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हृदय के लिए फलों की मात्रा नहीं, सही चयन जरूरी; जानें फ्लैवानॉल युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करने वाले कितने
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 22 Jun 2026 04:16 AM IST
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सार
चौंकाने वाली बात यह रही कि कई लोग प्रतिदिन पांच बार फल और सब्जियां खाने के बावजूद भी पर्याप्त फ्लैवानॉल नहीं ले पा रहे थे। प्रमुख लेखक डॉ. जेवियर ओटावियानी के अनुसार लोग अक्सर मान लेते हैं कि फल और सब्जियां खाने से उन्हें सभी जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं, लेकिन वास्तविकता अलग है। भोजन में कुछ विशेष फलों, सब्जियों और पेयों को शामिल करने से फ्लैवानॉल की मात्रा काफी बढ़ सकती है।
फलों से हृदय का कनेक्शन क्या है?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
स्वस्थ रहने के लिए रोजाना पांच बार फल और सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है, लेकिन केवल मात्रा बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि खाद्य पदार्थों का चयन भी महत्वपूर्ण है। ताजा अध्ययन में सामने आया कि अधिकतर लोग ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं कर रहे हैं जिनमें प्राकृतिक फ्लैवानॉल यौगिक पाया जाता है। यह यौगिक हृदय रोग से होने वाली मृत्यु के जोखिम को कम करता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया-डेविस और मार्स इंक. के वैज्ञानिकों का यह अध्ययन फूड एंड फंक्शन में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका और ब्रिटेन के 30 हजार से अधिक लोगों के आहार संबंधी आंकड़ों और जैविक संकेतकों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि 20% से भी कम लोग उस स्तर तक फ्लैवानॉल का सेवन कर रहे थे।
चौंकाने वाली बात यह रही कि कई लोग प्रतिदिन पांच बार फल और सब्जियां खाने के बावजूद भी पर्याप्त फ्लैवानॉल नहीं ले पा रहे थे। प्रमुख लेखक डॉ. जेवियर ओटावियानी के अनुसार लोग अक्सर मान लेते हैं कि फल और सब्जियां खाने से उन्हें सभी जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं, लेकिन वास्तविकता अलग है। भोजन में कुछ विशेष फलों, सब्जियों और पेयों को शामिल करने से फ्लैवानॉल की मात्रा काफी बढ़ सकती है।
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सही पांच फल चुनना जरूरी
यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के प्रोफेसर गुंटर कूनले का कहना है कि दिन में पांच बार फल और सब्जियां खाने की सलाह सही है, लेकिन अब यह समझने की जरूरत है कि वे पांच विकल्प कौन से हों। अलग-अलग फल और सब्जियां केवल विटामिन और खनिज ही नहीं, बल्कि विभिन्न जैव-सक्रिय यौगिक भी प्रदान करती हैं, जिनके स्वास्थ्य पर अलग-अलग प्रभाव हो सकते हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया-डेविस और मार्स इंक. के वैज्ञानिकों का यह अध्ययन फूड एंड फंक्शन में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका और ब्रिटेन के 30 हजार से अधिक लोगों के आहार संबंधी आंकड़ों और जैविक संकेतकों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि 20% से भी कम लोग उस स्तर तक फ्लैवानॉल का सेवन कर रहे थे।
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चौंकाने वाली बात यह रही कि कई लोग प्रतिदिन पांच बार फल और सब्जियां खाने के बावजूद भी पर्याप्त फ्लैवानॉल नहीं ले पा रहे थे। प्रमुख लेखक डॉ. जेवियर ओटावियानी के अनुसार लोग अक्सर मान लेते हैं कि फल और सब्जियां खाने से उन्हें सभी जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं, लेकिन वास्तविकता अलग है। भोजन में कुछ विशेष फलों, सब्जियों और पेयों को शामिल करने से फ्लैवानॉल की मात्रा काफी बढ़ सकती है।
सही पांच फल चुनना जरूरी
यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के प्रोफेसर गुंटर कूनले का कहना है कि दिन में पांच बार फल और सब्जियां खाने की सलाह सही है, लेकिन अब यह समझने की जरूरत है कि वे पांच विकल्प कौन से हों। अलग-अलग फल और सब्जियां केवल विटामिन और खनिज ही नहीं, बल्कि विभिन्न जैव-सक्रिय यौगिक भी प्रदान करती हैं, जिनके स्वास्थ्य पर अलग-अलग प्रभाव हो सकते हैं।