सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   India News ›   Jaishankar Says Our Friendship with Iran No Deal Struck to Secure Release of Indian-Flagged Ships

'ईरान से हमारी दोस्ती': जयशंकर बोले- भारतीय झंडे वाले जहाजों को निकालने के लिए कोई समझौता नहीं, पुराना सहयोग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Mon, 16 Mar 2026 11:55 AM IST
विज्ञापन
सार

पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से अपने जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट किया कि हर भारतीय ध्वज लगे जहाज को व्यक्तिगत रूप से अनुमति दी जा रही है और इसके लिए ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हुआ।

Jaishankar Says Our Friendship with Iran No Deal Struck to Secure Release of Indian-Flagged Ships
एस जयशंकर, विदेश मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार

पश्चिम एशिया में 17 दिन से जारी संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार को हिला कर रख दिया है। इसका बड़ा असर हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर देखने को मिला, जिसके चलते दुनियाभर की तेल आपूर्तियों संकट के बादल तक दिखने लगे। इसी तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत ने कूटनीतिक कदम उठाया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारत ईरान के साथ सीधे और निर्णायक संवाद कर रहा है, जिससे भारतीय ध्वज के साथ जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो रहा है।

Trending Videos


जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि ईरानी अधिकारियों के साथ सीधे संवाद ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। इसके तहत अभी कई और भारतीय ध्वज वाले जहाजों को होर्मुज जलमार्ग से गुजरना बाकी है। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में जयशंकर ने स्पष्ट किया कि हर भारतीय जहाज को व्यक्तिगत रूप से अनुमति दी जा रही है और इसके लिए भारत और ईरान के बीच कोई नया समझौता नहीं हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- Warning For Trump: ट्रंप को तेल इंडस्ट्री की चेतावनी- होर्मुज जलडमरूमध्य संकट रहा जारी तो और बदतर होंगे हालात

इस आवाजाही के लिए कोई समझौता नहीं- जयशंकर

इस दौरान जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय ध्वज वाले जहाजों के सुरक्षित आवागमन के बदले ईरान को भारत की तरफ से कोई लाभ नहीं दिया गया। उनका कहना था कि भारत और ईरान के बीच पुराना सहयोग रहा है, इसी आधार पर हमने यह कदम उठाया। यह कोई लेन-देन का मामला नहीं है।

बता दें कि पिछले सप्ताह ईरान ने दो भारतीय झंडाधारी एलपीजी वाहनों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति दी थी। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेसीयान के टेलीफोनिक संवाद के कुछ ही घंटे बाद आया, जो अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पहला संपर्क था। इसके अलावा, जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची के बीच भी चर्चा हुई।

केवल अमेरिका-इस्राइली जहाजों के लिए होर्मुज बंद
हालांकि ईरान ने हॉर्मुज को केवल अमेरिकी और इस्राइली जहाजों और उनके सहयोगियों के लिए के लिए बंद रखा है। होर्मुज जलमार्ग से विश्व का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। ऐसे में बीते 17 दिनों से जारी पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण इसके संचालन में व्यवधान आया है और फिर इस संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल तक पहुंच गई है।

ये भी पढ़ें:- पश्चिम एशिया संघर्ष: तेल संकट के बीच बढ़ेगा वैश्चिक टकराव, ट्रंप ने होर्मुज पर सात देशों से क्यों मांगी मदद?

भारत ने अपनाया संवाद का रास्ता
गौरतलब है कि ऐसी कठिन परिस्थिति में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने का आह्वान किया है। हालांकि अधिकतर देशों से उनके इस आह्वान पर नकारात्मक संदेश ही आया है। जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक सभी देशों ने होर्मुज में अपना युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया। ऐसे में बात अगर भारत की करें तो भारत ने अपनी रणनीति के तहत सीधे संवाद और समझौते के बजाय सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने का रास्ता अपनाया है। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत अपनी रणनीति यूरोपीय देशों के साथ साझा करने को तैयार है, लेकिन प्रत्येक देश की ईरान के साथ स्थिति अलग है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed