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Republic Day: इरविन एम्फीथिएटर और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति; ऐसा था पहला गणतंत्र दिवस समारोह, जानें खास बातें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Sun, 26 Jan 2025 09:14 AM IST
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सार

देश का पहला गणतंत्र दिवस समारोह राजपथ (अब कर्त्तव्य पथ) पर नहीं मनाया गया था। राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण करने के बाद समारोह का आयोजन इरविन एम्फीथिएटर में हुआ था। देश के पहले गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि भी इंडोनेशिया के प्रथम राष्ट्रपति सुकर्णो थे। आइए जानते हैं 26 जनवरी 1950 को पहले गणतंत्र दिवस पर क्या-क्या हुआ था?

Irwin Amphitheatre and Indonesian President; This was the first Republic Day celebration, know special things
कैसे मनाया गया पहला गणतंत्र दिवस - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

आज भारत का 76वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ध्वजारोहण किया। इसके साथ ही कर्तव्य पथ पर परेड निकाली गई। गणतंत्र दिवस की थीम स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास है। लेकिन देश का पहला गणतंत्र दिवस समारोह राजपथ (अब कर्त्तव्य पथ) पर नहीं मनाया गया था। राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण करने के बाद समारोह का आयोजन इरविन एम्फीथिएटर में हुआ था। देश के पहले गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि भी इंडोनेशिया के प्रथम राष्ट्रपति सुकर्णो थे। इसके साथ ही परेड का आयोजन सुबह नहीं बल्कि दोपहर को हुआ था। आइए जानते हैं 26 जनवरी 1950 को पहले गणतंत्र दिवस पर क्या-क्या हुआ था?



1933 में बना था इरविन एम्फीथिएटर
देश के पहले गणतंत्र दिवस समारोह का गवाह बने इरविन एम्फीथिएटर का निर्माण 1933 में किया गया था। अब इसे मेजर ध्यानचंद स्टेडयिम के नाम से जाना जाता है। इरविन एम्फीथिएटर का निर्माण 1933 में भावनगर के तत्कालीन महाराजा ने बतौर उपहार कराया था। उन्होंने इसके निर्माण के लिए पांच लाख रुपये का दान दिया था। इसका उद्घाटन तत्कालीन वायसराय लॉर्ड विलिंगडन ने किया था। एम्फीथियेटर का नाम भारत के पूर्व वायसराय लॉर्ड इरविन के नाम पर रखा गया था। जिन्होंने फरवरी 1931 में नई ब्रिटिश राजधानी नई दिल्ली का उद्घाटन किया था। इस  एम्फीथिएटर को कनॉट प्लेस के वास्तुकार रॉबर्ट टोर रसेल ने डिजाइन किया था। एम्फीथिएटर का नाम 1951 में एशियाई खेलों की मेजबानी से ठीक पहले राष्ट्रीय स्टेडियम रखा गया था।
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10:18 बजे भारत का संविधान लागू हुआ
एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक 26 जनवरी 1950 को गवर्नमेंट हाउस (अब राष्ट्रपति भवन) के दरबार हॉल में समारोह में सुबह 10:18 बजे भारत को एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया। इसमें संविधान लागू करने की घोषणा की गई। इसके छह मिनट बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति के पदभार ग्रहण की घोषणा सुबह 10:30 बजे 31 तोपों की सलामी के साथ की गई। 
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गर्वनर जनरल ने पढ़ी थी घोषणा
शपथ ग्रहण समारोह में सेवानिवृत्त गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी ने भारत गणराज्य की घोषणा पढ़ी। इसमें उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा घोषित किया गया है कि इंडिया अर्थात भारत अब राज्यों का एक संघ होगा। जिसमें संघ के अंतर्गत वे क्षेत्र सम्मिलित होंगे जो अब तक गवर्नर के प्रांत, भारतीय राज्य और मुख्य आयुक्तों के प्रांत थे। 

राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने दो भाषाओं में दिया भाषण
गर्वनर की घोषणा के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। इसके बाद उन्होंने पहले हिंदी में और फिर अंग्रेजी में संक्षिप्त भाषण दिया। उन्होंने कहा कि आज हमारे लंबे और उतार-चढ़ाव भरे इतिहास में पहली बार उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में केप कोमोरिन तक, पश्चिम में काठियावाड़ और कच्छ से लेकर पूर्व में कोकोनाडा और कामरूप तक का विशाल भूभाग एक संविधान और एक संघ के अधिकार क्षेत्र में आ गया है। यह संविधान यहां रहने वाले 320 मिलियन से अधिक पुरुषों और महिलाओं के कल्याण की जिम्मेदारी लेता है।

दोपहर में निकाली गई परेड
इसके बाद दोपहर 2:30 बजे राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद गवर्नमेंट हाउस (अब राष्ट्रपति भवन) से राजकीय सम्मान के साथ निकले। वह 35 साल पुरानी एक गाड़ी में सवार थे, जिसमें अशोक की राजधानी का नया प्रतीक लगा हुआ था और इसे छह मज़बूत ऑस्ट्रेलियाई घोड़े खींच रहे थे। जैसे ही जुलूस इरविन एम्फीथिएटर से गुजरा सड़कों पर जय के नारे गूंजने लगे। राष्ट्रपति ने लोगों के अभिवादन का गर्मजोशी से हाथ जोड़कर जवाब दिया। परेड में 3:45 बजे इरविन एम्फीथिएटर पर समाप्त हुई। यहां भारत की तीनों सेनाओं और पुलिस के 3,000 अधिकारियों और जवानों ने सामूहिक बैंड के साथ औपचारिक परेड हुई। तीनों सशस्त्र बलों और पुलिस का प्रतिनिधित्व करने वाले सात सामूहिक बैंड ने दर्शकों का मनोरंजन किया। जबकि सेना की इकाइयों और स्थानीय टुकड़ियों और रेजीमेंटों ने कार्यक्रम को रंगीन बना दिया।

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