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कर्नाटक हाई कोर्ट की पुलिस को फटकार: जस्टिस नागप्रसन्ना बोले- गायों के पीछे नहीं, असली अपराधियों को पकड़ें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: Pavan Updated Mon, 27 Apr 2026 04:21 PM IST
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सार

कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल, जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस असली अपराधियों को पकड़े न  गायब हुई गायों के पीछे जाए। न्यायालय का जोर इस बात पर है कि संसाधनों और समय का उपयोग ऐसे मामलों में होना चाहिए जो समाज के लिए अधिक महत्वपूर्ण हों और जिनमें जनता की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित किया जा सके। 

Karnataka High Court slams state police: Justice M Nagaprasanna says- Go after real crimes, not missing cows
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायालय ने कहा है कि पुलिस को छोटे-मोटे मामलों में उलझे रहने के बजाय वास्तविक और गंभीर अपराधों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें दो साल पहले दो गायों के लापता होने के आरोप में एक परिवार के चार सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।
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क्या मामला और न्यायालय की चिंता?
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्न की एकल पीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि पुलिस ने दो साल पहले लापता हुई दो गायों के मामले में एक आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। न्यायमूर्ति नागप्रसन्न ने राज्य के वकील से कहा, 'गाय की जांच छोड़िए। वास्तविक अपराधों के पीछे जाइए। आपने यह मामला क्यों दर्ज किया? इस आरोप पर कि दो साल पहले दो गायें लापता हो गई थीं, आपने मामला दर्ज कर लिया।'
  • न्यायाधीश ने आगे कहा कि जब गंभीर अपराधों की शिकायतें दर्ज करने की बात आती है तो पुलिस उतनी सक्रियता नहीं दिखाती।
  • उन्होंने टिप्पणी की, 'वास्तविक अपराधों को आप दर्ज नहीं करते। वास्तविक अपराध दर्ज कराने के लिए उन्हें पुलिस स्टेशन के दरवाजे को सौ बार खटखटाना पड़ता है। दो गायें दो साल पहले लापता हो गईं और एक मामला दर्ज हो गया।'
  • यह मामला एक परिवार द्वारा दायर उस याचिका पर सुना जा रहा था, जिसमें उन पर पिछले महीने दर्ज की गई आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की गई थी। यह मामला 2024 में दो गायों के लापता होने से संबंधित था।

कानून के दुरुपयोग का मामला और जांच पर रोक
न्यायालय ने देखा कि पुलिस द्वारा दर्ज किया गया यह मामला कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग था और न्यायालय ने पुलिस जांच पर अंतरिम रोक लगा दी। न्यायालय ने कहा, '2024 में दो गायें लापता हो जाती हैं। पूरा परिवार 2026 में दर्ज किए गए अपराध के जाल में फंस जाता है क्योंकि गायों का पता नहीं चला था। यदि इसकी अनुमति दी जाती है, तो यह स्पष्ट रूप से कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसलिए, आगे की जांच पर अंतरिम रोक का आदेश दिया जाएगा।' न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस वास्तविक अपराधों को दर्ज नहीं करती, जबकि दो साल पहले लापता हुई गायों के मामले में कार्रवाई करती है।

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पुलिस की प्राथमिकता पर पहले भी उठाए गए सवाल
यह टिप्पणी उसी पीठ द्वारा कुछ दिनों पहले की गई टिप्पणियों के कुछ ही दिनों बाद आई है, जिसमें न्यायालय ने हल्के-फुल्के ढंग से कहा था कि कर्नाटक पुलिस वास्तविक अपराधों की जांच करने के बजाय लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों की जांच करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है। यह टिप्पणी तब की गई थी जब न्यायालय बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें फिल्म 'कांतारा' में चामुंडी दैवा के चित्रण की मिमिक्री को लेकर उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की गई थी। जब एक वकील ने न्यायालय को बताया कि कर्नाटक पुलिस रणवीर सिंह को चामुंडी मंदिर की यात्रा के दौरान किसी भी खतरे से बचाने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली है, तो न्यायमूर्ति नागप्रसन्न ने जवाब दिया था, 'इतने शक्तिशाली कि वे लिव-इन रिलेशनशिप के पीछे जाते हैं, वे जोड़ों के पीछे जाते हैं। वास्तविक अपराध की जांच नहीं हो रही है। केवल (धारा) 69 (बीएनएस) (मामले उनके द्वारा लिए जा रहे हैं) हैं।'

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