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CRPF: सीआरपीएफ की महिला अफसर सहित 8 सहायक कमांडेंट को कारण बताओ नोटिस, 'साहब' के लंच से बनाई थी दूरी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 06 Aug 2026 03:32 PM IST
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crpf issues notice to eights trainee officers for absence from senior lunch
सुरक्षाबल - फोटो : अभिषेक बड़ू
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल (सीआरपीएफ) ने एक महिला अधिकारी सहित आठ सहायक कमांडेंट (प्रशिक्षु) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन कैडर अफसरों पर आरोप है कि इन्होंने बड़े 'साहब' जो कि एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं, के वर्किंग लंच से दूरी बनाई थी। बल मुख्यालय के डीआईजी 'सीआर/विजिलेंस' की तरफ से कैडर अफसरों को तीन दिन में जवाब देने के लिए कहा गया था। हालांकि अभी तक कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं मिला है। 
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नोटिस के बावजूद नहीं दिया जवाब
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, कारण बताओ नोटिस को जारी हुए 30 दिन से ज्यादा समय हो चुका है। न तो अफसरों की ओर से कोई जवाब मिला और न ही उनकी यूनिट का ही कोई जवाब आया। 5 अगस्त को जारी नोटिस में कहा गया है कि जिन अधिकारियों से जवाब मांगा गया था, वे अब बिना किसी देरी के जवाब प्रस्तुत करें। इस बाबत संबंधित यूनिट से कहा गया है कि वे अधिकारी से जवाब मांगें। 
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अफसरों को दी गई चेतावनी
अफसरों को यह चेतावनी दी गई है कि वे 'कारण बताओ नोटिस' का जवाब नहीं देते हैं तो विभाग यह मान लेगा कि उनके पास खुद के बचाव में कहने के लिए कुछ नहीं है। इस स्थिति में कैडर अधिकारियों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है। सभी प्रशिक्षु अधिकारी रांची स्थित सीटीसी में जीओ टेक्नीकल कोर्स करने गए थे। उस दौरान वहां पर सेंट्रल जोन के एसडीजी अमित कुमार आए थे। उनका लंच कार्यक्रम था, लेकिन आठ अधिकारियों ने लंच से दूरी बना ली। यह मामला, बल मुख्यालय तक भी पहुंचा। उसके बाद सभी ट्रेनी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।  
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पदोन्नति का मामला सुप्रीम कोर्ट में
दूसरी तरफ पदोन्नति में पिछड़े केंद्रीय बलों के कैडर अधिकारी, अपने हक के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026 को चुनौती देने वालों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, खासतौर पर सीआरपीएफ के वे 111 कैडर अफसर भी शामिल हैं, जिन्हें वीरता के मोर्चे पर कीर्ति चक्र-शौर्य चक्र, राष्ट्रपति पुलिस पदक व पीएमजी से सम्मानित किया गया है। पदोन्नति की राह में पिछड़े इन कैडर अफसरों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण इन्हें मजबूरन सुप्रीम का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।


सीएपीएफ के कैडर अफसरों ने अपनी याचिका में नए कानून को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। उन्होंने सर्वोच्च अदालत के समक्ष यह मांग रखी है कि सीएपीएफ में उच्च प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति मुख्य रूप से योग्य कैडर अफसरों में से की जानी चाहिए, न कि केवल प्रतिनियुक्ति पर आए आईपीएस के द्वारा उन पदों को भरा जाए।
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