Explainer: लाल किला ब्लास्ट में अल-कायदा कनेक्शन कैसे सामने आया? UN से एनआईए की चार्जशीट तक क्या-क्या पता चला?
लाल किला ब्लास्ट की जांच में आतंकी साजिश की जो कड़ियां सामने आई थीं, अब संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने उन्हें अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट से जोड़कर और स्पष्ट कर दिया है। एनआईए की चार्जशीट में आतंकी नेटवर्क, हथियारों और विस्फोटक तैयार करने की साजिश का खुलासा हुआ। जांच के बाद चार्जशीट किए गए आरोपियों की संख्या 13 हो चुकी है। आइए विस्तार से जानते हैं।
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट ने नवंबर 2025 के लाल किला ब्लास्ट को अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट यानी एक्यूआईएस से जोड़ा है। खास बात यह है कि भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए अपनी जांच में पहले ही आरोपियों के तार अंसार गजवत-उल-हिंद से जोड़ चुकी थी और इसे एक्यूआईएस से जुड़ा संगठन बताया था। अब संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भी लाल किला हमले की कड़ी एक्यूआईएस से जुड़ने की बात सामने आई है।
संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में क्या कहा गया है? एक्यूआईएस क्या है? उसका नेटवर्क कैसे बदला? लाल किला ब्लास्ट कैसे हुआ? एनआईए की जांच में क्या सामने आया? साजिश कैसे रची गई? इस मामले में कौन-कौन आरोपी हैं? ऐसे में जानते हैं...
संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 38वीं रिपोर्ट 10 अगस्त 2026 को जारी हुई। यह रिपोर्ट अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और उनसे जुड़े संगठनों पर नजर रखने वाली संयुक्त राष्ट्र की निगरानी टीम ने तैयार की है।
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण और मध्य एशिया में एक्यूआईएस पहले के बिखरे हुए समूह से विकसित होकर एक क्षेत्रीय आतंकी संगठन के रूप में सामने आया है। संगठन ने अपने लिए लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क बनाए हैं और अब बड़े आतंकी दस्तों के बजाय छोटे और अलग-अलग सेल के जरिए काम कर रहा है। इसी रिपोर्ट में नवंबर 2025 के दिल्ली के लाल किला हमले को एक्यूआईएस से जोड़ा गया है।
रिपोर्ट में बांग्लादेश में एक्यूआईएस के सेल स्थापित करने की कोशिश को लेकर भी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक्यूआईएस ने इत्तेहाद-उल-मुजाहिदीन पाकिस्तान की रीढ़ के रूप में भी काम किया है और इससे जुड़े नेटवर्क को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू में हुए कई हमलों से जोड़ा गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक्यूआईएस का नेतृत्व काबुल में मौजूद रहा है। उसके नेताओं को तालिबान प्रशासन की ओर से पहचान-पत्र दिए जाने की जानकारी मिली है। रिपोर्ट ने इसे तालिबान और एक्यूआईएस के बीच करीबी सहयोग का संकेत माना है।
एक्यूआईएस क्या है?
एक्यूआईएस यानी अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट, अल-कायदा का भारतीय उपमहाद्वीप केंद्रित आतंकी संगठन है। इसका नेटवर्क दक्षिण एशिया के कई देशों से जुड़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की पिछली रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में एक्यूआईएस का नेतृत्व ओसामा महमूद कर रहा था और अतीफ याह्या गौरी उसका उपनेता था। उस समय संगठन में करीब 200 से 400 लड़ाके होने का अनुमान लगाया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, एक्यूआईएस से जुड़े लड़ाके अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भारत, म्यांमार और पाकिस्तान से थे। उस समय संगठन की मौजूदगी अफगानिस्तान के गजनी, हेलमंद, कंधार, निमरोज, पक्तिका और जाबुल प्रांतों में बताई गई थी। एक्यूआईएस के लड़ाके तत्कालीन अफगान सरकार के खिलाफ तालिबान के साथ मिलकर लड़ रहे थे।
एक्यूआईएस का नेटवर्क कैसे बदला?
संयुक्त राष्ट्र की पुरानी और नई रिपोर्ट को साथ रखकर देखें तो एक्यूआईएस के काम करने के तरीके में बदलाव दिखाई देता है। पुरानी रिपोर्ट में संगठन के लड़ाकों की संख्या, नेतृत्व और अफगानिस्तान में मौजूदगी का उल्लेख था। वहीं 2026 की नई रिपोर्ट में संगठन के छोटे और विकेंद्रीकृत सेल, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और वित्तीय नेटवर्क पर जोर दिया गया है। यानी ताजा आकलन में एक्यूआईएस को बड़े और एक जगह केंद्रित आतंकी दस्ते के बजाय छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए गतिविधियां चलाने वाले क्षेत्रीय संगठन के रूप में देखा गया है।
लाल किला ब्लास्ट कैसे हुआ?
10 नवंबर 2025 की शाम दिल्ली के लाल किला इलाके में जोरदार धमाका हुआ था। लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के सामने सुभाष मार्ग पर ट्रैफिक सिग्नल के पास धीमी गति से चल रही हुंडई आई20 कार में शाम करीब 6 बजकर 52 मिनट पर विस्फोट हुआ।
परिसर के प्रवेश द्वार से मेट्रो स्टेशन करीब 150 से 200 मीटर की दूरी पर है। धमाके के बाद आसपास की कई गाड़ियों में आग लग गई और इलाके में भारी नुकसान हुआ। इस घटना में 11 लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। बाद में एनआईए ने इसे वाहन में लगाए गए उच्च तीव्रता वाले विस्फोटक उपकरण का हमला बताया। घटना के बाद केंद्र सरकार ने इसे आतंकी घटना बताया और दोषियों, उनके सहयोगियों व उन्हें समर्थन देने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
एनआईए जांच कहां तक पहुंची?
धमाके के बाद दिल्ली पुलिस ने शुरुआती जांच की। इसके बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए को सौंप दी गई। एनआईए ने मामले को आतंकी साजिश के तौर पर जांचना शुरू किया। अलग-अलग राज्यों में छापेमारी और पूछताछ के जरिए आरोपियों और उनके नेटवर्क की जानकारी जुटाई गई। जांच आगे बढ़ने पर एजेंसी ने इस मामले को अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े एक आतंकी नेटवर्क से जोड़ा।
एनआईए की चार्जशीट में क्या सामने आया?
एनआईए ने 14 मई 2026 को करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें 10 आरोपियों को नामजद किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन आरोपियों की कड़ी अंसार गजवत-उल-हिंद यानी एजीयूएच से थी। एनआईए ने एजीयूएच को एक्यूआईएस का ऑफशूट यानी उससे जुड़ा संगठन बताया। एक्यूआईएस और उसके सभी स्वरूपों को गृह मंत्रालय ने जून 2018 में आतंकी संगठन के रूप में अधिसूचित किया था। एनआईए के मुताबिक, सभी 10 आरोपी एजीयूएच से जुड़े थे।
इसकी साजिश कैसे रची गई थी?
एनआईए के अनुसार, इस नेटवर्क में कुछ आरोपी मेडिकल पेशेवर भी थे और वे एक्यूआईएस व अंसार गजवत-उल-हिंद की विचारधारा से प्रभावित थे। जांच में सामने आया कि 2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त बैठक के बाद अंसार गजवत-उल-हिंद को फिर से संगठित करके एजीयूएच इंटरिम बनाया गया। एनआईए के मुताबिक, इसके तहत ऑपरेशन हेवेनली हिंद शुरू किया गया। एजेंसी ने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य भारत में लोकतांत्रिक तरीके से स्थापित सरकार को हटाकर शरिया आधारित शासन स्थापित करना था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क ने नए लोगों की भर्ती की, हिंसक जिहादी विचारधारा का प्रचार किया, हथियार और गोला-बारूद जुटाए और विस्फोटक तैयार किए। आरोपियों द्वारा अलग-अलग प्रकार के विस्फोटक उपकरण तैयार करने और उनके परीक्षण किए जाने की भी बात चार्जशीट में कही गई है।
मुख्य आरोपी कौन था?
चार्जशीट में डॉ. उमर उन नबी को मुख्य आरोपी बताया गया था। वह धमाके में इस्तेमाल कार में मौजूद था और विस्फोट में उसकी मौत हो गई थी। एनआईए ने डीएनए जांच के जरिए उसकी पहचान की। एजेंसी के मुताबिक, वह फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय में मेडिसिन का पूर्व सहायक प्रोफेसर था। उसकी मौत के कारण उसके खिलाफ आरोपों को समाप्त करने का प्रस्ताव चार्जशीट में रखा गया था।
इस मामले में कितने आरोपी हैं?
14 मई 2026 को दाखिल पहली चार्जशीट में 10 आरोपियों को नामजद किया गया था। इनमें डॉ. उमर उन नबी के अलावा आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, शोएब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल थे।
एनआईए के मुताबिक, जांच जम्मू-कश्मीर के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर तक फैली थी। चार्जशीट में 588 गवाहों के बयान, 395 से ज्यादा दस्तावेज और 200 से ज्यादा जब्त सामग्री शामिल की गई थी। उस समय तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था।
मामले की जांच चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी जारी रही। 27 जून 2026 को एनआईए ने तीन और आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की। इनमें जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट और मुजफ्फर अहमद उर्फ फराज उर्फ जफर शामिल थे। इसके बाद इस मामले में चार्जशीट किए गए आरोपियों की संख्या 13 हो गई।
एनआईए को जांच में और क्या मिला?
एनआईए के मुताबिक, आरोपियों ने प्रतिबंधित हथियार हासिल किए थे। जांच में एके-47, क्रिंकोव राइफल और देशी पिस्तौल जैसे हथियारों की अवैध खरीद का भी उल्लेख किया गया। एजेंसी के मुताबिक, नेटवर्क के सदस्यों ने रॉकेट और ड्रोन से लगाए जाने वाले विस्फोटक उपकरणों पर प्रयोग किए। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि इनका इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर और भारत के दूसरे हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की योजना में किया जाना था।