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CRPF: चुनावी ड्यूटी पर सीआरपीएफ जवान बेहाल, खुले में हथियार घर, पानी की किल्लत, कमांडेंट को लेना पड़ा होटल

Jitendra Bhardwaj Jitendra Bhardwaj
Updated Thu, 12 Mar 2026 07:02 PM IST
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सार

असम के जोरहाट में चुनावी ड्यूटी पर भेजी गई सीआरपीएफ की दो कंपनियों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रहीं। पानी, बिजली और हथियार रखने की व्यवस्था तक नहीं है। कमांडेंट को भी सुविधाएं न मिलने पर होटल में रहना पड़ा।

CRPF personnel election duty are distress weapons in open water not available
असम के जोरहाट में चुनावी ड्यूटी में सीआरपीएफ बेहाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की दो कंपनियों के जवान, जिन्हें असम के जोरहाट में चुनावी ड्यूटी के लिए भेजा गया था, बेहाल हो गए हैं। वजह, वहां पर जवानों को मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। पीने और नहाने के पानी की किल्लत है। यहां तक कि हथियार रखने के लिए स्ट्रॉंग रूम 'कोत' जैसी कोई व्यवस्था तक नहीं है। अस्थायी तौर पर बाथरूम का निर्माण, पन्नी की मदद से किया गया है। एडहॉक कमांडेंट को पिछले एक माह से होटल में ठहरना पड़ रहा है। 

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रेलवे वर्कशॉप की जमीन पर ठहराया गया 

सीआरपीएफ के एडहॉक कमांडेंट ने आधी अधूरी व्यवस्थाओं की शिकायत 11 मार्च को महानिरीक्षक पूर्वोत्तर सेक्टर (स्टेट फोर्स कॉर्डिनेटर), महानिरीक्षक जोरहाट, उप महानिरीक्षक (परिचालन) और महानिदेशालय रेंज, खटखटी को दी है। शिकायत की प्रति अमर उजाला डॉट कॉम के पास मौजूद है। सीआरपीएफ की एडहॉक 331 बटालियन की दो कंपनियां 'डी 216', 'ई 216' एवं 'डेट 331' (डिटेचमेंट टुकड़ी, जिसे छोटा हेडक्वार्टर भी कहा जाता है), को मरयानी रेलवे स्टेशन की जमीन पर ठहराया गया है। यहां पर जो हाल बना है, वह रेलवे का वर्कशॉप है। इस हॉल में पंखे तक नहीं लगे हैं। लाइट की उचित सुविधा नहीं है। मोबाइल चार्ज करने की व्यवस्था भी नहीं है। 

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हथियार रखने वाली जगह तक नहीं 

सीआरपीएफ की दोनों कंपनियों के कोत 'हथियार रखने वाली जगह' के लिए कोई भी कमरा मुहैया नहीं कराया गया। इसके चलते हथियारों की सुरक्षा के संबंध में जारी अनुदेशों की पूर्ण अनुपालना संभव नहीं हो रही। पन्नी से बने  बाथरूमों में पानी, दरवाजे व लाइट की सुविधा नहीं है। कुल 20 टॉयलेट बनाए गए हैं, जिनमें 10 इंडियन व 10 वेस्टर्न टॉयलेट हैं। इनमें फ्लश तक उपलब्ध नहीं है। जवानों को पीने का पानी 'जार' के हिसाब से मुहैया करा जा रहा है। प्रति कंपनी 15 जार दिए गए हैं। गर्मी के मौसम में यह संख्या काफी कम है। नहाने के पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है।

कमांडेंट को इसलिए लेना पड़ा होटल 

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, जवानों को रहने के लिए सुरक्षित एवं बुनियादी सुविधाओं से लैस जगह मिलनी चाहिए, लेकिन यहां पर ऐसा कुछ नहीं है। एडहॉक कमांडेंट को जो आवास दिया गया, उसमें न्यूनतम सुविधाएं भी नहीं मिली। कंबल, चद्दर, बाल्टी, मग, बेड और टेबल कुर्सी आदि तक नहीं है। रैंक के अनुरुप एडहॉक कमांडेंट को जो सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए थीं, वे प्रदान नहीं की गई। नतीजा, एडहॉक कमांडेंट को 10 फरवरी से 11 मार्च तक स्वयं के खर्च पर एक होटल में ठहरना पड़ा। 'डेट' के कार्यालय एवं अधिकारियों के दफ्तर के लिए कोई रूम उपलब्ध नहीं कराया गया, जबकि अग्रिम व्यवस्था और लोकल प्रशासन के साथ समन्वय करने की जिम्मेदारी 'डेट' की होती है। 

 

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