फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   German woman saves lakhs of cows in Brij, now will got padma shri

41 साल से गायों की सेवा कर रही है ये जर्मन महिला, सरकारी करेगी पद्मश्री से सम्मानित

Mon, 28 Jan 2019 03:03 PM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shilpa Thakur Updated Mon, 28 Jan 2019 03:03 PM IST
विज्ञापन
German woman saves lakhs of cows in Brij, now will got padma shri
फ्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग - फोटो : social media

जर्मनी में जन्मी फ्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग को भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान दिए जाने की घोषणा की है। फ्रेडरिक उस वक्त महज 20 साल की थीं, जब वह भारत आईं। वह साल 1978 में यहां आई थीं। उस वक्त वह थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया और नेपाल की सैर पर निकली थीं। उन्हें कोई अंदाजा नहीं था कि भारत आकर वह यहीं की होकर रह जाएंगी।

विज्ञापन


वह भारत यात्रा के दौरान ब्रज आईं और यहीं रहने लगीं। यहां उन्होंने गाय खरीदी। फ्रेडरिक का कहना है कि ब्रज आने के बाद से उनकी जिंदगी बदल गई। उन्होंने न केवल गायों पर आधारित कई किताबें पढ़ीं बल्कि हिंदी भी सीखी। उनका कहना है कि जब बूढ़ी होने के बाद गाय दूध देना बंद कर देती है, तब लोग उसे छोड़ देते हैं। ऐसे में वह गायों को एक जगह लाकर उनकी सेवा करती हैं। अपने काम के कारण लोग फ्रेडरिक को सुदेवी माताजी कहकर संबोधित करते हैं। 
विज्ञापन


ब्रिज में उन्होंने एक गौशाला की शुरुआत की थी। 41 सालों में उन्होंने दस बीस नहीं बल्कि लाखों गायों की सेवा की है। वर्तमान में उनके पास 1200 गाये हैं, जो दूध नहीं देतीं। लोग भी अपनी बीमार और घायल हो चुकी गायों को आश्रम के बाहर छोड़कर चले जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


हर महीने आता है 25 लाख खर्च

फ्रेंडरिक के इस काम में हर महीने 25 लाख रुपये का खर्च आता है। कुछ पैसा दान से मिल जाता है, तो कुछ पैसा वह अपनी पुश्तैनी संपत्ति से इस्तेमाल करती हैं। उनकी गौशाला में करीब 60 लोग काम करते हैं। लोग भी गाय की सेवा के लिए दान करते हैं। फ्रेडरिक की संपत्ति बर्लिन में स्थित है। वहां से आने वाले किराए के पैसों से वह गौशाला का खर्चा निकालती हैं।

सुदेवी के पिता जर्मन के एक बड़े अधिकारी भी रहे थे। उनके पिता ने दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में भी कार्य किया। वो भी लगातार राधाकुंड में गोसेवा के लिए आते रहे। गोसेवा के लिए सुदेवी ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने विवाह नहीं किया। हाल ही में उनका वीजा खत्म होने पर मथुरा की सांसद हेमा मालिनी द्वारा वीजा की अवधि बढ़वाई गई। 


पद्मश्री सम्मान मिलने पर सुदेवी दासी ने कहा कि वो बेहद खुश हैं। उन्हें सेवा और तपस्या का फल मिला है। उन्होंने कहा कि वो यहां रहकर पूरे जीवन गोसेवा करना चाहती हैं। बता दें कि महिला दिवस पर सुदेवी दासी की गोसेवा को लेकर अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर को प्रकाशित किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed