क्या कुछ बड़ी योजना बना रहा जापान?: तैनात कीं चीन तक मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें, समझिए इसके मायने
एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जापान ने चीन तक मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें तैनात कर साफ संदेश दिया है। यह कदम उसकी रक्षा क्षमता और स्टैंडऑफ ताकत को मजबूत करता है, जिससे वह दूर से दुश्मन ठिकानों को निशाना बना सकता है। हालांकि इस तैनाती से क्षेत्र में सैन्य संतुलन बदलने और तनाव बढ़ने की आशंका भी तेज हो गई है।
विस्तार
जापान की पहली लंबी दूरी की मिसाइल दक्षिण-पश्चिमी सेना शिविर में तैनात की गई है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि देश अपनी आक्रमण क्षमताओं को मजबूत करने में जुटा है। उन्नत टाइप-12 मिसाइल की मारक क्षमता 1,000 किलोमीटर (620 मील) है, जो मूल मिसाइल की 200 किलोमीटर (125 मील) की मारक क्षमता से काफी अधिक है। मूल मिसाइल चीन की मुख्य भूमि तक मार कर सकती थी और इसकी जद में पूरा चीन आ सकता है। जापान की मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित और निर्मित उन्नत टाइप-12 भूमि-से-जहाज मिसाइलें कुमामोटो प्रांत के केंगून शिविर में परिचालन में आ गईं।
जापान की रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने कहा कि युद्धोत्तर काल में जापान के सामने सबसे गंभीर और जटिल सुरक्षा वातावरण है... ऐसे में यह क्षमता जापान की प्रतिरोधक क्षमता और प्रतिक्रियाशीलता को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वह बोले, यह आत्मरक्षा के लिए जापान के दृढ़ संकल्प और क्षमता को प्रदर्शित करता है। लंबी दूरी की मिसाइल की तैनाती से जापान को स्टैंडऑफ क्षमता प्राप्त हो गई है, जिसका अर्थ है कि वह दूर से शत्रु के मिसाइल ठिकानों पर हमला कर सकता है।
मिसाइल तैनाती का विरोध
फिलहाल, आवासीय इलाके के पास मिसाइलों की तैनाती का विरोध कर रहे स्थानीय लोगों ने केंगुन कैंप के बाहर प्रदर्शन किया है। उनका कहना था कि इससे तनाव बढ़ेगा और इस बात का खतरा बढ़ जाएगा कि संभावित दुश्मन इस इलाके को निशाना बना सकते हैं। जापान दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों की सुरक्षा के लिए और हथियार प्रणालियां भी तैनात कर रहा है। इन प्रदर्शनों पर सरकार ने कोई टिप्पणी नहीं की।
विध्वंसक जहाजों पर होगी तैनाती
जापान इस साल के अंत में अमेरिकी निर्मित 1,600 किलोमीटर (990 मील) की मारक क्षमता वाली टोमहॉक क्रूज मिसाइलों को जापानी विध्वंसक जहाज जेएस चोकाई पर तैनात करने की भी योजना बना रहा है। इसके बाद इन मिसाइलों को सात अन्य विध्वंसक जहाजों पर भी तैनात किया जाएगा। चीन इसे जापान की आक्रामकता मानता है।
चीन से मुकाबला: जापान ने बढ़ाया रक्षा खर्च
जापान चीन को अपना मुख्य क्षेत्रीय सुरक्षा खतरा मानता है और उसने हाल के वर्षों में पूर्वी चीन सागर के निकट देश के दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों को मजबूत किया है। पीएम साने ताकाइची ने अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए 9 खरब येन (58 अरब डॉलर) से अधिक के रिकॉर्ड रक्षा बजट को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य क्रूज मिसाइलों व ड्रोन शस्त्रागारों के साथ अपनी जवाबी हमले की क्षमता और तटीय रक्षा को मजबूत करना है।
रक्षा नीति में बदलाव के संकेत
अपग्रेड की गई टाइप-12 मिसाइल की मारक क्षमता काफी अधिक होने से यह चीन की मुख्य भूमि तक पहुंच सकती है। यह क्षमता पूरे चीन को अपनी जद में ले सकती है। इससे पहले की मिसाइल सिर्फ चीन तक पहुंचने में ही सक्षम थी। यह जापान की उस आत्मरक्षा की नीति से एक बड़ा बदलाव का संकेत है जिसका वो लंबे समय से पालन करता आ रहा था। चीन ने ऐसे हथियारों का शुरू से विरोध किया है।
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