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पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष: दोनों देशों ने फिर शुरू की बातचीत, युद्ध विराम की कोशिशों में जुटा चीन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: Nirmal Kant
Updated Wed, 01 Apr 2026 03:48 PM IST
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सार
दुनिया के कई हिस्सों में जारी युद्धों के बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी संघर्ष भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि, चीन दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम कराने की कोशिश कर रहा है। पढ़िए रिपोर्ट-
पाकिस्तान-अफगानिस्तान जंग
- फोटो : एएनआई/रॉयटर्स (फाइल फोटो)
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विस्तार
पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने एक बार फिर वार्ता शुरू की है। चीन दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर रहा है और संघर्षविराम कराने की कोशिश में जुटा है। एक महीने से जारी संघर्ष को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। दो पाकिस्तानी अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
चीन की मध्यस्थता की जानकारी रखने वाले एक तीसरे व्यक्ति ने बताया कि इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य मौजूदा संघर्ष को खत्म करना है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के प्रतिनिधि उत्तरी चीन के उरुमकी शहर में बैठक कर रहे हैं। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी, क्योंकि उन्हें मीडिया से बातचीत की अनुमति नहीं दी।
हालांकि, चीन की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस घटनाक्रम की नतो पुष्टि की है और न ही इससे इनकार किया है।
दोनों देशों के बीच क्यों हो रहीं झड़पें?
अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान में हमलों की संख्या में भारी इजाफा हुआ। इसके कारण दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान आतंकियों को पनाह देता है, खासकर प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को। यह संगठन अफगान तालिबान से जुड़ा माना जाता है, जिसने 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता संभाली थी। दूसरी ओर, अफगानिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है।
ये भी पढ़ें: ईरान युद्ध में शामिल नहीं होगा ब्रिटेन: ट्रंप का साथ देने से स्टार्मर का इनकार, बोले-देश हित में करेंगे कार्य
हाल के महीनों में क्या हुआ?
कई महीनों से दोनों देशों के बीच जारी गहमागहमी के बाद फरवरी से दोनों देशों के बीच लड़ाई तेज हुई है, जो दशकों में सबसे गंभीर मानी जा रही है। इस दौरान दोनों देशों की ओर से कई बार सीमा पार हमले और हवाई हमले हुए हैं। अफगानिस्तान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने काबुल में हवाई हमले किए, जिसमें सैकड़ों आम लोग मारे गए। हालांकि, पाकिस्तान ने इस दावे को खारिज किया। दूसरी ओर, पिछले महीने पाकिस्तान ने इसे 'खुला युद्ध' जैसा बताया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है, क्योंकि इस क्षेत्र में अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (आईएस) जैसे आतंकी संगठन सक्रिय हैं।
संघर्ष रोकने की नाकाम कोशिश
हाल ही में सऊदी अरब, तुर्किये और कतर की मध्यस्थता से ईद-उल-फितर से पहले एक अस्थायी युद्ध विराम हुआ था। लेकिन वह टूट गया। फिर से लड़ाई शुरू हुई। शांति वार्ता नवंबर में इस्तांबुल में हुई थी। लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। अब चीन मध्यस्थता कर संघर्षविराम कराने की कोशिश कर रहा है।
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चीन की मध्यस्थता की जानकारी रखने वाले एक तीसरे व्यक्ति ने बताया कि इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य मौजूदा संघर्ष को खत्म करना है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के प्रतिनिधि उत्तरी चीन के उरुमकी शहर में बैठक कर रहे हैं। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी, क्योंकि उन्हें मीडिया से बातचीत की अनुमति नहीं दी।
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हालांकि, चीन की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस घटनाक्रम की नतो पुष्टि की है और न ही इससे इनकार किया है।
दोनों देशों के बीच क्यों हो रहीं झड़पें?
अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान में हमलों की संख्या में भारी इजाफा हुआ। इसके कारण दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान आतंकियों को पनाह देता है, खासकर प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को। यह संगठन अफगान तालिबान से जुड़ा माना जाता है, जिसने 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता संभाली थी। दूसरी ओर, अफगानिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है।
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हाल के महीनों में क्या हुआ?
कई महीनों से दोनों देशों के बीच जारी गहमागहमी के बाद फरवरी से दोनों देशों के बीच लड़ाई तेज हुई है, जो दशकों में सबसे गंभीर मानी जा रही है। इस दौरान दोनों देशों की ओर से कई बार सीमा पार हमले और हवाई हमले हुए हैं। अफगानिस्तान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने काबुल में हवाई हमले किए, जिसमें सैकड़ों आम लोग मारे गए। हालांकि, पाकिस्तान ने इस दावे को खारिज किया। दूसरी ओर, पिछले महीने पाकिस्तान ने इसे 'खुला युद्ध' जैसा बताया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है, क्योंकि इस क्षेत्र में अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (आईएस) जैसे आतंकी संगठन सक्रिय हैं।
संघर्ष रोकने की नाकाम कोशिश
हाल ही में सऊदी अरब, तुर्किये और कतर की मध्यस्थता से ईद-उल-फितर से पहले एक अस्थायी युद्ध विराम हुआ था। लेकिन वह टूट गया। फिर से लड़ाई शुरू हुई। शांति वार्ता नवंबर में इस्तांबुल में हुई थी। लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। अब चीन मध्यस्थता कर संघर्षविराम कराने की कोशिश कर रहा है।