क्या अब थम जाएगा यूक्रेन-रूस संघर्ष?: ट्रंप के शांति वार्ता प्रस्ताव पर मॉस्को सहमत; लेकिन कीव पर लगाए ये आरोप
रूस ने यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए चल रही शांति वार्ता को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख का समर्थन किया है। क्रेमलिन ने गुरुवार को कहा कि वह ट्रंप के इस आकलन से सहमत है कि यूक्रेन शांति समझौते की राह में बाधा बन रहा है। इस पर यूरोप की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। पोलैंड के राष्ट्रपति ने इसके लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है।
ट्रंप के बयान पर रूस
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, हां, हम इससे सहमत हो सकते हैं... वाकई ऐसा ही है। उनकी यह टिप्पणी ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को अमेरिकी नेतृत्व वाली शांति वार्ता में अड़चन बताया था।
रूस का यह रुख यूरोपीय नेताओं से अलग है। यूरोपीय नेता लगातार राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर बातचीत में देरी करने का आरोप लगाते रहे हैं। उनका कहना है कि एक ओर रूस बातचीत टाल रहा है, तो दूसरी ओर उसकी सेना यूक्रेन के भीतर और आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है और यूक्रेनी शहरों पर लगातार हमले हो रहे हैं।
ट्रंप ने जेलेंस्की पर लगाए आरोप
रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, मुझे लगता है कि पुतिन समझौता करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यूक्रेन इसके लिए कम तैयार दिखता है। उन्होंने जेलेंस्की को समझौते में बाधा डालने वाला करार दिया। ट्रंप के इस बयान पर यूरोप की ओर से तीखी प्रतिक्रिया भी सामने आई है। पोलैंड के प्रधानमंत्री टस्क ने एक्स पर लिखा, अमेरिका द्वारा तैयार की गई शांति योजना को रूस ने खारिज किया है, जेलेंस्की ने नहीं। इस बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी गुरुवार को संकेत दिए कि किसी भी संभावित शांति समझौते में रूस सुरक्षा गारंटी की मांग करेगा।
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क्रेमलिन में विदेशी राजदूतों से मुलाकात के दौरान पुतिन ने कहा, सुरक्षा सार्वभौमिक, समान और अविभाज्य होनी चाहिए। किसी की सुरक्षा दूसरों की कीमत पर सुनिश्चित नहीं की जा सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो रूस अपने तय लक्ष्यों को हासिल करता रहेगा।
हालाकि अमेरिकी प्रशासन का इस मुद्दे पर रुख ट्रंप के विपरीत है। अमेरिका ने सोमवार को रूस पर आरोप लगाया था कि वह युद्ध को खतरनाक और समझ से बाहर तरीके से बढ़ा रहा है, जबकि ट्रंप प्रशासन शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ ने भी कहा था कि क्रेमलिन महीनों से जानबूझकर शांति प्रक्रिया में देरी कर रहा है, ताकि युद्ध को लंबा खींचकर अपने सैन्य लक्ष्य हासिल किए जा सकें।
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