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SPG: पीएम मोदी के 'स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप' में IPS-DIG की दरकार, सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को MHA का संदेश
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सार
केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आईपीएस डीआईजी के अनेक पद रिक्त रहे हैं। खासतौर पर, केंद्रीय जांच एजेंसियों, पुलिस संगठनों और अर्धसैनिक बलों में आईपीएस डीआईजी के सभी पद भरे नहीं जा सके हैं। सूत्रों का कहना है कि एसपीजी में पिछले दिनों करीब दर्जन अफसरों को उनके मूल कैडर/सेवा में वापस भेजा गया था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय
- फोटो : ANI
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विस्तार
प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में तैनात 'स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप' (एसपीजी) में आईपीएस डीआईजी की दरकार है। एसपीजी में तय आईपीएस डीआईजी के पद पूरी नहीं भर पा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों के मुख्य सचिवों (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और यूटी के अलावा) को मैसेज भेजा गया है। मुख्य सचिवों से कहा गया है कि इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा आईपीएस अफसरों तक पहुंचाया जाए। प्रतिनियुक्ति के लिए योग्य एवं इच्छुक आईपीएस डीआईजी की फाइल तुरंत प्रभाव से गृह मंत्रालय को प्रेषित करें।
आईपीएस डीआईजी के लिए 14 साल की सेवा अनिवार्य
केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से दो सप्ताह पहले यह मैसेज भेजा गया था। इसमें कहा गया है कि बतौर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, एसपीजी में आईपीएस डीआईजी के पद पर आने वाले अधिकारियों के लिए 14 साल की सेवा अनिवार्य है। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से कहा गया है कि इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा आईपीएस अफसरों तक पहुंचाया जाए। एसपीजी में योग्य आईपीएस अधिकारियों का प्रतिनियुक्ति आवेदन, तीस दिन के अंदर गृह मंत्रालय को भेजा जाए।
विजिलेंस स्टे्टस भी बताना होगा
एसपीजी में संबंधित आईपीएस के नोमिनेशन दस्तावेज भेजने के साथ ही उनके विजिलेंस स्टे्टस के बारे में भी सूचित किया जाए। बता दें कि केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आईपीएस डीआईजी के अनेक पद रिक्त रहे हैं। खासतौर पर, केंद्रीय जांच एजेंसियों, पुलिस संगठनों और अर्धसैनिक बलों में आईपीएस डीआईजी के सभी पद भरे नहीं जा सके हैं। सूत्रों का कहना है कि एसपीजी में पिछले दिनों करीब दर्जन अफसरों को उनके मूल कैडर/सेवा में वापस भेजा गया था। उसके चलते अब आईपीएस डीआईजी के पद भरने के लिए आवेदन मांगे गए हैं।
त्रुटिरहित एवं अचूक सुरक्षा सुनिश्चित
एसपीजी अधिकारियों में उच्च नेतृत्व क्षमता, व्यावसायिकता और निकट सुरक्षा का गहन ज्ञान समाहित है। वे आगे बढ़कर नेतृत्व करने की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। एसपीजी, न केवल अपने कामकाज में, बल्कि सूचना एवं सुरक्षा बल और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पुलिस बलों के सहयोग से समग्र सुरक्षा व्यवस्था में भी नवोन्मेषी पद्धतियों को अपनाकर इस लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करता है। अपने अधिकारियों की उच्च नेतृत्व क्षमता, व्यावसायिकता और ज्ञान के कारण ही एसपीजी अपने संरक्षित व्यक्तियों के लिए त्रुटिरहित एवं अचूक सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
46 राष्ट्रपति पुलिस पदक और 358 पुलिस पदक
एसपीजी अधिकारियों को अब तक एक शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा के लिए 46 राष्ट्रपति पुलिस पदक और सराहनीय सेवा के लिए 358 पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है। एसपीजी को यह गौरव भी प्राप्त है कि इसके प्रथम निदेशक को पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। एसपीजी विश्व स्तर पर अपने क्षेत्र की सर्वश्रेष्ठ संस्थाओं में शुमार है। एसपीजी के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाता है कि वे आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च बलिदान देने के लिए भी तैयार रहें।
'शून्य त्रुटि' और 'उत्कृष्टता की संस्कृति'
एसपीजी 'शून्य त्रुटि' और 'उत्कृष्टता की संस्कृति' के आदर्श वाक्य पर कार्य करता है। एसपीजी कर्मियों ने भारत और विदेशों में हमेशा निष्ठा, समर्पण, कड़ी मेहनत और साहस के साथ अपने कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। प्रत्येक एसपीजी कर्मी, राष्ट्र की अखंडता और एसपीजी के आदर्श वाक्य 'शौर्यं समर्पणं सुरक्षां' (अर्थात् वीरता, समर्पण और सुरक्षा) की भावना को बनाए रखने के लिए स्वयं को पूरी तरह समर्पित करता है।
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आईपीएस डीआईजी के लिए 14 साल की सेवा अनिवार्य
केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से दो सप्ताह पहले यह मैसेज भेजा गया था। इसमें कहा गया है कि बतौर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, एसपीजी में आईपीएस डीआईजी के पद पर आने वाले अधिकारियों के लिए 14 साल की सेवा अनिवार्य है। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से कहा गया है कि इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा आईपीएस अफसरों तक पहुंचाया जाए। एसपीजी में योग्य आईपीएस अधिकारियों का प्रतिनियुक्ति आवेदन, तीस दिन के अंदर गृह मंत्रालय को भेजा जाए।
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विजिलेंस स्टे्टस भी बताना होगा
एसपीजी में संबंधित आईपीएस के नोमिनेशन दस्तावेज भेजने के साथ ही उनके विजिलेंस स्टे्टस के बारे में भी सूचित किया जाए। बता दें कि केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आईपीएस डीआईजी के अनेक पद रिक्त रहे हैं। खासतौर पर, केंद्रीय जांच एजेंसियों, पुलिस संगठनों और अर्धसैनिक बलों में आईपीएस डीआईजी के सभी पद भरे नहीं जा सके हैं। सूत्रों का कहना है कि एसपीजी में पिछले दिनों करीब दर्जन अफसरों को उनके मूल कैडर/सेवा में वापस भेजा गया था। उसके चलते अब आईपीएस डीआईजी के पद भरने के लिए आवेदन मांगे गए हैं।
त्रुटिरहित एवं अचूक सुरक्षा सुनिश्चित
एसपीजी अधिकारियों में उच्च नेतृत्व क्षमता, व्यावसायिकता और निकट सुरक्षा का गहन ज्ञान समाहित है। वे आगे बढ़कर नेतृत्व करने की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। एसपीजी, न केवल अपने कामकाज में, बल्कि सूचना एवं सुरक्षा बल और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पुलिस बलों के सहयोग से समग्र सुरक्षा व्यवस्था में भी नवोन्मेषी पद्धतियों को अपनाकर इस लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करता है। अपने अधिकारियों की उच्च नेतृत्व क्षमता, व्यावसायिकता और ज्ञान के कारण ही एसपीजी अपने संरक्षित व्यक्तियों के लिए त्रुटिरहित एवं अचूक सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
46 राष्ट्रपति पुलिस पदक और 358 पुलिस पदक
एसपीजी अधिकारियों को अब तक एक शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा के लिए 46 राष्ट्रपति पुलिस पदक और सराहनीय सेवा के लिए 358 पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है। एसपीजी को यह गौरव भी प्राप्त है कि इसके प्रथम निदेशक को पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। एसपीजी विश्व स्तर पर अपने क्षेत्र की सर्वश्रेष्ठ संस्थाओं में शुमार है। एसपीजी के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाता है कि वे आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च बलिदान देने के लिए भी तैयार रहें।
'शून्य त्रुटि' और 'उत्कृष्टता की संस्कृति'
एसपीजी 'शून्य त्रुटि' और 'उत्कृष्टता की संस्कृति' के आदर्श वाक्य पर कार्य करता है। एसपीजी कर्मियों ने भारत और विदेशों में हमेशा निष्ठा, समर्पण, कड़ी मेहनत और साहस के साथ अपने कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। प्रत्येक एसपीजी कर्मी, राष्ट्र की अखंडता और एसपीजी के आदर्श वाक्य 'शौर्यं समर्पणं सुरक्षां' (अर्थात् वीरता, समर्पण और सुरक्षा) की भावना को बनाए रखने के लिए स्वयं को पूरी तरह समर्पित करता है।