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ED की कार्रवाई: TMC के बैंक खातों में जमा ₹440 करोड़ फ्रीज, बंगाल पुलिस के बाद केंद्रीय एजेंसी का एक्शन क्यों?

Wed, 08 Jul 2026 03:28 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता। Published by: राकेश कुमार Updated Wed, 08 Jul 2026 03:28 PM IST
सार

क्या टीएमसी के खातों में जमा 440 करोड़ रुपये वाकई भ्रष्टाचार की कमाई है या कोई राजनीतिक साजिश है? क्या कलकत्ता हाईकोर्ट से टीएमसी को राहत मिलेगी या ईडी की इस कार्रवाई से कोई नया बड़ा राज खुलेगा? इस जांच ने बंगाल की सियासत में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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ed freezes tmc bank accounts kolkata Money laundering investigation
ममता बनर्जी, पूर्व मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े संदिग्ध फंड मामले में मनी लॉन्ड्रिंग (पीएमएलए) के तहत अपनी जांच तेज कर दी है। केंद्रीय एजेंसी ने कोलकाता में टीएमसी के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें लगभग 440 करोड़ रुपये जमा हैं। 
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क्यों फ्रीज हुए पार्टी के खाते?
यह पूरी कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा तीन मुख्य बैंक खातों पर लगाए गए 'डेबिट फ्रीज' के बाद हुई है। पुलिस ने बागी विधायकों के एक गुट की शिकायत के बाद इन खातों से होने वाले सभी लेन-देन और निकासी पर रोक लगा दी थी। इस गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। अब ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में लेकर जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
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जांच के तीन मुख्य बिंदु
हवाई कंपनियों पर शक:
ईडी की शुरुआती जांच के मुताबिक, 150 करोड़ रुपये से ज्यादा का संदिग्ध फंड एविएशन और ट्रैवल कंपनियों के जरिए भेजा गया था।

कोलकाता में ताबड़तोड़ छापेमारी: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के साथ ईडी की टीमों ने कोलकाता में कई ठिकानों पर छापे मारे। यह छापेमारी एक प्राइवेट चार्टर फर्म 'केयरवेल एविएशन', उसके निदेशकों और एक कथित इलेक्टोरल ट्रस्ट से जुड़े परिसरों पर की गई।
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संदेह का घेरा: जांच एजेंसी इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या इन खातों का इस्तेमाल भ्रष्टाचार, जबरन वसूली या स्थानीय तस्करी से कमाए गए पैसों को ठिकाने लगाने के लिए किया गया था।

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कोर्ट पहुंची ममता बनर्जी, अंदरूनी कलह भी उजागर

इस वित्तीय प्रतिबंध के खिलाफ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी के मुख्य गुट ने कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है। पार्टी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर इस रोक को चुनौती दी है। टीएमसी का तर्क है कि फंड ब्लॉक होने से उनकी राजनीतिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं। अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है। दूसरी तरफ, यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हालिया चुनावी झटकों के बाद पार्टी की संपत्तियों और फंड पर नियंत्रण को लेकर टीएमसी के भीतर ही एक गंभीर अंदरूनी पावर स्ट्रगल चल रहा है।

विवाद की जड़ क्या? 
इस पूरे विवाद की जड़ें हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव और उसमें तृणमूल कांग्रेस को लगे बड़े झटकों से जुड़ी हैं। चुनावी हार के तुरंत बाद पार्टी के भीतर फंड और संपत्तियों पर नियंत्रण को लेकर एक अंदरूनी जंग छिड़ गई, जिसने तब बड़ा रूप ले लिया जब विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी विधायकों के एक गुट ने स्थानीय पुलिस में पार्टी के ही वित्तीय प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर शिकायतें दर्ज करा दीं।

इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले टीएमसी के तीन मुख्य बैंक खातों पर 'डेबिट फ्रीज' लगाकर लेन-देन रोका, जिसके बाद अब प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने एंट्री मारते हुए जांच को मनी लॉन्ड्रिंग (पीएमएलए) के तहत अपने हाथ में ले लिया और कोलकाता में मौजूद करीब ₹440 करोड़ के चुनावी खजाने को पूरी तरह सीज कर दिया।
 
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