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'हिंद महासागर हमारा आंगन, सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी': राजनाथ सिंह बोले- बिना एलान के युद्ध संभव, सेना रहे तैयार
Fri, 10 Jul 2026 10:21 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 10 Jul 2026 10:21 PM IST
सार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में नौसेना कर्मियों को संबोधित करते हुए भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता का प्राथमिक गारंटर बताया। स्वदेशी युद्धपोत 'महेंद्रगिरी' की कमीशनिंग से पहले उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध बिना घोषणा के और नए रूपों में हो सकते हैं, जिसके लिए नौसेना को अत्याधुनिक तकनीक से लैस और सतर्क रहना होगा।
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राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कर दिया है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने वाला सबसे प्रमुख देश है। उन्होंने वैश्विक सुरक्षा के बदलते और जटिल हालातों के बीच देश के समुद्री हितों की रक्षा करने के लिए भारतीय नौसेना की जमकर तारीफ की है। रक्षामंत्री बुधवार, 10 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में नौसेना कर्मियों को संबोधित कर रहे थे। मौका था भारतीय नौसेना में छठे स्वदेशी प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरी' के कमीशनिंग की पूर्व संध्या पर आयोजित विशेष 'बाराखाना' कार्यक्रम का, जहां उन्होंने सैनिकों का हौसला बढ़ाया।
आर्थिक तरक्की के लिए समुद्री सुरक्षा बेहद जरूरी: राजनाथ सिंह
रक्षामंत्री ने कहा कि भारत का 90 प्रतिशत से ज्यादा व्यापार समुद्री रास्तों से ही होता है। इसके अलावा देश की ऊर्जा सुरक्षा, विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और द्वीपीय क्षेत्र भी पूरी तरह समुद्र से जुड़े हैं। यही वजह है कि देश के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय हितों के लिए समुद्री सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। राजनाथ सिंह ने आगाह किया कि बढ़ते भू-राजनीतिक कॉम्पिटिशन और इस क्षेत्र से बाहर की ताकतों की मौजूदगी ने समुद्री सतर्कता को और बढ़ा दिया है। ऐसे में हमारी नौसेना सीमाओं की रक्षा के साथ महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित रख रही है।
यह भी पढ़ें: DRDO को बड़ी कामयाबी: पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण, स्वदेशी रक्षा तकनीक में अहम उपलब्धि हासिल
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हमारा आंगन है हिंद महासागर, सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी-राजनाथ सिंह
भारत को इस क्षेत्र का सबसे बड़ा और जिम्मेदार देश बताते हुए रक्षा मंत्री ने सुरक्षित समुद्री माहौल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह पूरा क्षेत्र हमारा आंगन है और इसकी सुरक्षा करना हमारी ही जिम्मेदारी है।
राजनाथ सिंह ने स्वदेशी युद्धपोत 'महेंद्रगिरि' का उदाहरण देते हुए कहा कि यह देश की आत्मनिर्भर होती रक्षा क्षमताओं का एक शानदार प्रतीक है। रक्षा मंत्री ने सैनिकों से अपनी स्किल्स को लगातार अपग्रेड करने और अत्याधुनिक तकनीकों में महारत हासिल करने का आह्वान किया ताकि आधुनिक युद्ध के हर बदलते स्वरूप का सामना किया जा सके।
कल का दुश्मन अलग होगा, बिना एलान के भी छिड़ सकता है युद्ध: सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भविष्य की चुनौतियों पर बात करते हुए कहा कि आने वाले समय में संघर्ष नए और अप्रत्याशित रूप में सामने आ सकते हैं। अब ऐसे भी संघर्ष देखने को मिल रहे हैं जो बिना किसी औपचारिक युद्ध की घोषणा के लड़े जाते हैं। उन्होंने सैनिकों को सचेत किया कि कल का शत्रु अतीत के शत्रु जैसा बिल्कुल नहीं होगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार सैनिकों को दुनिया के सबसे बेहतरीन हथियार, टेक्नोलॉजी और संसाधन देने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि केवल हथियार ही जंग नहीं जिताते, बल्कि उन्हें चलाने वाले जांबाज लोग ही जीत तय करते हैं। इस खास मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और पूर्वी नौसेना कमान के वाइस एडमिरल संजय भल्ला सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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आर्थिक तरक्की के लिए समुद्री सुरक्षा बेहद जरूरी: राजनाथ सिंह
रक्षामंत्री ने कहा कि भारत का 90 प्रतिशत से ज्यादा व्यापार समुद्री रास्तों से ही होता है। इसके अलावा देश की ऊर्जा सुरक्षा, विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और द्वीपीय क्षेत्र भी पूरी तरह समुद्र से जुड़े हैं। यही वजह है कि देश के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय हितों के लिए समुद्री सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। राजनाथ सिंह ने आगाह किया कि बढ़ते भू-राजनीतिक कॉम्पिटिशन और इस क्षेत्र से बाहर की ताकतों की मौजूदगी ने समुद्री सतर्कता को और बढ़ा दिया है। ऐसे में हमारी नौसेना सीमाओं की रक्षा के साथ महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित रख रही है।
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हमारा आंगन है हिंद महासागर, सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी-राजनाथ सिंह
भारत को इस क्षेत्र का सबसे बड़ा और जिम्मेदार देश बताते हुए रक्षा मंत्री ने सुरक्षित समुद्री माहौल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह पूरा क्षेत्र हमारा आंगन है और इसकी सुरक्षा करना हमारी ही जिम्मेदारी है।
राजनाथ सिंह ने स्वदेशी युद्धपोत 'महेंद्रगिरि' का उदाहरण देते हुए कहा कि यह देश की आत्मनिर्भर होती रक्षा क्षमताओं का एक शानदार प्रतीक है। रक्षा मंत्री ने सैनिकों से अपनी स्किल्स को लगातार अपग्रेड करने और अत्याधुनिक तकनीकों में महारत हासिल करने का आह्वान किया ताकि आधुनिक युद्ध के हर बदलते स्वरूप का सामना किया जा सके।
कल का दुश्मन अलग होगा, बिना एलान के भी छिड़ सकता है युद्ध: सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भविष्य की चुनौतियों पर बात करते हुए कहा कि आने वाले समय में संघर्ष नए और अप्रत्याशित रूप में सामने आ सकते हैं। अब ऐसे भी संघर्ष देखने को मिल रहे हैं जो बिना किसी औपचारिक युद्ध की घोषणा के लड़े जाते हैं। उन्होंने सैनिकों को सचेत किया कि कल का शत्रु अतीत के शत्रु जैसा बिल्कुल नहीं होगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार सैनिकों को दुनिया के सबसे बेहतरीन हथियार, टेक्नोलॉजी और संसाधन देने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि केवल हथियार ही जंग नहीं जिताते, बल्कि उन्हें चलाने वाले जांबाज लोग ही जीत तय करते हैं। इस खास मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और पूर्वी नौसेना कमान के वाइस एडमिरल संजय भल्ला सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।