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लौटते घुसपैठियों का खुलासा: कोलकाता में अब भी लाखों बांग्लादेशी, भारत-बंगाल सीमा पर तमाम परिवार इंतजार में

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 07 Dec 2025 08:00 AM IST
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सार

देशभर में चल रहे एसआईआर अभियान का असर पश्चिम बंगाल में साफ दिख रहा है। उत्तर 24 परगना के हकीमपुर सीमा पॉइंट पर रोज बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशी लौट रहे हैं। अब तक करीब 15,000 लोगों को वापस भेजा जा चुका है। सीमा पर बैठी महिला-पुरुषों ने खुले तौर पर दावा किया कि कोलकाता और आसपास के जिलों में अभी भी लाखों अवैध घुसपैठिए फर्जी कागजों पर सरकारी लाभ ले रहे हैं।

Fear of the SIR campaign Crowd of illegal immigrants at the Bengal border 15,000 Bangladeshis return
हकीमपुर गांव में बांग्लादेश वापस जाने के लिए पहुंचे लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पश्चिम बंगाल सहित देश के 12 राज्यों में एसआईआर का काम जारी है और बढ़ाई गई समय सीमा भी जल्द खत्म होने वाली है। एसआईआर अभियान शुरू होने के बाद देशभर के कई इलाकों में लंबे समय से रह रहे अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों में खौफ बढ़ा है। छिपकर बांग्लादेश लौटने के लिए बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले  के हकीमपुर सीमा पर लोगों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। अब तक करीब 15,000 लोग वापस भेजे जा चुके हैं। कैसे हैं हालात, बता रहे हैं हकीमपुर चेक पोस्ट से एन.अर्जुन...

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बह के करीब 11.30 बजे हैं...
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के स्वरुप नगर क्षेत्र का हकीमपुर गांव जो कोलकाता से करीब 90 किलोमीटर दूर और भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 500 मीटर पहले। यहां पर सोनाई नदी की लहरें सीमा तय करती हैं। बीएसएफ चेकपोस्ट के पास काफी गहमा-गहमी है। बीएसएफ के जवान और अधिकारी लोगों और सामान की जांच कर रहे हैं। चेकपोस्ट से पहले सड़के के किनारे दुकानों के बाहर काफी संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग, छोटे-छोटे बच्चे गठरियों और सामान के साथ बैठे हैं लेकिन मुंह ढके हुए हैं।
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पूछने पर कुछ नहीं बोलते.. चेहरा झुका लेते हैं। बांग्लादेश लौटने वाले घुसपैठियों ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा, जो लौटे हैं, वे तो कुछ भी नहीं है। लाखों अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए अभी भी कोलकाता और उसके आसपास के जिलों में रह रहे हैं। बंगाल में तो बांग्लादेशी भरे पड़े हैं। जिस हिसाब से इस पार लोग आएं हैं, उस हिसाब से लौटे कहां हैं। जाली दस्तावेज और फर्जी कागजों के दम पर सारे सरकारी लाभ ले रहे हैं, हमको तो कुछ भी नहीं मिला।



दलाल को पैसे देकर आया था गाजी
हकीमपुर में बांग्लादेश जाने वालों की भीड़ में से एक युवक बोला...क्या पूछना है, पूछिए न। मामून गाजी की गोद में एक छोटी बच्ची है। साथ में पत्नी बैठी है, लेकिन चेहरा ढक कर...। उसने बताया कि वह जब काफी छोटा था, तब भारत आया था। उस समय का बहुत कुछ याद नहीं है। जिनके साथ आया था, उनका नाम भी आज मुझे याद नहीं है। बस इतना याद है कि रात के समय हमने भारतीय सीमा में प्रवेश किया था। काफी अंधकार था उस दिन।

65 वर्ष के निसार को अब हुआ अपनी गलती का अहसास
लौटने वाले घुसपैठियों की ही भीड़ में एक बुजुर्ग दंपती निसार मोल्ला (65 वर्ष) और उनकी पत्नी भी हैं। मोल्ला ने बताया कि वे बांग्लादेश के कातकिला जिले के श्यामनगर के रहने वाले हैं। करीब 40 साल पहले शादी के बाद पत्नी के साथ बिना कागजात के भारत घुस आए थे। फिर कोलकाता पहुंच कर एक घर लेकर कुड़ा बिनने का काम शुरू किया। आराम से जीवन चल रहा था। किसी ने कभी नहीं रोका। फिर धीरे से कहते हैं, इधर बहुत बांग्लादेशी रहता है। कोई चिंता ही नहीं। फिर कुछ सोच कर कहते हैं, लेकिन अब 65 साल की उम्र में लगा कि हमने गलती की।

बांग्लादेश से ऐसे होती है घुसपैठ
भारत का पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के साथ 2,217 किमी की सीमा साझा करता है। जहां फेंसिंग नहीं हुई है। घुसपैठिए अंधेरे में बीएसएफ की पेट्रोलिंग गैप का फायदा कर, घने जंगलों व धान के खेतों वाले हिस्सों से, कटी-फटी बाड़ या बरसात से कमजोर हुई फेंसिंग और सर्दियों में धुंध की आड़ लेकर प्रवेश करते हैं।
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