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NISAR: 'निसार मिशन से दुनिया के सामने दिखेगी भारत की अंतरिक्ष तकनीक की ताकत', ISRO के पूर्व वैज्ञानिक का बयान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 29 Jul 2025 03:55 PM IST
सार

NISAR: इसरो के पूर्व वैज्ञानिक राधाकृष्ण कवलुरु ने कहा कि निशान मिशन भारत की अंतरिक्ष तकनीक की ताकत को दुनिया के सामने दिखाएगा। यह मिशन धरती का विस्तृत डाटा जुटाएगा और फिर इसे दुनियाभर में उपयोग के उपलब्ध कराया जाएगा। इससे यह पर्यावरण, जलवायु, जंगलों और ग्लेशियर पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी।  

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NISAR mission will showcase Indian space engineering on global scale: Ex-ISRO scientist
निसार मिशन - फोटो : ISRO

निसार मिशन भारतीय अंतरिक्ष तकनीक की ताकत को पूरी दुनिया के सामने दिखाएगा। यह इसरो और नासा का एक संयुक्त प्रयास है। यह बात मंगलवार को निसार के पूर्व परियोजना प्रबंधन राधाकृष्ण कवलुरु ने कही। 

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NISAR mission will showcase Indian space engineering on global scale: Ex-ISRO scientist
निसार मिशन - फोटो : एक्स/इसरो/वीडियो ग्रैब

श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा निसार मिशन
कवलुरु ने बताया कि नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) एक वैश्विक मिशन है। इसका डाटा पूरी दुनिया के लिए डाउनलोड के लिए उपलब्ध रहेगा। इसरो इसे 30 जुलाई को शाम 5:40 बजे श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी-एमके II रॉकेट के जरिए लॉन्च करेगा। यह जीएसएलवी-एफ16 की 18वीं उड़ान और स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन के साथ 9वीं ऑपरेशनल उड़ान होगी।

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निसार मिशन - फोटो : एक्स/इसरो/वीडियो ग्रैब
लॉन्च के 19 मिनट बाद तय कक्षा में स्थापित होगा उपग्रह
यह मिशन पहली बार जीएसएलवी रॉकेट के जरिए सौर-सिंक्रोनस ध्रुवीय कक्षा में भेजा जाएगा। 51.7 मीटर लंबा तीन-स्टेज रॉकेट चेन्नई से करीब 135 किलोमीटर पूर्व में स्थित दूसरे लॉन्चपैड से उड़ान भरेगा। लॉन्च के करीब 19 मिनट बाद उपग्रह को उसकी तय कक्षा में स्थापित किया जाएगा।
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निसार मिशन - फोटो : एएनआई/इसरो
उपग्रह पूरी धरती का डाटा भेजेगा
मिशन के बारे में विस्तार से बताते हुए कवलूरु ने कहा कि नासा इसमें एल-बैंड रडार देगा और इसरो एस-बैंड। दोनों मिलकर एक खास तरह का रडार बनाएंगे जो धरती के हर कोने का बहुत सारा डाटा एकत्र करेगा। इसरो के सूत्रों के मुताबिक, काउंटडाउन मंगलवार को शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, यह उपग्रह पूरी धरती का डाटा भेजेगा। इसमें अंटार्कटिका, उत्तरी ध्रुव और महासागर भी शामिल होंगे। 
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निसार मिशन - फोटो : एक्स/इसरो
साबित होगी भारतीय अंतरिक्ष तकनीक की मजबूती
कवलुरु ने बताया कि पहले के इसरो उपग्रह (जैसे रिसोर्ससैट और रिसैट सीरीज) दुनिया की तस्वीरें ले सकते थे, लेकिन इनका फोकस भारत और उसके आसपास के इलाकों पर ही था। जबकि निसार पूरी दुनिया का डाटा एकत्र करेगा और दुनियाभर की सरकारें और कंपनियां इसका इस्तेमाल करेंगी। उन्होंने कहा, निसार एक ऐसा मिशन है जिससे पूरी दुनिया से हमें फीडबैक मिलेगा और इससे यह भी साबित होगा कि भारत की अंतरिक्ष तकनीक कितनी मजबूत है। यही इसकी असली अहमियत है। 
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