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सावधान: कहीं आपके नाम का सिम तो कंबोडिया नहीं पहुंच गया? भारत में ठगी करने वाले सिंडिकेट का पर्दाफाश
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 08 Jun 2026 09:27 PM IST
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सार
प्रवर्तन निदेशालय ने कंबोडिया से चल रहे एक बड़े साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। भारत के 5,300 फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर लोगों से सैकड़ों करोड़ रुपये ठगे गए। इस मामले में ईडी ने राजस्थान और पंजाब में छापेमारी कर 30 बैंक खातों को फ्रीज किया है।
साइबर ठगी का पर्दाफाश
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
देश में सिम कार्ड के जरिए होने वाली साइबर ठगी पर एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जांच में पता चला है कि भारत से खरीदे गए करीब 5,300 सिम कार्ड का इस्तेमाल कंबोडिया से हो रहा था। वहां बैठकर एक मलयेशियाई नागरिक का गैंग भारतीयों से करोड़ों रुपये ठग रहा था। इस गिरोह ने देश के मासूम लोगों को अपना शिकार बनाया और उनसे सैकड़ों करोड़ रुपये लूट लिए।
राजस्थान और पंजाब में ताबड़तोड़ छापेमारी
इस मामले में ईडी ने देश के कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की है। जांच एजेंसी ने राजस्थान के तीन शहरों अजमेर, नागौर और जोधपुर में रेड मारी। इसके अलावा पंजाब के लुधियाना में भी छापेमारी की गई। पांच जून को कुल ठिकानों पर यह कार्रवाई हुई। इस दौरान ईडी को ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े 30 घरेलू बैंक खातों का पता चला है। इन खातों में ठगी का पैसा जमा किया जा रहा था। ईडी ने यह कार्रवाई जोधपुर पुलिस की साइबर विंग की ओर से दर्ज एफआईआर के बाद शुरू की है।
सीधे-साधे लोगों को ऐसे बनाते थे निशाना
यह पूरा खेल टेलीकॉम कंपनियों के सिम बेचने वाले दुकानदारों की मदद से चल रहा था। इन दुकानदारों के पास एयरटेल, जियो और वीआई (वोडाफोन इंडिया) जैसी कंपनियों की सिम एक्टिवेट करने की आईडी थी। ये लोग कम पढ़े-लिखे और सीधे-साधे लोगों को अपना निशाना बनाते थे। सिम पोर्ट कराने या नया सिम देने के बहाने ग्राहकों से अंगूठे का निशान या दस्तावेज लिए जाते थे। इसके बाद ग्राहकों को बिना बताए उनके नाम पर एक्स्ट्रा सिम चालू कर दिए जाते थे।
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कंबोडिया भेजे जाते थे एक्टिवेटेड सिम कार्ड
ये फर्जी सिम कार्ड राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ और संदीप भट्ट नाम के आरोपियों तक पहुंचाए जाते थे। इस काम में प्रकाश भील, रामावतार राठी, हरीश मलाकर और हेमंत पंवार जैसे वेंडर शामिल थे। ये लोग कमीशन के चक्कर में इन सिम कार्ड्स को मलयेशियाई नागरिक तक पहुंचा देते थे। वह इन सिम कार्ड्स को कंबोडिया ले गया और वहां से पूरा रैकेट चलाने लगा।
2.3 लाख सिम कार्ड्स की जांच में सच आया सामने
ईडी ने इस मामले में करीब 2.3 लाख सिम कार्ड्स के डाटा की जांच की। जांच में पता चला कि इनमें से लगभग 36,000 सिम कार्ड कंबोडिया में एक्टिव थे। सबसे बड़ी बात यह है कि करीब 5,300 सिम कार्ड्स से भारत में सीधे साइबर फ्रॉड किया जा रहा था। ठग कंबोडिया से इन नंबरों के जरिए लोगों को व्हाट्सएप कॉल करते थे। इसके बाद वे डिजिटल अरेस्ट जैसी फर्जी धमकियां देकर लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठ लेते थे।
राजस्थान और पंजाब में ताबड़तोड़ छापेमारी
इस मामले में ईडी ने देश के कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की है। जांच एजेंसी ने राजस्थान के तीन शहरों अजमेर, नागौर और जोधपुर में रेड मारी। इसके अलावा पंजाब के लुधियाना में भी छापेमारी की गई। पांच जून को कुल ठिकानों पर यह कार्रवाई हुई। इस दौरान ईडी को ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े 30 घरेलू बैंक खातों का पता चला है। इन खातों में ठगी का पैसा जमा किया जा रहा था। ईडी ने यह कार्रवाई जोधपुर पुलिस की साइबर विंग की ओर से दर्ज एफआईआर के बाद शुरू की है।
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सीधे-साधे लोगों को ऐसे बनाते थे निशाना
यह पूरा खेल टेलीकॉम कंपनियों के सिम बेचने वाले दुकानदारों की मदद से चल रहा था। इन दुकानदारों के पास एयरटेल, जियो और वीआई (वोडाफोन इंडिया) जैसी कंपनियों की सिम एक्टिवेट करने की आईडी थी। ये लोग कम पढ़े-लिखे और सीधे-साधे लोगों को अपना निशाना बनाते थे। सिम पोर्ट कराने या नया सिम देने के बहाने ग्राहकों से अंगूठे का निशान या दस्तावेज लिए जाते थे। इसके बाद ग्राहकों को बिना बताए उनके नाम पर एक्स्ट्रा सिम चालू कर दिए जाते थे।
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कंबोडिया भेजे जाते थे एक्टिवेटेड सिम कार्ड
ये फर्जी सिम कार्ड राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ और संदीप भट्ट नाम के आरोपियों तक पहुंचाए जाते थे। इस काम में प्रकाश भील, रामावतार राठी, हरीश मलाकर और हेमंत पंवार जैसे वेंडर शामिल थे। ये लोग कमीशन के चक्कर में इन सिम कार्ड्स को मलयेशियाई नागरिक तक पहुंचा देते थे। वह इन सिम कार्ड्स को कंबोडिया ले गया और वहां से पूरा रैकेट चलाने लगा।
2.3 लाख सिम कार्ड्स की जांच में सच आया सामने
ईडी ने इस मामले में करीब 2.3 लाख सिम कार्ड्स के डाटा की जांच की। जांच में पता चला कि इनमें से लगभग 36,000 सिम कार्ड कंबोडिया में एक्टिव थे। सबसे बड़ी बात यह है कि करीब 5,300 सिम कार्ड्स से भारत में सीधे साइबर फ्रॉड किया जा रहा था। ठग कंबोडिया से इन नंबरों के जरिए लोगों को व्हाट्सएप कॉल करते थे। इसके बाद वे डिजिटल अरेस्ट जैसी फर्जी धमकियां देकर लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठ लेते थे।