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Gujarat: 'बेटी ने मांगा खाना तो मां ने पीट-पीटकर ले ली जान', अब हाईकोर्ट ने क्यों दी जमानत? जानें पूरा मामला
Thu, 06 Aug 2026 03:25 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Thu, 06 Aug 2026 03:25 PM IST
सार
गुजरात हाईकोर्ट ने उस महिला को जमानत दे दी है, जिस पर अपनी दो साल की बेटी को खाना मांगने पर पीट-पीटकर मारने का आरोप है। अदालत ने कहा कि यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था की बड़ी विफलता की याद दिलाती है। अगर एक मां भूख से मजबूर होकर ऐसा कदम उठाती है, तो क्या इसकी जिम्मेदारी केवल उसी की है या पूरे समाज और व्यवस्था की भी? आइए, विस्तार से जानते हैं सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ? अदालत ने मामले में और क्या टिप्पणी की?
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भूख से जुड़ी दर्दनाक घटना पर हाईकोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
गुजरात हाईकोर्ट ने अपनी दो साल की बेटी की कथित हत्या के मामले में गिरफ्तार महिला को जमानत देते हुए एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यह मामला केवल एक मां के अपराध का नहीं, बल्कि समाज, सरकार और सामाजिक व्यवस्था की विफलता का भी आईना है। अदालत ने कहा कि जब भूख एक मां को इतना मजबूर कर दे कि वह अपनी ही बच्ची पर हाथ उठा दे, तब यह पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी है।
महिला पर आरोप है कि उसने भूख से खाना मांग रही अपनी दो साल की बेटी को पीट-पीटकर मार डाला था। इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने नियमित जमानत देते हुए कहा कि भूख केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह इंसानी गरिमा, न्याय और अंतरात्मा से जुड़ा सवाल भी है। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाओं को केवल अपराध मानकर नहीं देखा जा सकता, बल्कि इनके पीछे की सामाजिक परिस्थितियों को भी समझना जरूरी है।
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महिला पर आरोप है कि उसने भूख से खाना मांग रही अपनी दो साल की बेटी को पीट-पीटकर मार डाला था। इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने नियमित जमानत देते हुए कहा कि भूख केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह इंसानी गरिमा, न्याय और अंतरात्मा से जुड़ा सवाल भी है। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाओं को केवल अपराध मानकर नहीं देखा जा सकता, बल्कि इनके पीछे की सामाजिक परिस्थितियों को भी समझना जरूरी है।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला सूरत के वराछा थाना क्षेत्र का है। मार्च 2026 में लखीबेन सोलंकी नाम की महिला को गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन के अनुसार, उसकी दो साल की बेटी ईशा भूख लगने पर बार-बार खाना मांग रही थी। इसी बात से नाराज होकर महिला ने कथित तौर पर बच्ची की पिटाई कर दी, जिससे उसकी मौत हो गई। महिला तीन बच्चों की मां है।
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हाईकोर्ट ने जमानत क्यों दी?
न्यायमूर्ति हसमुख डी. सुथार की अदालत ने पिछले सप्ताह दिए आदेश में कहा कि अगर भूख और गरीबी किसी मां को इस हद तक पहुंचा दें, तो यह केवल उस मां की व्यक्तिगत असफलता नहीं मानी जा सकती। अदालत ने कहा कि सामाजिक न्याय का मतलब हर व्यक्ति को भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य और सम्मान जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलना है। अगर कोई परिवार भूख से जूझ रहा है, तो यह सामाजिक कल्याण व्यवस्था की भी नाकामी है।ये भी पढ़े- Bombay HC: यौन उत्पीड़न केस में तरुण तेजपाल को 10 साल की सजा, पूर्व तहलका संपादक ने कहा- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे