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नियमों की आड़ में नहीं चली मनमानी: पहले अधिकारी ने बाढ़ राहत वाहन का काटा चालान, अब सरकार ने की बड़ी कार्रवाई
Fri, 07 Aug 2026 05:13 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, पथानामथिट्टा
पीटीआई, पथानामथिट्टा
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Fri, 07 Aug 2026 05:13 PM IST
सार
केरल में बाढ़ राहत कार्य से लौट रहे वाहन का चालान काटने के बाद मोटर वाहन विभाग के अधिकारी को सरकार ने निलंबित कर दिया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि नियम लागू करने वाले अधिकारी पर ही कार्रवाई करनी पड़ी? क्या राहत कार्यों में लगे वाहनों के लिए अलग व्यवस्था होती है, या फिर नियमों की आड़ में अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया गया? जानिए पूरा मामला...
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मानवीय संकट में सख्ती पड़ी भारी (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
केरल में एक एनफोर्समेंट अधिकारी ने बाढ़ राहत कार्यों में इस्तेमाल किए गए वाहन पर जुर्माना लगा दिया। इस मामले में एमवीडी ने उस अधिकारी को निलंबित कर दिया है। यह जानकारी एक अधिकारियों ने शुक्रवार को दी।
अधिकारियों ने क्या बताया?
निलंबित अधिकारी की पहचान लाइजू के रूप में हुई है, जो अडूर में मोटर वाहन विभाग (एमवीडी) के प्रवर्तन विंग से संबद्ध थे। अधिकारियों के अनुसार, अधिकारी ने तीन दिन पहले अडूर में बाढ़ राहत कार्य से लौटते समय वाहन को रोका और वैध प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाण पत्र न होने और अतिरिक्त लाइटें लगाने के लिए जुर्माना लगाया।
निलंबित करने से पहले स्पष्टीकरण मांगा
इस घटना के बाद, युवा कांग्रेस के नेताओं ने जुर्माना भरा। इसके बाद में कांग्रेस विधायक अबिन वर्गी ने इस मामले को परिवहन मंत्री सीपी जॉन के समक्ष उठाया। अधिकारियों ने कहा कि लाइजू को निलंबित करने का निर्णय लेने से पहले उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था।
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अरनमुला विधायक वर्गी ने क्या कहा?
हालांकि, एमवीडी अधिकारियों के संगठन ने दावा किया कि वाहन पर अडूर बाईपास पर जुर्माना लगाया गया था जबकि वह किसी भी बाढ़ राहत कार्य में शामिल नहीं था। पत्रकारों से बात करते हुए, अरनमुला विधायक वर्गी ने निलंबन का बचाव करते हुए कहा कि बाढ़ जैसे मानवीय संकटों के दौरान सरकारी कर्मचारियों को शालीनता का परिचय देना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'बाढ़ के दौरान उन्होंने हमारी बहुत मदद की। राज्य के विभिन्न हिस्सों से, विशेष रूप से पथानामथिट्टा और तिरुवनंतपुरम जिलों से, साथ ही कई जीपर्स क्लबों से ऑफ-रोड वाहन आए। उन्होंने भोजन, आवश्यक सामग्री पहुंचाई और उन स्थानों से लोगों को बचाया जहां सामान्य वाहन नहीं पहुंच सकते थे।'
उन्होंने कहा कि राहत कार्यों को पूरा करने के बाद लौट रहे ऐसे वाहनों पर जुर्माना लगाना अस्वीकार्य है। वर्गी ने कहा, 'हम एक बड़ी आपदा का सामना कर रहे हैं, और जब हमने सहायता मांगी तो वे मदद के लिए आगे आए। इन सब के बाद उन्हें दंडित करना पूरी तरह से गलत है।'
ऐसी परिस्थितियों में मर्यादा का पालन करना जरूरी
उन्होंने कहा, 'ऐसी परिस्थितियों में मर्यादा का पालन करना आवश्यक है। बाढ़ के दौरान, सभी से करुणा और जिम्मेदारी से पेश आने की अपेक्षा की जाती है। मैंने इस अनुचित कार्रवाई को मंत्री जी के ध्यान में लाया। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मेरा मानना है कि निलंबन उसी चर्चा के बाद हुआ।'
निलंबन के खिलाफ एमवीडी अधिकारियों के संघ की आपत्ति का जवाब देते हुए, वर्गी ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को आपात स्थितियों के दौरान विवेक का प्रयोग करना चाहिए।
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अधिकारियों ने क्या बताया?
निलंबित अधिकारी की पहचान लाइजू के रूप में हुई है, जो अडूर में मोटर वाहन विभाग (एमवीडी) के प्रवर्तन विंग से संबद्ध थे। अधिकारियों के अनुसार, अधिकारी ने तीन दिन पहले अडूर में बाढ़ राहत कार्य से लौटते समय वाहन को रोका और वैध प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाण पत्र न होने और अतिरिक्त लाइटें लगाने के लिए जुर्माना लगाया।
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निलंबित करने से पहले स्पष्टीकरण मांगा
इस घटना के बाद, युवा कांग्रेस के नेताओं ने जुर्माना भरा। इसके बाद में कांग्रेस विधायक अबिन वर्गी ने इस मामले को परिवहन मंत्री सीपी जॉन के समक्ष उठाया। अधिकारियों ने कहा कि लाइजू को निलंबित करने का निर्णय लेने से पहले उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था।
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अरनमुला विधायक वर्गी ने क्या कहा?
हालांकि, एमवीडी अधिकारियों के संगठन ने दावा किया कि वाहन पर अडूर बाईपास पर जुर्माना लगाया गया था जबकि वह किसी भी बाढ़ राहत कार्य में शामिल नहीं था। पत्रकारों से बात करते हुए, अरनमुला विधायक वर्गी ने निलंबन का बचाव करते हुए कहा कि बाढ़ जैसे मानवीय संकटों के दौरान सरकारी कर्मचारियों को शालीनता का परिचय देना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'बाढ़ के दौरान उन्होंने हमारी बहुत मदद की। राज्य के विभिन्न हिस्सों से, विशेष रूप से पथानामथिट्टा और तिरुवनंतपुरम जिलों से, साथ ही कई जीपर्स क्लबों से ऑफ-रोड वाहन आए। उन्होंने भोजन, आवश्यक सामग्री पहुंचाई और उन स्थानों से लोगों को बचाया जहां सामान्य वाहन नहीं पहुंच सकते थे।'
उन्होंने कहा कि राहत कार्यों को पूरा करने के बाद लौट रहे ऐसे वाहनों पर जुर्माना लगाना अस्वीकार्य है। वर्गी ने कहा, 'हम एक बड़ी आपदा का सामना कर रहे हैं, और जब हमने सहायता मांगी तो वे मदद के लिए आगे आए। इन सब के बाद उन्हें दंडित करना पूरी तरह से गलत है।'
ऐसी परिस्थितियों में मर्यादा का पालन करना जरूरी
उन्होंने कहा, 'ऐसी परिस्थितियों में मर्यादा का पालन करना आवश्यक है। बाढ़ के दौरान, सभी से करुणा और जिम्मेदारी से पेश आने की अपेक्षा की जाती है। मैंने इस अनुचित कार्रवाई को मंत्री जी के ध्यान में लाया। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मेरा मानना है कि निलंबन उसी चर्चा के बाद हुआ।'
निलंबन के खिलाफ एमवीडी अधिकारियों के संघ की आपत्ति का जवाब देते हुए, वर्गी ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को आपात स्थितियों के दौरान विवेक का प्रयोग करना चाहिए।