Mig-21 Crash: पांच दशक में 400 विमान हो चुके हैं हादसे का शिकार, IAF में क्या है मिग विमानों का भविष्य?
Mig-21 Crash: भारतीय वायुसेना ने पिछले साल मिग-21 लड़ाकू स्क्वाड्रन को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए तीन साल की समयसीमा तय की थी। आईएएफ से जुड़े सूत्रों के अनुसार वायुसेना की योजना अगले पांच साल में मिग-29 लड़ाकू विमानों के भी तीन स्क्वाड्रन को चरणबद्ध तरीके से हटाने की है।
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राजस्थान के हनुमानगढ़ में सोमवार को मिग-21 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से एक बार फिर भारतीय वायु सेना के सोवियत मूल के पुराने हो चुके विमानों के बेड़े पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। 1960 के दशक की शुरुआत में पहली बार शामिल होने के बाद से लगभग मिग विमान के साथ लगभग 400 हादसे हो चुके हैं।
सोमवार को मिग-21 विमान हादसे में तीन लोगों की गई जान
सोमवार को राजस्थान के हनुमानगढ़ में मिग-21 लड़ाकू विमान के सूरतगढ़ स्थित वायुसेना स्टेशन से नियमित प्रशिक्षण उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एक घर से टकरा जाने से तीन लोगों की मौत हो गई। मिग-21 लंबे समय तक भारतीय वायुसेना का मुख्य आधार बना रहा। 1960 के दशक की शुरुआत में इसके शामिल होने के बाद भारतीय वायु सेना ने अपने समग्र युद्ध कौशल को बढ़ावा देने के लिए 870 से अधिक मिग-21 लड़ाकू विमान खरीदे।
हालांकि सुरक्षा के मामले में मिग-21 विमानों का रिकॉर्ड बहुत खराब रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बीते छह दशकों में मिग-21 विमान 400 दुर्घटनाओं में शामिल रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास तीन मिग-21 स्क्वाड्रन हैं, जिनमें कुल लगभग 50 विमान हैं। भारतीय वायुसेना ने पिछले साल मिग-21 लड़ाकू स्क्वाड्रन को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए तीन साल की समयसीमा तय की थी।
वायुसेना अधिकारियों का दावा- मिग-21 को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना पटरी पर
सूत्रों के अनुसार वायुसेना की योजना अगले पांच साल में मिग-29 लड़ाकू विमानों के भी तीन स्क्वाड्रन को चरणबद्ध तरीके से हटाने की है। सोवियत मूल के विमान बेड़े को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है। सेना के एक अधिकारी ने कहा, 'मिग-21 को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना पटरी पर है। अधिकारी ने कहा कि चरणबद्ध योजना प्लेटफार्मों से जुड़ी हालिया दुर्घटनाओं से संबंधित नहीं है।
वायुसेना के आधुनिकीकरण के लिए तेजस और राफेल जैसे विमानों की हो रही खरीदारी
भारतीय वायुसेना की आधुनिकीकरण योजना के तहत रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2021 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ 83 तेजस विमानों की खरीदारी के लिए 48,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था। भारतीय वायुसेना अपनी लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाने के लिए पहले ही 36 राफेल जेट खरीद चुकी है। भारतीय वायुसेना 114 मध्यम भूमिका वाले लड़ाकू विमान (एमआरएफए) हासिल करने की प्रक्रिया में भी है। पिछले साल मार्च में रक्षा राज्य मंत्री अजय भट ने राज्यसभा में कहा था कि पिछले पांच साल में तीनों सेनाओं के विमानों और हेलीकॉप्टरों से जुड़ी दुर्घटनाओं में 42 डिफेंस पर्सनल मारे गए हैं।
पांच वर्षों में 45 हवाई दुर्घटनाएं हुईं इनमें 29 वायुसेना से संबंधित
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में 45 हवाई दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें से 29 भारतीय वायुसेना के प्लेटफार्मों से जुड़े थे। पिछले साल जुलाई में राजस्थान के बाड़मेर के पास दो सीटों वाला मिग-21 प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें वायुसेना के दो पायलटों की मौत हो गई थी। वहीं जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में गुरुवार को 'हार्ड लैंडिंग' के बाद एक एएलएच ध्रुव दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
जनवरी में एक दुर्लभ दुर्घटना में एक रूसी डिजाइन वाले सुखोई-30 एमकेआई जेट और एक फ्रांसीसी मिराज-2000 के बीच हवा में टक्कर हुई थी। पिछले साल अक्टूबर में अरुणाचल प्रदेश के तूतिंग के पास भारतीय सेना के एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। एक अन्य एएलएच-डब्ल्यूएसआई तीन अगस्त, 2021 को पठानकोट के पास विशाल रंजीत सागर जलाशय में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें सेना के दो पायलट मारे गए थे।
सैन्य हेलिकॉप्टर दुर्घटना में पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत की गई थी जान
आधिकारिक विवरण के अनुसार, मार्च 2017 से दिसंबर 2021 के बीच 15 सैन्य हेलीकॉप्टरों से जुड़ी दुर्घटनाओं में 31 लोगों की जान चली गई। इनमें चार एएलएच, चार चीता, दो एएलएच (डब्ल्यूएसआई), तीन एमआई-17 वी5, एक एमआई-17 और एक चेतक शामिल थे। दिसंबर 2021 में तमिलनाडु के कुन्नूर के पास एक एमआई-11 वीएच हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका और 11 अन्य सशस्त्र बलों के कर्मियों की मौत हो गई थी।