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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन: 13 शहरों में नदी प्रबंधन योजनाएं पूरी, 27 और शहरों के लिए बनेगा प्लान
ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 25 Jun 2026 06:44 AM IST
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सार
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने गंगा बेसिन के 13 शहरों में शहरी नदी प्रबंधन योजनाएं पूरी कर ली हैं, जिनका उद्देश्य नदी के स्वास्थ्य को सुधारना, प्रदूषण कम करना और बाढ़ नियंत्रण को मजबूत करना है। इन योजनाओं में ऋषिकेश, गोरखपुर, प्रयागराज जैसे शहर शामिल हैं। पढ़िए रिपोर्ट-
गंगा (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने गंगा बेसिन के 13 शहरों के लिए शहरी नदी प्रबंधन योजनाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली हैं। राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान और विश्व बैंक के सहयोग से चलाई जा रही इस परियोजना का उद्देश्य शहरी नियोजन के साथ नदी के स्वास्थ्य, बाढ़ नियंत्रण, प्रदूषण में कमी और सतत विकास को एकीकृत करना है।
इन 13 शहरों में ऋषिकेश, हल्द्वानी, काठगोदाम, रामनगर, गोरखपुर, शाहजहांपुर, बिजनौर, प्रयागराज, बक्सर, छपरा और गया जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। यहां कृत्रिम आर्द्र भूमि और जल निकासी के पुनरुद्धार जैसे अभिनव समाधान अपनाए गए हैं। अयोध्या और कानपुर जैसे शहरों में सफल पायलट प्रोजेक्ट्स के परिणामों से उत्साहित होकर अब इसका विस्तार गंगा किनारे के सभी 97 शहरों तक करने का लक्ष्य है। पहले चरण में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के 27 शहरों के लिए योजनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें से 12 अतिरिक्त शहरों का कार्य मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
ये भी पढ़ें: 'पहले चोर हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद': राम मंदिर चंदे को लेकर गोविंदानंद सरस्वती ने लगाया आरोप, जांच की मांग
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यह पहल पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के तीन स्तंभों पर आधारित है। कानपुर में उन्नत झील मूल्यांकन जैसी तकनीक का उपयोग यह दर्शाता है कि नदी-संवेदनशील योजनाएं किस प्रकार महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ प्रदान कर सकती हैं।
इन 13 शहरों में ऋषिकेश, हल्द्वानी, काठगोदाम, रामनगर, गोरखपुर, शाहजहांपुर, बिजनौर, प्रयागराज, बक्सर, छपरा और गया जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। यहां कृत्रिम आर्द्र भूमि और जल निकासी के पुनरुद्धार जैसे अभिनव समाधान अपनाए गए हैं। अयोध्या और कानपुर जैसे शहरों में सफल पायलट प्रोजेक्ट्स के परिणामों से उत्साहित होकर अब इसका विस्तार गंगा किनारे के सभी 97 शहरों तक करने का लक्ष्य है। पहले चरण में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के 27 शहरों के लिए योजनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें से 12 अतिरिक्त शहरों का कार्य मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
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