Exclusive: गोगामेड़ी हत्याकांड का अतीक, अशरफ और मूसेवाला मर्डर से कनेक्शन, हत्यारों ने अपनाया एक जैसा ही तरीका
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
राजस्थान की राजधानी जयपुर में हुए सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्याकांड में अब एक नया 'एंगल' भी सामने आ रहा है। दरअसल जिस तर्ज़ पर गोगामेड़ी की हत्या हुई है, ठीक उसी तरीके से उत्तर प्रदेश के माफिया अतीक अहमद और अशरफ की भी हत्या हुई थी। यही नहीं पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला का मर्डर भी ठीक उसी तरह किया गया, जिस तरह अतीक अशरफ और गोगामेडी का मर्डर हुआ। इस हत्याकांड की तहकीकात कर रही जांच टीम को जो सबूत मिले हैं, उसमें कई तथ्य ऐसे मिले हैं, जो न सिर्फ 'कॉमन' हैं बल्कि उनका आपस में मजबूत कनेक्शन भी जुड़ रहा है। इसमें तुर्किये की भारत में प्रतिबंधित जिगाना पिस्टल से लेकर नेपाल का कनेक्शन सामने आया है। इसके अलावा हत्यारों का एक दूसरे से वाकिफ न होना भी एक 'मॉडस ऑपरेंडी' जैसी दिख रही है। सभी हत्याकांड में लॉरेंस बिश्नोई गैंग कनेक्शन ही सामने आया है। इसलिए मामले में जांच एजेंसियां सभी कड़ियों को आपस में जोड़कर देख रही हैं।
गोगामेड़ी हत्याकांड की जांच कर रही एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पूरे मामले में लॉरेंस बिश्नोई और वीरेंद्र चारण गैंग के आपस में मिले होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। जानकारी के मुताबिक गोगामेड़ी हत्याकांड में आरोपित नितिन फौजी और रोहित राठौर ने देश में प्रतिबंधित तुर्किए की जिगाना पिस्टल से ही ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। दरसल जिस जिगाना पिस्टल से दोनों हत्यारोपितों ने गोलियां बरसाईं, वह हाल के दिनों में हुए कई प्रमुख हत्याओं में इस्तेमाल हुई है। यह प्रतिबंध पिस्टल गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गैंग के पास सबसे ज्यादा हैं। बिश्नोई गैंग हत्याओं में इसी पिस्तौल का इस्तेमाल करता है और उसकी आपूर्ति भी करता है। गोगामेड़ी हत्याकांड में वीरेंद्र चारण के माध्यम से लॉरेंस बिश्नोई का सीधा नाम जुड़ रहा है। इस मामले में अब कई और कड़ियां जुड़ती जा रही हैं।
पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या में भी इसी प्रतिबंधित ज़िगाना पिस्टल का इस्तेमाल किया गया था। पंजाब पुलिस के रिटायर्ड ऑफिसर डीपी संधू कहते हैं कि गोगामेडी हत्याकांड की कड़ियों को अगर पुरानी हाई प्रोफाइल हत्याओं के साथ जोड़कर देखा जाए तो इनका आपस में एक बड़ा कनेक्शन दिखता है। वह कहते हैं कि गोगामेड़ी की हत्या में भी लॉरेंस बिश्नोई का नाम और जिगाना पिस्टल सामने आई है। इसके अलावा जिस तरीके से दोनों हत्यारोपित नितिन फौजी और रोहित राठौर की आपस में कोई जान पहचान नहीं थी, वह भी एक कॉमन और ट्रेंड मोडस ऑपरेंडी की ओर इशारा करती है।
रिटायर्ड अधिकारी संधू कहते हैं कि कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के माफिया अतीक अहमद और अशरफ हत्याकांड में भी यही पैटर्न अपनाया गया था। इसमें भी हत्यारों का आपस में कोई भी कनेक्शन नहीं था। लेकिन हत्या से चंद घंटे पहले हत्यारे आपस में मिलते हैं और फिर वारदात को अंजाम देते हैं। ठीक इसी तरह गोगामेडी हत्याकांड में भी दोनों हत्यारे एक दूसरे को नहीं जानते थे। वारदात से कुछ घंटे पहले इन लोगों को एक टास्क देकर अलग-अलग जगह से भेजा जाता है। दोनों हत्याओं में ज़िगाना पिस्टल का ही इस्तेमाल हुआ है।
वरिष्ठ पत्रकार और अपराध को करीब से रिपोर्ट करने वाले मनीष मिश्रा कहते हैं कि इस पूरे हत्याकांड में नेपाल का कनेक्शन भी बहुत महत्वपूर्ण है। बिश्नोई गैंग का वीरेंद्र चारण न सिर्फ बड़ा हथियार सप्लायर है, बल्कि राजस्थान के लिए उसका दाहिना हाथ भी है। मनीष कहते हैं कि अगर कुछ समय पहले की प्रमुख हत्याओं का तार आपस में जोड़ा जाए, तो गोगामेड़ी की हत्या की कड़ियां एक दूसरे में जुड़ती हुई नजर आएंगी। वह कहते हैं कि सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से लेकर गोगामेडी और अतीक अहमद, अशरफ के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुए बड़े गैंगवार में न सिर्फ जिगाना पिस्टल कॉमन रही है। बल्कि नेपाल समेत वहां बैठे हत्याओं की सुपारी लेने वाले कुख्यात गैंगस्टर भी सामने आए हैं।
मनीष मिश्रा कहते हैं कि गोगामेड़ी की हत्या में शामिल वीरेंद्र चारण भी नेपाल में बैठकर ही अपने आकाओं के आदेश पर हत्याकांड की सुपारियां ले रहा है। चाहे अतीक अशरफ हत्याकांड हो या मुख्तार अंसारी के शूटर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की हत्या का मामला हो। सभी हत्याकांड में नेपाल का ही एक बड़ा कनेक्शन सामने आ रहा है। वह कहते हैं कि निश्चित तौर पर यह एक जांच का विषय होना चाहिए कि क्या गोगामेड़ी की हत्या का बड़ा कनेक्शन हाल में हुई प्रमुख हाई प्रोफाइल हत्याकांड से जुड़ता है या नहीं।
रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी डीपी चंद्रा कहते हैं कि दरअसल बीते कुछ समय में बड़ी हत्याओं में ज़िगाना पिस्टल का रोल रहा है। इसके बाद वह मॉडस ऑपरेंडी भी कॉमन है, जिस पैटर्न पर हत्याएं की गईं। चंद्रा का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान समेत दिल्ली के गैंगस्टर को लॉरेंस बिश्नोई गैंग और कुछ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गैंग के मार्फत जिगाना पिस्टल की सप्लाई होती है। यह पिस्टल तुर्किए से चलकर पाकिस्तान के रास्ते भारत पहुंचाई जाती है।
इसमें अभी तक सबसे बड़ा बॉर्डर पाकिस्तान माना जाता था, जहां से इसकी आपूर्ति पंजाब के गैंगस्टर को होती थी। यही वजह है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग का इस पर सबसे बड़ा कब्जा रहा है। फिर बारी आती है हत्या करने के तरीकों की। रिटायर्ड आईपीएस चंद्रा कहते हैं कि बीते कुछ समय में अलग-अलग जगह से हत्यारों को बुलाकर एक बड़ा टास्क दिया जा रहा है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण जिक्र नेपाल का आता है। क्योंकि सभी हत्याकांड में नेपाल का नाम एक 'कॉमन कंट्री' के तौर पर सामने आ रहा है।
उनका मानना है कि गोगामेड़ी हत्याकांड में जिगाना, नेपाल और एक दूसरे हत्यारों को न जानने वाली मॉडस ऑपरेंडी समेत एक ही कॉन्ट्रेक्ट किलिंग की सुपारी की तह तक जरूर जाना चाहिए। क्योंकि यह एक ऐसी स्ट्रेटजी है, जो ज्यादातर हत्याकांड में इस्तेमाल की गई है। इसलिए हर पहलू से जांच होना जरूरी है। हालांकि जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बहुत हद तक गोगामेड़ी हत्याकांड में पकड़े गए हत्यारोपितों ने कई खुलासे किए हैं। इसलिए हत्या के पीछे की प्रमुख वजह का कारण तो बहुत हद तक सामने आने लगा है। लेकिन अभी भी पूछताछ और जांच पड़ताल जारी है। जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों की मानें तो वह पकड़े गए हत्यारोपितों से कई और कनेक्शन समेत उनके नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जा रही है, जिससे अभी कई बड़े राज खुल सकते हैं।