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क्या मुश्किल में फंसेंगे सीएम विजय?: DMK का आरोप- तमिलनाडु की कैबिनेट बैठकों में शामिल हुए CM के करीबी लोग
Tue, 30 Jun 2026 10:25 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 30 Jun 2026 10:25 PM IST
सार
तमिलनाडु में मुख्य विपक्षी दल डीएमके ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के दो करीबी सहयोगियों पर सरकारी निर्णय प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए पुलिस महानिदेशक से शिकायत की है। पार्टी का दावा है कि दोनों व्यक्तियों ने बिना किसी वैधानिक अधिकार के कैबिनेट और अन्य गोपनीय बैठकों में भाग लिया तथा सरकारी कार्यों को प्रभावित किया।
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तमिलनाडु कैबिनेट बैठक में सीएम विजय
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने मंगलवार को राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक शिकायत दर्ज कराई। डीएमके ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के करीबी व्यक्ति कैबिनेट बैठकों में शामिल हुए, सरकारी नीतियों को प्रभावित किया और अधिकारियों को निर्देश भी दिए।
डीएमके ने कहा कि यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए पुलिस को एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष और व्यापक जांच करनी चाहिए। डीएमके ने दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। डीएमके के संगठन सचिव आर.एस. भारती ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठकों, आधिकारिक समीक्षा बैठकों और अन्य गोपनीय सरकारी विचार-विमर्श में जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी शामिल हुए।
डीएमके ने शिकायत में लगाए क्या आरोप?
शिकायत में कहा गया, "यह देखा और रिपोर्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी बताए जाने वाले तथा आंध्र प्रदेश के निवासी जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी नियमित रूप से सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठकों, आधिकारिक समीक्षा बैठकों और अन्य उच्चस्तरीय सरकारी बैठकों में शामिल होते रहे हैं।" आगे आरोप लगाया गया, "यह भी बताया गया है कि इन दोनों व्यक्तियों को सचिवालय में मुख्यमंत्री के कार्यालय के साथ लगे कार्यालय कक्ष आवंटित किए गए हैं।"
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डीएमके ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि इन करीबी व्यक्तियों ने कार्यपालिका के निर्णय लेने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया, सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिए, सरकारी नीतियों को प्रभावित किया या बिना किसी वैध नियुक्ति अथवा कानूनी अधिकार के वास्तविक कार्यकारी अधिकारों का इस्तेमाल किया।
क्या सीएम विजय ने किया गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन?
आर.एस. भारती ने कहा कि मुख्यमंत्री, राज्य के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर होने के कारण, संविधान के अनुच्छेद 164(3) और तीसरी अनुसूची के तहत पद एवं गोपनीयता की शपथ से बंधे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पर कैबिनेट की कार्यवाही और सरकार के सभी संवेदनशील मामलों की गोपनीयता बनाए रखने की निरंतर कानूनी जिम्मेदारी है। डीएमके नेता ने कहा कि ये आरोप संवैधानिक दायित्वों, वैधानिक जिम्मेदारियों और आपराधिक कानून के संभावित उल्लंघन से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
शिकायत में कहा गया कि जांच का मुख्य विषय यह होना चाहिए कि क्या जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी सरकारी कर्मचारी हैं या कानून के तहत ऐसा कोई पद या अधिकार रखते हैं, जो उन्हें गोपनीय सरकारी बैठकों में शामिल होने या गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच की अनुमति देता हो।
किन आरोपों पर की गई कार्रवाई की मांग?
शिकायत में कहा गया, "अगर उनके पास ऐसा कोई वैध अधिकार नहीं है, तो कैबिनेट बैठकों या गोपनीय समीक्षा बैठकों में उनकी मौजूदगी, जहां कैबिनेट दस्तावेज, गोपनीय रिकॉर्ड, आधिकारिक फाइलें और संवेदनशील नीतिगत विषयों पर चर्चा होती है, प्रथम दृष्टया आधिकारिक सूचनाओं के अनधिकृत संचार, प्राप्ति, कब्जे और उपयोग से जुड़े गंभीर अपराधों की ओर संकेत करती है। इसमें वे दोनों व्यक्ति, मुख्यमंत्री और ऐसे सभी लोग शामिल हो सकते हैं जिन्होंने जानबूझकर उन्हें यह पहुंच उपलब्ध कराई।"
डीएमके ने कहा कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 की धारा 5 के तहत ऐसे व्यक्तियों द्वारा आधिकारिक जानकारी का उपयोग अपराध है, जिन्हें इसकी कानूनी अनुमति नहीं है। साथ ही, जिन लोगों पर गोपनीयता बनाए रखने की कानूनी जिम्मेदारी है, उनके द्वारा ऐसी जानकारी का खुलासा करना भी अपराध है।
डीएमके ने बताया किन कानूनों में दर्ज हो मुकदमा?
पार्टी ने आरोप लगाया कि यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत आपराधिक साजिश, सार्वजनिक पद के दुरुपयोग, उकसावे और जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य संभावित अपराधों से भी जुड़ा हो सकता है।
डीएमके ने मांग की कि संबंधित पुलिस थाना इस मामले में एफआईआर दर्ज करे, निष्पक्ष और व्यापक जांच कराए तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे। शिकायत में कहा गया कि एफआईआर ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923, भारतीय न्याय संहिता, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और अन्य लागू कानूनों के तहत दर्ज की जानी चाहिए। इस मामले पर राज्य सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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डीएमके ने कहा कि यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए पुलिस को एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष और व्यापक जांच करनी चाहिए। डीएमके ने दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। डीएमके के संगठन सचिव आर.एस. भारती ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठकों, आधिकारिक समीक्षा बैठकों और अन्य गोपनीय सरकारी विचार-विमर्श में जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी शामिल हुए।
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डीएमके ने शिकायत में लगाए क्या आरोप?
शिकायत में कहा गया, "यह देखा और रिपोर्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी बताए जाने वाले तथा आंध्र प्रदेश के निवासी जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी नियमित रूप से सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठकों, आधिकारिक समीक्षा बैठकों और अन्य उच्चस्तरीय सरकारी बैठकों में शामिल होते रहे हैं।" आगे आरोप लगाया गया, "यह भी बताया गया है कि इन दोनों व्यक्तियों को सचिवालय में मुख्यमंत्री के कार्यालय के साथ लगे कार्यालय कक्ष आवंटित किए गए हैं।"
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डीएमके ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि इन करीबी व्यक्तियों ने कार्यपालिका के निर्णय लेने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया, सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिए, सरकारी नीतियों को प्रभावित किया या बिना किसी वैध नियुक्ति अथवा कानूनी अधिकार के वास्तविक कार्यकारी अधिकारों का इस्तेमाल किया।
क्या सीएम विजय ने किया गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन?
आर.एस. भारती ने कहा कि मुख्यमंत्री, राज्य के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर होने के कारण, संविधान के अनुच्छेद 164(3) और तीसरी अनुसूची के तहत पद एवं गोपनीयता की शपथ से बंधे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पर कैबिनेट की कार्यवाही और सरकार के सभी संवेदनशील मामलों की गोपनीयता बनाए रखने की निरंतर कानूनी जिम्मेदारी है। डीएमके नेता ने कहा कि ये आरोप संवैधानिक दायित्वों, वैधानिक जिम्मेदारियों और आपराधिक कानून के संभावित उल्लंघन से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
शिकायत में कहा गया कि जांच का मुख्य विषय यह होना चाहिए कि क्या जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी सरकारी कर्मचारी हैं या कानून के तहत ऐसा कोई पद या अधिकार रखते हैं, जो उन्हें गोपनीय सरकारी बैठकों में शामिल होने या गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच की अनुमति देता हो।
किन आरोपों पर की गई कार्रवाई की मांग?
शिकायत में कहा गया, "अगर उनके पास ऐसा कोई वैध अधिकार नहीं है, तो कैबिनेट बैठकों या गोपनीय समीक्षा बैठकों में उनकी मौजूदगी, जहां कैबिनेट दस्तावेज, गोपनीय रिकॉर्ड, आधिकारिक फाइलें और संवेदनशील नीतिगत विषयों पर चर्चा होती है, प्रथम दृष्टया आधिकारिक सूचनाओं के अनधिकृत संचार, प्राप्ति, कब्जे और उपयोग से जुड़े गंभीर अपराधों की ओर संकेत करती है। इसमें वे दोनों व्यक्ति, मुख्यमंत्री और ऐसे सभी लोग शामिल हो सकते हैं जिन्होंने जानबूझकर उन्हें यह पहुंच उपलब्ध कराई।"
डीएमके ने कहा कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 की धारा 5 के तहत ऐसे व्यक्तियों द्वारा आधिकारिक जानकारी का उपयोग अपराध है, जिन्हें इसकी कानूनी अनुमति नहीं है। साथ ही, जिन लोगों पर गोपनीयता बनाए रखने की कानूनी जिम्मेदारी है, उनके द्वारा ऐसी जानकारी का खुलासा करना भी अपराध है।
डीएमके ने बताया किन कानूनों में दर्ज हो मुकदमा?
पार्टी ने आरोप लगाया कि यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत आपराधिक साजिश, सार्वजनिक पद के दुरुपयोग, उकसावे और जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य संभावित अपराधों से भी जुड़ा हो सकता है।
डीएमके ने मांग की कि संबंधित पुलिस थाना इस मामले में एफआईआर दर्ज करे, निष्पक्ष और व्यापक जांच कराए तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे। शिकायत में कहा गया कि एफआईआर ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923, भारतीय न्याय संहिता, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और अन्य लागू कानूनों के तहत दर्ज की जानी चाहिए। इस मामले पर राज्य सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।