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Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव में इस रणनीति पर काम करेगी BJP, हिमाचल-कर्नाटक में मिली हार के बाद हुआ बदलाव?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Tue, 13 Jun 2023 05:24 PM IST
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अमर उजाला
विस्तार
अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर देशभर में सियासत गर्म है। विपक्ष एकजुट होकर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। भाजपा भी अलग रणनीति तैयार करने में जुटी है। पार्टी ने कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में मिली हार के बाद अपनी रणनीति में बदलाव करने का भी फैसला लिया है।अब दक्षिण, उत्तर और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अलग-अलग रणनीति पर भाजपा काम करेगी। आइए जानते हैं भारतीय जनता पार्टी ने किन-किन रणनीतियों पर काम करना शुरू किया है? आखिर पार्टी को क्यों बदलनी पड़ी पुरानी रणनीति?
किस रणनीति पर काम कर रही भाजपा?
इसे समझने के लिए हमने राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, 'इस वक्त हर कोई लोकसभा और आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए काम कर रहा है। पिछले कुछ चुनाव के नतीजों को देखते हुए पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। संघ की चेतावनी का भी असर पड़ा है। यही कारण है कि अब भाजपा ने चार अलग-अलग रणनीति तैयार की है।'
इसे समझने के लिए हमने राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, 'इस वक्त हर कोई लोकसभा और आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए काम कर रहा है। पिछले कुछ चुनाव के नतीजों को देखते हुए पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। संघ की चेतावनी का भी असर पड़ा है। यही कारण है कि अब भाजपा ने चार अलग-अलग रणनीति तैयार की है।'
1. उत्तर, दक्षिण और पूर्वोत्तर के लिए अलग-अलग रणनीति: पार्टी ने उत्तर, दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अलग-अलग रणनीति पर काम करने का फैसला लिया है। पार्टी की रणनीति क्षेत्रीय मुद्दों के हिसाब से होगी। हालांकि, कुछ ऐसे भी मुद्दे रहेंगे जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा।
2. हिंदुत्व और जातिगत मुद्दे का भी आधार: उत्तर भारत में हिंदुत्व का मुद्दा काफी मददगार साबित हो सकता है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, उत्तराखंड जैसे राज्यों में हिंदुत्व के सहारे पार्टी आगे बढ़ेगी। कुछ राज्यों में जातिगत मुद्दों को भी उठाया जाएगा।
3. केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों को पार्टी से जोड़ने की कोशिश: ये भी एक बड़ा कदम है। 2014 के बाद से अब तक केंद्र सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं के करोड़ों लाभार्थी हैं। पार्टी इन लाभार्थियों को एक अलग वोटबैंक बनाने में जुटी है। इन लाभार्थियों से पार्टी के कार्यकर्ता लगातार संपर्क में रहेंगे और उन्हें भाजपा से जोड़ने की कोशिश करेंगे।
4. केंद्र और राज्य सरकार के सभी मंत्री क्षेत्र में करेंगे प्रवास: केंद्र और भाजपा शासित सभी राज्यों के मंत्रियों को क्षेत्र में प्रवास करने के लिए कहा गया है। पार्टी के अंदर के सारे मतभेद को भी दूर करने के लिए कहा गया है।
5. छोटे दलों को साथ लाने की कोशिश: पार्टी ने अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग छोटे दलों को साथ लाने का भी फैसला किया है। इसके अलावा पुराने सहयोगियों से भी पार्टी संपर्क में है। इसके जरिए भाजपा विपक्ष के गठबंधन को चुनौती देगी।
2. हिंदुत्व और जातिगत मुद्दे का भी आधार: उत्तर भारत में हिंदुत्व का मुद्दा काफी मददगार साबित हो सकता है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, उत्तराखंड जैसे राज्यों में हिंदुत्व के सहारे पार्टी आगे बढ़ेगी। कुछ राज्यों में जातिगत मुद्दों को भी उठाया जाएगा।
3. केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों को पार्टी से जोड़ने की कोशिश: ये भी एक बड़ा कदम है। 2014 के बाद से अब तक केंद्र सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं के करोड़ों लाभार्थी हैं। पार्टी इन लाभार्थियों को एक अलग वोटबैंक बनाने में जुटी है। इन लाभार्थियों से पार्टी के कार्यकर्ता लगातार संपर्क में रहेंगे और उन्हें भाजपा से जोड़ने की कोशिश करेंगे।
4. केंद्र और राज्य सरकार के सभी मंत्री क्षेत्र में करेंगे प्रवास: केंद्र और भाजपा शासित सभी राज्यों के मंत्रियों को क्षेत्र में प्रवास करने के लिए कहा गया है। पार्टी के अंदर के सारे मतभेद को भी दूर करने के लिए कहा गया है।
5. छोटे दलों को साथ लाने की कोशिश: पार्टी ने अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग छोटे दलों को साथ लाने का भी फैसला किया है। इसके अलावा पुराने सहयोगियों से भी पार्टी संपर्क में है। इसके जरिए भाजपा विपक्ष के गठबंधन को चुनौती देगी।
पार्टी ने क्यों बदली रणनीति?
प्रो. अजय कुमार सिंह कहते हैं, '2014 के बाद से भाजपा ने भ्रष्टाचार, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के सहारे ही कई चुनावों में बड़ी जीत हासिल की। अब जनता पुराने मुद्दों की बजाय नए मुद्दों पर बात करना चाहती है। सरकार से रिजल्ट चाहती है। विकास कार्यों और उन मसलों पर जवाब चाहती है, जिनके सहारे पार्टी ने सत्ता हासिल की थी। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में भाजपा को हार का सामना भी करना पड़ा। अब पार्टी ने इन हार से सबक लेते हुए रणनीति बदलने का फैसला ले लिया है। पिछले दिनों संघ ने भी अपने एक लेख में इसका जिक्र किया था।'
प्रो. अजय के मुताबिक, 'उत्तर भारत में हिंदुत्व और मोदी का चेहरा काम कर जाता है, लेकिन दक्षिण में स्थिति अलग है। दक्षिण में मोदी का चेहरा तो लोग पसंद करते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर भी वह बात करना चाहते हैं। यही कारण है कि अब भाजपा ने स्थानीय मुद्दों को आगे रखकर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है।'
प्रो. अजय कुमार सिंह कहते हैं, '2014 के बाद से भाजपा ने भ्रष्टाचार, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के सहारे ही कई चुनावों में बड़ी जीत हासिल की। अब जनता पुराने मुद्दों की बजाय नए मुद्दों पर बात करना चाहती है। सरकार से रिजल्ट चाहती है। विकास कार्यों और उन मसलों पर जवाब चाहती है, जिनके सहारे पार्टी ने सत्ता हासिल की थी। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में भाजपा को हार का सामना भी करना पड़ा। अब पार्टी ने इन हार से सबक लेते हुए रणनीति बदलने का फैसला ले लिया है। पिछले दिनों संघ ने भी अपने एक लेख में इसका जिक्र किया था।'
प्रो. अजय के मुताबिक, 'उत्तर भारत में हिंदुत्व और मोदी का चेहरा काम कर जाता है, लेकिन दक्षिण में स्थिति अलग है। दक्षिण में मोदी का चेहरा तो लोग पसंद करते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर भी वह बात करना चाहते हैं। यही कारण है कि अब भाजपा ने स्थानीय मुद्दों को आगे रखकर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है।'