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ED: सपा के पूर्व  MLA दीप नारायण सिंह के 11 ठिकानों पर छापेमारी, अवैध धन छिपाने के लिए बनाईं शेल कंपनियां

Thu, 09 Jul 2026 08:08 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 09 Jul 2026 08:08 PM IST
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ED Raids Former SP MLA Deep Narayan Singh Yadav's Premises in Money Laundering Probe
पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव - फोटो : एक्स
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), के इलाहाबाद सब-जोनल ऑफिस ने सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। पूर्व विधायक ने अपराध से अर्जित धन को छिपाने के लिए 'शेल' कंपनियों' का नेटवर्क बनाया था। ईडी के अनुसार, यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत झांसी के गरौठा निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और अन्य के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई। यह छापेमारी झांसी और लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के 11 अन्य ठिकानों पर की गई है। 
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ईडी ने उत्तर प्रदेश सरकार के विजिलेंस एस्टेब्लिशमेंट द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि दीप नारायण सिंह यादव ने जांच की अवधि के दौरान अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक, लगभग 23.02 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति अर्जित की थी। जांच में यह भी पता चला है कि दीप नारायण सिंह यादव के खिलाफ झांसी और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। 
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इन मामलों में आईपीसी, 1860 के तहत डकैती, हत्या का प्रयास, जबरन वसूली, गैर-इरादतन हत्या का प्रयास, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। इनमें से कई अपराध पीएमएलए, 2002 के तहत 'शेड्यूल्ड ऑफेंस' (अनुसूचित अपराध) की श्रेणी में आते हैं। 
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एफआईआर और चार्जशीट से पता चला है कि दीप नारायण सिंह यादव ने कथित तौर पर उपरोक्त आपराधिक गतिविधियों और अपने राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग करके अपराध से भारी मात्रा में धन अर्जित किया। उन्होंने अपराध से अर्जित धन को छिपाने और उसे वैध संपत्ति के रूप में दिखाने के लिए कंपनियों का एक नेटवर्क बनाया, जिसमें 'शेल कंपनियां' (फर्जी कंपनियां) भी शामिल थीं। पूर्व विधायक ने अपने, अपने परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों द्वारा नियंत्रित विभिन्न व्यावसायिक संस्थाओं और निवेशों के माध्यम से इस धन को वैध संपत्ति के तौर पर पेश किया। 

ऐसी भी जानकारी मिली है कि अपराध से अर्जित धन का इस्तेमाल करके सहयोगियों और दूर के परिवार के सदस्यों के नाम पर कई चल और अचल संपत्तियां खरीदी गईं और उन्हें वैध संपत्ति के रूप में दिखाया गया। तलाशी अभियान के दौरान, ईडी को कई ऐसे रिकॉर्ड और दस्तावेज़ मिले, जिनसे गड़बड़ी का पता चलता है। इनमें कंपनियों के बीच लेन-देन, तीसरे पक्ष के साथ समझौते, संदिग्ध लेन-देन दिखाने वाले वित्तीय रिकॉर्ड और अलग-अलग बिजनेस एंटिटी, परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर मौजूद लग्जरी एसेट्स से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। 


ईडी के मुताबिक, जांच में कुछ ऐसी कंपनियां भी मिली हैं जो असल में कोई बिजनेस नहीं कर रही थीं, बल्कि सिर्फ कागजों पर ही मौजूद थीं। संदिग्ध बेनामी अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और अपराध से हुई कमाई की लेयरिंग (पैसों को कई खातों में घुमाकर छिपाने) को दिखाने वाले रिकॉर्ड भी बरामद और जब्त किए गए हैं।

 
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