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PoK: पाक सेना की बर्बरता पर भड़के कश्मीरी अलगाववादी, पीओके में जारी हिंसा और मौतों की स्वतंत्र जांच की मांग

आशुतोष भाटिया Published by: Devesh Tripathi Updated Wed, 17 Jun 2026 04:27 AM IST
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सार

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन को लेकर असंतोष अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मुखर होने लगा है। कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन के अध्यक्ष डॉ. मुबीन शाह ने वहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई, गिरफ्तारियों और मौतों के लिए पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया है।

Kashmiri separatists outraged by Pakistan Army s brutality in PoK demand independent probe over violence death
पीओके में प्रदर्शनाकारियों पर पाकिस्तानी सेना की बर्बरता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जारी मानवाधिकार हनन ने अब उन लोगों को भी हिला दिया है, जो दशकों से अलगाववादी रवैया रखते आए हैं। कश्मीर घाटी के प्रमुख अलगाववादी हलकों से जुड़े रहे और फिलहाल कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन  के अध्यक्ष डॉ. मुबीन शाह ने पीओके में जारी हिंसा, गिरफ्तारियों और मौतों के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान सरकार और सेना को कठघरे में खड़ा किया है।


डॉ. शाह ने गहरा आक्रोश जताया है कि पाकिस्तानी हुकूमत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए दमनकारी रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि भारतीय जम्मू-कश्मीर के कश्मीरी नेताओं ने हमेशा एक नीति के तहत खुद को पीओके की स्थानीय राजनीति से दूर रखा था ताकि मूल मुद्दा न भटके। लेकिन आज वहां निर्दोषों की मौतें और अंधाधुंध गिरफ्तारियां बेहद दर्दनाक हैं।
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उन्होंने कहा कि कश्मीरियों के लिए यह इलाका महज जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उम्मीद, सुरक्षा, शरणस्थली और कश्मीरी संघर्ष का बेस कैंप था। लेकिन आज उसी बेस कैंप में पाकिस्तानी सुरक्षा बल अपने ही लोगों के खिलाफ बल प्रयोग कर रहे हैं, जिससे नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ कश्मीरियों में भारी गुस्सा है।
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कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन
वैश्विक स्तर पर सक्रिय छह प्रमुख कश्मीरी प्रवासी संगठनों का संयुक्त अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसकी स्थापना अक्तूबर 2022 में बाकू, अजरबैजान में की गई थी। इसमें अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, तुर्की और यूरोपीय संघ में स्थित संगठन शामिल हैं। जो एक साझा मंच से अपनी गतिविधियां चलाते हैं। यह कोएलिशन संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत कश्मीर के लिए आत्मनिर्णय के अधिकार की वकालत करता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंचों के समक्ष भारत सरकार की कश्मीरी नीतियों तथा धारा 370 को हटाए जाने के फैसले का कड़ा विरोध करता है।

अवामी एक्शन कमेटी ने सौंपा 12 सूत्रीय मांग पत्र
पीओके में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के आंदोलन का खुला समर्थन करते हुए इन संगठनों ने पाकिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने एक साझा मांग पत्र रखा है। इसमें पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। साथ ही मांग की है कि पाकिस्तानी रेंजर्स और सेना हिंसक कार्रवाई तुरंत रोकें। अत्यधिक बल प्रयोग और मौतों की एक स्वतंत्र और विश्वसनीय जांच कराई जाए ताकि दोषियों की जवाबदेही तय हो सके। मुबीन चाहते हैं कि पाकिस्तानी प्रशासन छुपाए जा रहे मौतों और अवैध हिरासत में लिए गए लोगों के आंकड़े जनता के सामने रखे।

शरणार्थी विरोधी साजिश बंद हो
पीओके विधानसभा सीटों में मनमाने प्रशासनिक सुधारों के नाम पर कश्मीरी शरणार्थी समुदायों को हाशिए पर धकेलने की साजिश बंद की जाए। स्थानीय आर्थिक और सांविधानिक मांगों को बंदूकों के दम पर कुचलने की कोशिशें केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करेंगी।
पाकिस्तान के लिए झटका...मुबीन शाह जैसे नेताओं का यह बयान इस्लामाबाद और रावलपिंडी के लिए बड़ा झटका है। साफ है कि पीओके का संकट अब केवल स्थानीय महंगाई का नहीं, बल्कि पाकिस्तान के दमन के खिलाफ एक बड़े जन-विद्रोह का रूप ले चुका है।
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