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Inflation Alert: महंगाई और अल-नीनो का डबल अटैक! भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है पांच लाख करोड़ रुपये का बोझ

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 12 Jun 2026 05:03 AM IST
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सार

बढ़ती महंगाई, महंगे कच्चे तेल और अल-नीनो के असर से भारतीय अर्थव्यवस्था पर 5 लाख करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। रिपोर्ट में उपभोक्ता मांग और सब्सिडी खर्च बढ़ने की आशंका जताई गई है।

Inflation and El Nino May Cost Indian Economy Up to Rs 5 Lakh Crore, Warns Report
महंगाई और अल-नीनो बढ़ा सकते हैं आर्थिक दबाव। - फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
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विस्तार

पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ती महंगाई आम आदमी के साथ अर्थव्यवस्था के लिए भी चुनौती बनती जा रही है। अल-नीनो के साथ मिलकर यह और बड़ा संकट खड़ा कर सकती है। प्रभुदास लीलाधर ने एक रिपोर्ट में आशंका जताई है कि महंगाई और मानसून पर अल-नीनो का पड़ने वाला प्रभाव 2027 की दूसरी तिमाही से उपभोक्ता मांग की रफ्तार को धीमी कर सकते हैं, जिससे भारत पर पांच लाख करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।



रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला और महंगे क्रूड के कारण पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, एफएमसीजी, डेयरी, केमिकल, ड्यूरेबल्स एवं वाहन क्षेत्र में उत्पादों के दाम बढ़े हैं, जिससे खपत मांग में गिरावट की आशंका है। इसके अलावा, उर्वरक, खाद्य एवं ईंधन सब्सिडी में काफी बढ़ोतरी होगी और पेट्रोलियम उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी से होने वाली कमाई घटेगी। इन कारकों की वजह से अर्थव्यवस्था पर 4-5 लाख करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर खास असर नहीं पड़ा है। हालांकि, बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम और भारत की विदेशी निर्भरता के कारण कुछ दरारें दिखाई देने लगी हैं। यह निर्भरता न सिर्फ कच्चे तेल के लिए है, बल्कि भारत दुर्लभ खनिज, उर्वरक, सेमीकंडक्टर और जरूरी टेक्नोलॉजी जैसी चीजों के लिए भी अन्य देशों पर निर्भर है।
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बाजार पर भी असर
ईरान संकट के कारण उपजी चुनौतियों से भारतीय शेयर बाजार भी प्रभावित हुआ है। निफ्टी दो महीनों में 7.2 फीसदी टूटकर 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर से 15.4 फीसदी नीचे आ गया है। हालांकि, इस बात की आशंका कम है कि बाजार में इतनी बड़ी गिरावट आएगी कि वह हाल के निचले स्तरों को तोड़ दे। लेकिन, लंबे समय तक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण उतार-चढ़ाव और बढ़ सकते हैं।

बढ़ सकती है रेपो दर
रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 की दूसरी छमाही से रेपो दर में बढ़ोतरी की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। सेवाओं सहित व्यापार का संतुलन ठीक-ठाक है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, विदेश से आने वाली कमाई यानी रेमिटेंस पर दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण रुपये पर निरंतर दबाव बना हुआ है।

दुनियाभर में खाद की कीमतों और आयात लागत में बढ़ोतरी के कारण अगले साल भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल दोगुना होकर करीब 3.4 लाख करोड़ पहुंच सकता है, जो अभी 1.7 लाख करोड़ है। वहीं, खाद्य सब्सिडी बिल भी वित्त वर्ष 2027 में 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।  उधर, उर्वरक मंत्रालय की अपर सचिव अपर्णा एस शर्मा से जब पूछा गया कि क्या 2026-27 के लिए 3.4 लाख करोड़ की उर्वरक सब्सिडी के अनुमान को वैश्विक कीमतों में गिरावट के कारण कम किया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से हमारे एक उपक्रम की ओर से किए गए टेंडर के परिणामस्वरूप निश्चित रूप से हम सब्सिडी के आंकड़ों पर फिर से जरूर विचार करेंगे।

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