखें तब भी खुल गई थीं, जब थरूर ने सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म वाली महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अस्वीकार किया था। अय्यर ने कहा कि उन्हें यह सुनकर भरोसा नहीं हुआ कि सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़े और आइवी लीग विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाले एक आधुनिक और विद्वान व्यक्ति इस तरह की पुरानी और महिलाओं के साथ भेदभाव करने वाली परंपरा का समर्थन कर सकते हैं, जिसमें महिलाओं को उनके प्राकृतिक शारीरिक कारणों के कारण सजा दी जाती है।
अय्यर ने कहा कि उस समय ही उन्हें संकेत मिल गए थे कि थरूर पूरी तरह 'हम में से एक' नहीं हैं। उन्होंने लिखा कि अब एक ऐसे शासन के प्रति थरूर की सहानुभूति, जिस पर सांप्रदायिक दुर्भावना का आरोप है, उनके लिए आखिरी कारण बन गई है और अब उनके रास्ते अलग हो रहे हैं।
अय्यर के खुले पत्र का थरूर ने क्या जवाब दिया?
अय्यर के इस पत्र का जवाब देते हुए शशि थरूर ने भी एक खुला पत्र लिखा, जिसे गुरुवार को एक समाचार चैनल की वेबसाइट ने प्रकाशित किया। थरूर ने कहा कि असहमति एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान होती है, लेकिन किसी सहयोगी के इरादों या देशभक्ति पर सिर्फ इसलिए सवाल उठाना कि वह विदेश नीति पर अलग सोच रखते हैं, सार्वजनिक बहस को मजबूत नहीं करता।
थरूर ने कहा कि अय्यर को अपने विचार रखने का अधिकार है। लेकिन हाल में उनके विचारों और उनके चरित्र के बार में की गई सार्वजनिक टिप्पणियों का स्पष्ट जवाब देना जरूरी हो गया है। थरूर ने कहा कि उन्होंने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मामलों को राष्ट्र हित के नजरिए से देखा है और हर चर्चा में भारत के हित, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा को केंद्र में रखा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति की वास्तविकताओं को समझना और भारत की अर्थव्यवस्था तथा रणनीतिक स्थिति पर पड़ने वाले असर का आकलन करना कोई नैतिक समर्पण नहीं है, बल्कि जिम्मेदार शासन की निशानी है। उन्होंने कहा कि भारत की कूटनीति हमेशा सिद्धांत और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाकर चलती रही है।
ये भी पढ़ें: 'देश के किसी भी पेट्रोल पंप पर तेल खत्म नहीं', पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं
थरूर ने यह भी कहा कि उनकी विदेश यात्राओं को लेकर अय्यर के आरोप बेहद आपत्तिजनक हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को छोड़कर, जिसमें वह एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और नेता थे, उनकी बाकी सभी विदेश यात्राएं निजी क्षमता में होती हैं। थरूर ने कहा कि इन यात्राओं का अनुरोध, आयोजन या खर्च सरकार नहीं करती। उन्हें जितने अंतरराष्ट्रीय निमंत्रण मिलते हैं, उनमें से कई को वह स्वीकार भी नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि यह कहना कि वह प्रधानमंत्री को खुश करने के लिए विदेश यात्रा करते हैं, पूरी तरह बेबुनियाद आरोप है।
सबरीमाला मुद्दे पर थरूर ने कहा कि उन्हें थोड़ा हैरानी होती है कि पहले अय्यर उन्हें कथित रूप से गलत विचार रखने के लिए आलोचना करते हैं और अब उसी मुद्दे पर पार्टी के आधिकारिक रुख का समर्थन करने के लिए भी उन्हें घेर रहे हैं। थरूर ने कहा कि उस समय उन्होंने अपना पक्ष विस्तार से समझाया भी था, लेकिन लगता है कि अय्यर ने उसे ध्यान से नहीं पढ़ा। थरूर ने यह भी कहा कि वह कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में उनका समर्थन करने के लिए अय्यर के आभारी हैं, क्योंकि वह सिद्धांत के आधार पर लिया गया फैसला था। हालांकि, उन्हें अफसोस है कि अब अय्यर को उस फैसले पर पछतावा हो रहा है।
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कहां से शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब अय्यर ने थरूर के नाम खुला पत्र लिखा। यह खुला पत्र इसी हफ्ते की शुरुआत में एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। अय्यर ने कहा कि छह मार्च को एक टेलीविजन चैनल के कार्यक्रम में थरूर ने ईरान के खिलाफ जारी 'गैरकानूनी और पापी युद्ध' पर जो जवाब दिया, उससे वह अंदर तक हिल गए। अय्यर के मुताबिक, इस्राइल यह युद्ध अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ मिलकर लड़ रहा है।
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मणि शंकर अय्यर ने क्या कहा?
अय्यर ने लिखा कि (थरूर के बयान से) वह इतने परेशान हो गए कि उन्हें नींद नहीं आई और रात में तीन बजे उठकर उन्होंने यह खुला पत्र लिखना शुरू किया। अय्यर ने दावा किया कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में थरूर के लिए वोट देकर अपने राजनीतिक करियर को दांव पर लगा दिया था, जबकि उन्हें पता था कि थरूर बुरी तरह हार जाएंगे।
उन्होंने कहा कि अगले दिन उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में लेख लिखकर यह भी कहा था कि विजेता मल्लिकार्जुन खरगे को बड़े दिल से थरूर के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करना चाहिए, जबकि उनके पीछे गांधी परिवार और जी-23 समूह के शेष नेताओं का भी समर्थन था।
अय्यर ने लिखा कि उन्होंने जोर देकर कहा था कि खरगे को थरूर को कांग्रेस में सम्मानजनक स्थान देना चाहिए, ताकि पार्टी उनकी प्रतिभा का पूरा उपयोग कर सके। अय्यर के अनुसार, इसके बाद से गांधी परिवार और खरगे उनसे मिलने से इनकार करते रहे, लेकिन उन्हें लगा कि नैतिक रूप से वह सही थे। अय्यर ने अपने लेख 'शशि थरूर को खुला पत्र: नैतिक भूल और अन्य बातें' में कहा कि अब उन्हें लगता है कि उन्होंने गलत मुद्दे का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पिछली रात थरूर की ओर से 'जिसकी ताकत उसकी बात सही' जैसी सोच का समर्थन करना उन्हें बेहद चौंकाने वाला लगा।
उन्होंने कहा कि थरूर ने कहा था कि वह समझते हैं कि विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका के खिलाफ सख्त रुख लेने से क्यों बचते हैं, क्योंकि भारत को खासकर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित परिणामों का डर है। अय्यर ने यह भी कहा कि अगर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में थरूर विदेश नीति से जुड़े फैसलों को यह कहते हुए सरकार पर छोड़ देते हैं कि सरकार के पास ही सारी जानकारी होती है, तो फिर वह अपने इस बड़े पद पर आखिर कर क्या रहे हैं।
अय्यर ने कहा कि उनकी आंखें तब भी खुल गई थीं, जब थरूर ने सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म वाली महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अस्वीकार किया था। अय्यर ने कहा कि उन्हें यह सुनकर भरोसा नहीं हुआ कि सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़े और आइवी लीग विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाले एक आधुनिक और विद्वान व्यक्ति इस तरह की पुरानी और महिलाओं के साथ भेदभाव करने वाली परंपरा का समर्थन कर सकते हैं, जिसमें महिलाओं को उनके प्राकृतिक शारीरिक कारणों के कारण सजा दी जाती है।
अय्यर ने कहा कि उस समय ही उन्हें संकेत मिल गए थे कि थरूर पूरी तरह 'हम में से एक' नहीं हैं। उन्होंने लिखा कि अब एक ऐसे शासन के प्रति थरूर की सहानुभूति, जिस पर सांप्रदायिक दुर्भावना का आरोप है, उनके लिए आखिरी कारण बन गई है और अब उनके रास्ते अलग हो रहे हैं।
अय्यर के खुले पत्र का थरूर ने क्या जवाब दिया?
अय्यर के इस पत्र का जवाब देते हुए शशि थरूर ने भी एक खुला पत्र लिखा, जिसे गुरुवार को एक समाचार चैनल की वेबसाइट ने प्रकाशित किया। थरूर ने कहा कि असहमति एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान होती है, लेकिन किसी सहयोगी के इरादों या देशभक्ति पर सिर्फ इसलिए सवाल उठाना कि वह विदेश नीति पर अलग सोच रखते हैं, सार्वजनिक बहस को मजबूत नहीं करता।
थरूर ने कहा कि अय्यर को अपने विचार रखने का अधिकार है। लेकिन हाल में उनके विचारों और उनके चरित्र के बार में की गई सार्वजनिक टिप्पणियों का स्पष्ट जवाब देना जरूरी हो गया है। थरूर ने कहा कि उन्होंने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मामलों को राष्ट्र हित के नजरिए से देखा है और हर चर्चा में भारत के हित, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा को केंद्र में रखा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति की वास्तविकताओं को समझना और भारत की अर्थव्यवस्था तथा रणनीतिक स्थिति पर पड़ने वाले असर का आकलन करना कोई नैतिक समर्पण नहीं है, बल्कि जिम्मेदार शासन की निशानी है। उन्होंने कहा कि भारत की कूटनीति हमेशा सिद्धांत और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाकर चलती रही है।
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थरूर ने यह भी कहा कि उनकी विदेश यात्राओं को लेकर अय्यर के आरोप बेहद आपत्तिजनक हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को छोड़कर, जिसमें वह एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और नेता थे, उनकी बाकी सभी विदेश यात्राएं निजी क्षमता में होती हैं। थरूर ने कहा कि इन यात्राओं का अनुरोध, आयोजन या खर्च सरकार नहीं करती। उन्हें जितने अंतरराष्ट्रीय निमंत्रण मिलते हैं, उनमें से कई को वह स्वीकार भी नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि यह कहना कि वह प्रधानमंत्री को खुश करने के लिए विदेश यात्रा करते हैं, पूरी तरह बेबुनियाद आरोप है।
सबरीमाला मुद्दे पर थरूर ने कहा कि उन्हें थोड़ा हैरानी होती है कि पहले अय्यर उन्हें कथित रूप से गलत विचार रखने के लिए आलोचना करते हैं और अब उसी मुद्दे पर पार्टी के आधिकारिक रुख का समर्थन करने के लिए भी उन्हें घेर रहे हैं। थरूर ने कहा कि उस समय उन्होंने अपना पक्ष विस्तार से समझाया भी था, लेकिन लगता है कि अय्यर ने उसे ध्यान से नहीं पढ़ा। थरूर ने यह भी कहा कि वह कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में उनका समर्थन करने के लिए अय्यर के आभारी हैं, क्योंकि वह सिद्धांत के आधार पर लिया गया फैसला था। हालांकि, उन्हें अफसोस है कि अब अय्यर को उस फैसले पर पछतावा हो रहा है।
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