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अल्पसंख्यक बहुल इलाके भी भगवामय: आंकड़ों ने पलटा नैरेटिव, 146 में से 66 सीटें भाजपा के खाते में

N Arjun एन अर्जुन
Updated Thu, 07 May 2026 06:30 AM IST
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सार

अहम बात यह है कि जिन 17 सीटों पर अल्पसंख्यक वोटर 40 प्रतिशत से अधिक हैं, वहां भी भाजपा की जीत ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाया है। जंगीपुर, मुर्शिदाबाद, नवग्राम, बड़झार, मानिकचक, करणदीघी व हेमताबाद जैसे क्षेत्रों में यह बदलाव साफ दिखाई देता है, जहां पहले चुनावी गणित लगभग तय माना जाता था।

Minority dominated areas also turn saffron Data reverses narrative BJP wins 66 out of 146 seats in west bengal
तृणमूल के गढ़ में भाजपा ने लगाई सेंध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की पारंपरिक वोट बैंक राजनीति की बुनियाद को हिला दिया है। सबसे बड़ा बदलाव उन अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर दिखा है, जिन्हें लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य गढ़ माना जाता था। इस बार इन्हीं इलाकों में भाजपा ने अप्रत्याशित बढ़त बनाकर यह संकेत दिया है कि बंगाल की राजनीति अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है।


दरअसल, 294 विधानसभा सीटों में से 146 ऐसी हैं जहां अल्पसंख्यक वोटर 25 प्रतिशत या उससे अधिक हैं। ये सीटें लंबे समय से तृणमूल की जीत का आधार रही हैं। लेकिन 2026 में तस्वीर बदली, इनमें से 66 सीटें भाजपा, जबकि 73 तृणमूल को मिलीं। 2021 में भाजपा इनमें महज 16 सीटें ही जीत पाई थी। 5 साल में चौगुनी से भी ज्यादा की बढ़त सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि संरचनात्मक बदलाव का भी संकेत है।
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40% से अधिक वोट वाली सीटों पर भी बदलाव
अहम बात यह है कि जिन 17 सीटों पर अल्पसंख्यक वोटर 40 प्रतिशत से अधिक हैं, वहां भी भाजपा की जीत ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाया है। जंगीपुर, मुर्शिदाबाद, नवग्राम, बड़झार, मानिकचक, करणदीघी व हेमताबाद जैसे क्षेत्रों में यह बदलाव साफ दिखाई देता है, जहां पहले चुनावी गणित लगभग तय माना जाता था।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सिर्फ ध्रुवीकरण का नतीजा नहीं है। स्थानीय मुद्दे, प्रत्याशियों की छवि, संगठन व चुनावी रणनीति ने भी परिणाम को आकार दिया।  हालांकि यह भी साफ है कि वोटों के पुनर्संयोजन की प्रक्रिया  बंगाल में शुरू हो गई है।

भारी बहुमत की तस्वीर : बड़े अंतर वाली सीटों पर भाजपा का कब्जा
बंगाल में प्रचंड जीत का असर सिर्फ सीटों की संख्या तक सीमित नहीं रहा। जीत के अंतर में भी भाजपा की स्पष्ट बढ़त दिखी। बड़ी मार्जिन वाली सीटों के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में चुनावी लहर कितनी व्यापक थी और किन क्षेत्रों में मतदाताओं ने निर्णायक समर्थन दिया। भाजपा को जनादेश की असली ताकत उन सीटों में दिखती है, जहां जीत का अंतर 50 हजार से ज्यादा रहा। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 39 सीटों पर जीत का अंतर 50 हजार से ज्यादा रहा। इनमें से 23 सीटें भाजपा और तृणमूल को 15 सीटें मिलीं। एक सीट आम जनता उन्नयन पार्टी ने जीती।

बड़ी जीत वाली सीटों में 60% पर भाजपा का कब्जा रहा, जो उसके व्यापक जनाधार को दर्शाता है। भाजपा सिर्फ जीत तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई क्षेत्रों में निर्णायक बढ़त बनाकर विपक्ष को काफी पीछे छोड़ी। तृणमूल की जीती कई सीटों पर भाजपा दूसरे स्थान पर रही, जो राज्य में उसके विस्तार का संकेत है।

भाजपा के बर्मन एक लाख से अधिक वोटों से जीते
व्यक्तिगत सीटों के आंकड़े इस रुझान को और मजबूत करते हैं। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा के आनंदमय बर्मन ने तृणमूल के शंकर मालाकर को 1,04,265 वोटों से हराया। यह सबसे बड़ा जीत का अंतर है। डाबग्राम-फुलबाड़ी में भाजपा की शिखा चटर्जी ने 98 हजार वोटों से जीत दर्ज की। इंग्लिश बाजार में अमलान भादुड़ी ने 93 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल की।

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