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Delhi: शराब नीति, डीटीसी बस से क्लासरूम घोटाले और जासूसी कांड तक, जानें केजरीवाल सरकार पर कितने आरोप लगे?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Mon, 27 Feb 2023 12:05 AM IST
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अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार लगातार आरोपों में घिर रही है। नई शराब नीति को लेकर लगे केजरीवाल के सबसे खास और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सीबीआई ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। सिसोदिया से सीबीआई ने आठ घंटे की लंबी पूछताछ की। सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद से सियासी गलियारे में हलचल तेज हो गई है।ऐसा नहीं है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार पर केवल शराब घोटाले का ही आरोप है। इसके पहले भी कई तरह के आरोप केजरीवाल सरकार पर लग चुके हैं और अभी सभी मामलों में जांच जारी है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि अखिर दिल्ली सरकार पर किस-किस तरह के आरोप लग चुके हैं? दिल्ली सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा?
शुरुआत शराब घोटाले को लेकर करते हैं
17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने राज्य में नई शराब नीति लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए और हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह से कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं। नई शराब नीति में दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया। इसके पहले दिल्ली में शराब की 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40 प्रतिशत प्राइवेट थीं। नई पॉलिसी लागू होने के बाद 100 प्रतिशत प्राइवेट हो गईं। सरकार ने तर्क दिया था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का फायदा होगा। इस मामले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया खुद फंसे हुए हैं। उनके घर सीबीआई का छापा भी पड़ चुका है। आज उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया।
वहीं, भाजपा ने नई शराब नीति से जनता और सरकार दोनों को नुकसान होने का आरोप लगाया। बड़े शराब कारोबारियों को फायदा होने की बात भी कही।
1. लाइसेंस फीस में भारी इजाफा करके बड़े कारोबारियों को लाभ पहुंचाने का आरोप : पहले जिस लाइसेंस की फीस 25 लाख रुपये थी, उसे बढ़ाकर पांच करोड़ कर दिया गया। आरोप है कि दिल्ली सरकार ने जानबूझकर बड़े शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाइसेंस शुल्क बढ़ाया। इससे छोटे ठेकेदारों की दुकानें बंद हो गईं और बाजार में केवल बड़े शराब माफियाओं को लाइसेंस मिला। विपक्ष का आरोप ये भी है कि इसके एवज में आप के नेताओं और अफसरों को शराब माफियाओं ने मोटी रकम घूस के तौर पर दी।
2. खुदरा बिक्री में सरकारी राजस्व में भारी कमी होने का आरोप : दूसरा आरोप शराब की बिक्री को लेकर है। उदाहरण के लिए मान लीजिए पहले अगर 750 एमएल की एक शराब की बोतल 530 रुपये में मिलती थी। तब इस एक बोतल पर रिटेल कारोबारी को 33.35 रुपये का मुनाफा होता था, जबकि 223.89 रुपये उत्पाद कर और 106 रुपये वैट के रूप में सरकार को मिलता था। मतलब एक बोतल पर सरकार को 329.89 रुपये का फायदा मिलता था। नई शराब नीति से सरकार के इसी मुनाफे में खेल होने दावा किया जा रहा है। दावा है कि नई शराब नीति में वही 750 एमएल वाली शराब की बोतल का दाम 530 रुपये से बढ़कर 560 रुपये हो गई। इसके अलावा रिटेल कारोबारी का मुनाफा भी 33.35 रुपये से बढ़कर सीधे 363.27 रुपये पहुंच गया। मतलब रिटेल कारोबारियों का फायदा 10 गुना से भी ज्यादा बढ़ गया। वहीं, सरकार को मिलने वाला 329.89 रुपये का फायदा घटकर तीन रुपये 78 पैसे रह गया। इसमें 1.88 रुपये उत्पाद शुल्क और 1.90 रुपये वैट शामिल है।
17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने राज्य में नई शराब नीति लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए और हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह से कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं। नई शराब नीति में दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया। इसके पहले दिल्ली में शराब की 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40 प्रतिशत प्राइवेट थीं। नई पॉलिसी लागू होने के बाद 100 प्रतिशत प्राइवेट हो गईं। सरकार ने तर्क दिया था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का फायदा होगा। इस मामले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया खुद फंसे हुए हैं। उनके घर सीबीआई का छापा भी पड़ चुका है। आज उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया।
वहीं, भाजपा ने नई शराब नीति से जनता और सरकार दोनों को नुकसान होने का आरोप लगाया। बड़े शराब कारोबारियों को फायदा होने की बात भी कही।
1. लाइसेंस फीस में भारी इजाफा करके बड़े कारोबारियों को लाभ पहुंचाने का आरोप : पहले जिस लाइसेंस की फीस 25 लाख रुपये थी, उसे बढ़ाकर पांच करोड़ कर दिया गया। आरोप है कि दिल्ली सरकार ने जानबूझकर बड़े शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाइसेंस शुल्क बढ़ाया। इससे छोटे ठेकेदारों की दुकानें बंद हो गईं और बाजार में केवल बड़े शराब माफियाओं को लाइसेंस मिला। विपक्ष का आरोप ये भी है कि इसके एवज में आप के नेताओं और अफसरों को शराब माफियाओं ने मोटी रकम घूस के तौर पर दी।
2. खुदरा बिक्री में सरकारी राजस्व में भारी कमी होने का आरोप : दूसरा आरोप शराब की बिक्री को लेकर है। उदाहरण के लिए मान लीजिए पहले अगर 750 एमएल की एक शराब की बोतल 530 रुपये में मिलती थी। तब इस एक बोतल पर रिटेल कारोबारी को 33.35 रुपये का मुनाफा होता था, जबकि 223.89 रुपये उत्पाद कर और 106 रुपये वैट के रूप में सरकार को मिलता था। मतलब एक बोतल पर सरकार को 329.89 रुपये का फायदा मिलता था। नई शराब नीति से सरकार के इसी मुनाफे में खेल होने दावा किया जा रहा है। दावा है कि नई शराब नीति में वही 750 एमएल वाली शराब की बोतल का दाम 530 रुपये से बढ़कर 560 रुपये हो गई। इसके अलावा रिटेल कारोबारी का मुनाफा भी 33.35 रुपये से बढ़कर सीधे 363.27 रुपये पहुंच गया। मतलब रिटेल कारोबारियों का फायदा 10 गुना से भी ज्यादा बढ़ गया। वहीं, सरकार को मिलने वाला 329.89 रुपये का फायदा घटकर तीन रुपये 78 पैसे रह गया। इसमें 1.88 रुपये उत्पाद शुल्क और 1.90 रुपये वैट शामिल है।
डीटीसी बस की खरीददारी को लेकर लगे आरोप
दरअसल, दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना के कार्यालय में पिछले साल एक शिकायत आई थी। इसमें दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी द्वारा एक हजार लो-फ्लोर बसों की खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। मामले ने तूल पकड़ा तो मुख्य सचिव ने इसकी जांच की। इसमें अनियमितता मिलने पर मुख्य सचिव ने सीबीआई से जांच कराने का प्रस्ताव उप-राज्यपाल को दिया। जिसे उप-राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है।
शिकायत में दावा किया गया है कि दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने “पूर्व नियोजित तरीके से” परिवहन मंत्री को बसों की निविदा व खरीद के लिए गठित समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया। शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया कि इस निविदा के लिए बोली प्रबंधन सलाहकार के रूप में डीआईएमटीएस की नियुक्ति गलत कामों को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से की गई।
आरोप है कि एक हजार लो फ्लोर बीएस-4 और बीएस-6 बसों के लिए जुलाई 2019 की खरीद बोली लगी। इसके बाद मार्च 2020 में लो फ्लोर बीएस-6 बसों की खरीद व वार्षिक रखरखाव के लिए दूसरी बोली लगी। इन दोनों में अनियमितताएं हुईं हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक षडयंत्र बताया। पार्टी ने कहा कि भाजपा जानबूझकर झूठे आरोप लगाकर आप को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
दरअसल, दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना के कार्यालय में पिछले साल एक शिकायत आई थी। इसमें दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी द्वारा एक हजार लो-फ्लोर बसों की खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। मामले ने तूल पकड़ा तो मुख्य सचिव ने इसकी जांच की। इसमें अनियमितता मिलने पर मुख्य सचिव ने सीबीआई से जांच कराने का प्रस्ताव उप-राज्यपाल को दिया। जिसे उप-राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है।
शिकायत में दावा किया गया है कि दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने “पूर्व नियोजित तरीके से” परिवहन मंत्री को बसों की निविदा व खरीद के लिए गठित समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया। शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया कि इस निविदा के लिए बोली प्रबंधन सलाहकार के रूप में डीआईएमटीएस की नियुक्ति गलत कामों को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से की गई।
आरोप है कि एक हजार लो फ्लोर बीएस-4 और बीएस-6 बसों के लिए जुलाई 2019 की खरीद बोली लगी। इसके बाद मार्च 2020 में लो फ्लोर बीएस-6 बसों की खरीद व वार्षिक रखरखाव के लिए दूसरी बोली लगी। इन दोनों में अनियमितताएं हुईं हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक षडयंत्र बताया। पार्टी ने कहा कि भाजपा जानबूझकर झूठे आरोप लगाकर आप को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
टॉयलेट को क्लासरूम दिखाने का आरोप
दिल्ली सरकार पर तीसरा आरोप स्कूलों को लेकर लगा लगा है। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि दिल्ली के स्कूलों से पैसा कमाने के लिए अरविंद केजरीवाल की सरकार ने घोटाला किया है। दिल्ली के स्कूलों में 2400 कमरों की जरुरत थी, लेकिन इसको बढ़ाकर 7180 कमरें कर दिए गए। कंस्ट्रक्शन राशि को 50 से 90 फीसदी तक बढ़ाया गया।
बढ़ी हुई लागत के बाद 6133 क्लासरूम बनने थे, लेकिन सिर्फ 4027 क्लासरुम ही बनाए गए। स्कूलों में 160 शौचालय की जरुरत है लेकिन केजरीवाल सरकार ने बताया कि 1214 शौचालयों की जरुरत है। ऐसे में केजरीवाल सरकार ने स्कूलों के शौचालयों की गिनती भी क्लासरूम में करा दी, ताकि पैसा बन जाए।
गौरव भाटिया ने कहा कि शौचालय को भी स्कूल के कमरों में गिनती करवाकर केजरीवाल ना ही सिर्फ दिल्ली के बच्चों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं बल्कि टैक्स पेयर्स के पैसों को भी लूटने का काम कर रहे हैं। भाजपा का दावा है कि आप सरकार 29 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने की बात करती रही लेकिन सिर्फ दो ही बनवाए। बाकी 27 भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए।
आम आदमी पार्टी ने इस आरोपों का भी खंडन किया। कहा कि दिल्ली के स्कूल मॉडल की डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। इसे भाजपा पचा नहीं पा रही है। इसलिए इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
दिल्ली सरकार पर तीसरा आरोप स्कूलों को लेकर लगा लगा है। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि दिल्ली के स्कूलों से पैसा कमाने के लिए अरविंद केजरीवाल की सरकार ने घोटाला किया है। दिल्ली के स्कूलों में 2400 कमरों की जरुरत थी, लेकिन इसको बढ़ाकर 7180 कमरें कर दिए गए। कंस्ट्रक्शन राशि को 50 से 90 फीसदी तक बढ़ाया गया।
बढ़ी हुई लागत के बाद 6133 क्लासरूम बनने थे, लेकिन सिर्फ 4027 क्लासरुम ही बनाए गए। स्कूलों में 160 शौचालय की जरुरत है लेकिन केजरीवाल सरकार ने बताया कि 1214 शौचालयों की जरुरत है। ऐसे में केजरीवाल सरकार ने स्कूलों के शौचालयों की गिनती भी क्लासरूम में करा दी, ताकि पैसा बन जाए।
गौरव भाटिया ने कहा कि शौचालय को भी स्कूल के कमरों में गिनती करवाकर केजरीवाल ना ही सिर्फ दिल्ली के बच्चों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं बल्कि टैक्स पेयर्स के पैसों को भी लूटने का काम कर रहे हैं। भाजपा का दावा है कि आप सरकार 29 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने की बात करती रही लेकिन सिर्फ दो ही बनवाए। बाकी 27 भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए।
आम आदमी पार्टी ने इस आरोपों का भी खंडन किया। कहा कि दिल्ली के स्कूल मॉडल की डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। इसे भाजपा पचा नहीं पा रही है। इसलिए इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में स्वास्थ्य मंत्री पहले से जेल में
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पिछले 30 मई से जेल में हैं। उनपर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने गलत तरीके से कृषि भूमि भी खरीदी है। इस मामले में अभी भी जांच जारी है। हालांकि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार सत्येंद्र जैन को ईमानदार बता रहे हैं। केजरीवाल का दावा है कि जैन के ऊपर राजनीतिक षडयंत्र के तहत आरोप लगाए गए हैं। जेल में ही सत्येंद्र जैन को विशेष सुविधाएं देने का भी आरोप केजरीवाल सरकार पर लग चुका है। जेल के कई वीडियो सामने आए, जिसमें सत्येंद्र जैन की मालिश की जा रही है।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पिछले 30 मई से जेल में हैं। उनपर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने गलत तरीके से कृषि भूमि भी खरीदी है। इस मामले में अभी भी जांच जारी है। हालांकि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार सत्येंद्र जैन को ईमानदार बता रहे हैं। केजरीवाल का दावा है कि जैन के ऊपर राजनीतिक षडयंत्र के तहत आरोप लगाए गए हैं। जेल में ही सत्येंद्र जैन को विशेष सुविधाएं देने का भी आरोप केजरीवाल सरकार पर लग चुका है। जेल के कई वीडियो सामने आए, जिसमें सत्येंद्र जैन की मालिश की जा रही है।
जासूसी कांड में भी फंसे हैं मनीष सिसोदिया
2015 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी और अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने तो दिल्ली सरकार ने एक फीडबैक यूनिट (एफबीयू) बनाई। इसका काम विभागों, संस्थानों, स्वतंत्र संस्थानों की निगरानी करना था और यहां के कामकाज पर प्रभावी फीडबैक देना था, ताकि इस आधार पर जरूरी सुधारों का एक्शन लिया जा सके। लेकिन आरोप है कि दिल्ली सरकार के इशारे पर इस फीडबैक यूनिट ने विपक्षी दलों के नेताओं की जासूसी करनी शुरू कर दी। कई नेताओं के कामकाज पर नजर रखी जाने लगी।
2016 में विजिलेंस डिपार्टमेंट में काम कर रहे एक अफसर ने इसकी शिकायत सीबीआई से की। इसके बाद गुप्त तरीके से सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू कर दी। 12 जनवरी 2023 को सीबीआई ने विजिलेंस डिपार्टमेंट में रिपोर्ट दाखिल की। एजेंसी ने उप-राज्यपाल वीके सक्सेना से दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की। सीबीआई ने 2016 में विजिलेंस डायरेक्टर रहे सुकेश कुमार जैन और कई अन्य पर केस दर्ज करने की इजाजत मांगी है। सूत्रों के मुताबिक उपराज्यपाल सक्सेना ने अब इस मामले को राष्ट्रपति के पास भेज दिया है।
सीबीआई की जांच में क्या-क्या पाया?
1. सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया है कि फीडबैक यूनिट (एफबीयू) को जो काम दिया गया था, वह उसके अलावा खुफिया राजनीतिक जानकारियां जुटाने में भी जुटी थी। वह किसी व्यक्ति की राजनीतिक गतिविधियों, उससे जुड़े संस्थानों और आम आदमी पार्टी के राजनीतिक फायदे वाले मुद्दों के लिए जानकारी जुटाने लगी थी।
2. एफबीयू ने कुल 700 केसों की जांच की। इनमें 60% राजनीतिक निकले। जिनका सरकार के कामकाज से कोई लेनादेना नहीं था। सीबीआई के अनुसार, अभी यह साफ नहीं कि एफबीयू अभी भी एक्टिव है या नहीं।
3. सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी खजाने में नुकसान का भी जिक्र किया। एजेंसी की मानें तो फीडबैक यूनिट के गठन और काम करने के गैरकानूनी तरीके से सरकारी खजाने को लगभग 36 लाख रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई ने कहा था कि किसी अधिकारी या विभाग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
4. सीबीआई रिपोर्ट के मुताबिक, एफबीयू की स्थापना के लिए कोई प्रारंभिक मंजूरी नहीं ली गई थी, लेकिन अगस्त 2016 में सतर्कता विभाग ने अनुमोदन के लिए फाइल तत्कालीन एलजी नजीब जंग के पास भेजी थी। जंग ने दो बार फाइल को खारिज कर दिया।
2015 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी और अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने तो दिल्ली सरकार ने एक फीडबैक यूनिट (एफबीयू) बनाई। इसका काम विभागों, संस्थानों, स्वतंत्र संस्थानों की निगरानी करना था और यहां के कामकाज पर प्रभावी फीडबैक देना था, ताकि इस आधार पर जरूरी सुधारों का एक्शन लिया जा सके। लेकिन आरोप है कि दिल्ली सरकार के इशारे पर इस फीडबैक यूनिट ने विपक्षी दलों के नेताओं की जासूसी करनी शुरू कर दी। कई नेताओं के कामकाज पर नजर रखी जाने लगी।
2016 में विजिलेंस डिपार्टमेंट में काम कर रहे एक अफसर ने इसकी शिकायत सीबीआई से की। इसके बाद गुप्त तरीके से सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू कर दी। 12 जनवरी 2023 को सीबीआई ने विजिलेंस डिपार्टमेंट में रिपोर्ट दाखिल की। एजेंसी ने उप-राज्यपाल वीके सक्सेना से दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की। सीबीआई ने 2016 में विजिलेंस डायरेक्टर रहे सुकेश कुमार जैन और कई अन्य पर केस दर्ज करने की इजाजत मांगी है। सूत्रों के मुताबिक उपराज्यपाल सक्सेना ने अब इस मामले को राष्ट्रपति के पास भेज दिया है।
सीबीआई की जांच में क्या-क्या पाया?
1. सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया है कि फीडबैक यूनिट (एफबीयू) को जो काम दिया गया था, वह उसके अलावा खुफिया राजनीतिक जानकारियां जुटाने में भी जुटी थी। वह किसी व्यक्ति की राजनीतिक गतिविधियों, उससे जुड़े संस्थानों और आम आदमी पार्टी के राजनीतिक फायदे वाले मुद्दों के लिए जानकारी जुटाने लगी थी।
2. एफबीयू ने कुल 700 केसों की जांच की। इनमें 60% राजनीतिक निकले। जिनका सरकार के कामकाज से कोई लेनादेना नहीं था। सीबीआई के अनुसार, अभी यह साफ नहीं कि एफबीयू अभी भी एक्टिव है या नहीं।
3. सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी खजाने में नुकसान का भी जिक्र किया। एजेंसी की मानें तो फीडबैक यूनिट के गठन और काम करने के गैरकानूनी तरीके से सरकारी खजाने को लगभग 36 लाख रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई ने कहा था कि किसी अधिकारी या विभाग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
4. सीबीआई रिपोर्ट के मुताबिक, एफबीयू की स्थापना के लिए कोई प्रारंभिक मंजूरी नहीं ली गई थी, लेकिन अगस्त 2016 में सतर्कता विभाग ने अनुमोदन के लिए फाइल तत्कालीन एलजी नजीब जंग के पास भेजी थी। जंग ने दो बार फाइल को खारिज कर दिया।