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NTA की साख पर संकट: नीट पेपर लीक के बाद 11 साल पुराना इतिहास दोहराया, जांच के घेरे में एजेंसी की क्षमता
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 14 May 2026 07:50 AM IST
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सार
नीट, जेईई और सीयूईटी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएं आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी एनटीए एक बार फिर गंभीर विवादों में है। राजस्थान में पेपर लीक और 120 सवालों के पहले से सार्वजनिक होने के बाद नीट-यूजी परीक्षा को रद्द करना पड़ा है, जिसने 2015 के एआईपीएमटी कांड की यादें ताजा कर दी हैं। राधाकृष्णन पैनल की सुधारवादी सिफारिशों के बावजूद डिजिटल सुरक्षा और बुनियादी ढांचे में बदलाव न होना एनटीए की विफलता को दर्शाता है। पिछले दो वर्षों में तीन महानिदेशकों का बदलना एजेंसी में स्थिरता की कमी को उजागर करता है।
एनटीए
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नीट, जेईई, सीयूईटी और यूजीसी-नेट जैसी 15 प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं कराने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) फिर से गलत वजहों से सुर्खियों में है। पेपर लीक ने बड़े स्तर की परीक्षाएं निष्पक्ष और सुचारू ढंग से कराने की एनटीए की क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 2024 में भी इसी तरह के आरोप लगे थे। इसके बाद परीक्षा संचालन व्यवस्था में सुधार के लिए उच्चस्तरीय पैनल बनाया गया था, समीक्षा हुई और कई सिफारिशें भी की गईं लेकिन दो साल बाद भी हालात जस के तस हैं।
2024 में मिले झटके के बाद नीट-यूजी 2025 सुचारू ढंग से संपन्न हुई थी लेकिन बिजली कटौती जैसी समस्याओं से प्रभावित छात्र हाईकोर्ट पहुंचे थे। हालांकि यह साल एनटीए के लिए एक तरह से शर्मिंदगी वाला वर्ष बन गया है। 6 मई को एनटीए ने नीट-यूजी की प्रोविजनल आंसर-की जारी की। हालांकि भौतिकी (फिजिक्स) के न्यूमेरिकल सवालों को लेकर शक पैदा हुआ। इससे पहले 12 अप्रैल को एनटीए को जेईई मेन की आंसर-की में बदलाव करना पड़ा था। छात्रों की ओर से की गई शिकायतों के बाद रसायन (केमिस्ट्री) खंड की 19 खामियों को सुधारा गया था। कॉमन विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) में परीक्षा केंद्रों को दूरदराज के शहरों में आवंटित किए जाने को लेकर हंगामा हुआ था। हालांकि एनटीए ने सुधार किए लेकिन ऐसे मामले एजेंसी की अक्षमता, लापरवाही और उदासीनता की धारणा को और पुख्ता करती हैं। ये गलतियां मामूली लग सकती हैं लेकिन इसका छात्रों पर मानसिक और शैक्षणिक असर काफी गंभीर होता है।
गठन के बाद से ही एनटीए रहा बदनाम
2017 में अपने गठन के बाद पिछले नौ साल में एनटीए पेपर लीक और लापरवाही का एक चमकता हुआ उदाहरण बन चुका है। कई प्रश्नपत्र छपाई के दौरान लीक हो जाते हैं, कभी परिवहन के दौरान और कुछ मामलों में तो पेपर बनाने वाले ने ही प्रश्नपत्र लीक कर दिया। इतना ही नहीं, हद तो यह हो गई जब एनटीए महानिदेशक ने छात्रों से खुद अपील की कि अगर प्रश्नपत्र लीक हो जाए तो वे तुरंत एजेंसी को इसकी सूचना दें। इन सब मामलों को देखते हुए एनटीए एक पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली तैयार करे या फिर ऐसी परीक्षाएं आयोजित करने की जिम्मेदारी किसी और संस्था को सौंप दी जाए।
2015 के बाद पहली बार स्वत: संज्ञान लेकर रद्द हुई परीक्षा : नीट-यूजी प्रश्नपत्रों के 420 सवालों में 120 सवाल हू-ब-हू पहले से सार्वजनिक हो गए थे। आरोप है कि ये सवाल परीक्षा से 15 दिन पहले ही प्रसारित हो गए थे। एनटीए ने भी आरोपों को काफी गंभीर माना और 2015 एआईपीएमटी के बाद पहली बार इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई। यह तब हुआ जब एनटीए ने दावा किया था कि 3 मई की परीक्षा पूरी तरह से निष्पक्ष और बिना किसी गड़बड़ी के हुई। 2015 एआईपीएमटी की पूरी परीक्षा को सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक के सबूत मिलने के बाद रद्द कर दिया था। उस समय ब्लूटूथ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से नकल की बात सामने आई थी। 11 साल बाद फिर इतिहास दोहराया गया। राजस्थान में सामने आए बड़े पेपर लीक और गेस पेपर से 120 से अधिक प्रश्नों के मिलने के बाद पूरी परीक्षा रद्द की गई।
दो साल से भी कम समय में तीन डीजी बने
अब एनटीए अपनी नाकामी का दोष अधिकारियों पर मढ़ रहा है लेकिन इसके पीछे एनटीए में निरंतरता और स्थिरता की कमी भी एक बड़ी वजह हो सकती है। जब एनटीए के महानिदेशक (डीजी) सुबोध कुमार सिंह को जून 2024 में पेपर लीक मामले के बीच हटा दिया गया, तब आईटीपीओ के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक को एजेंसी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। यह व्यवस्था अक्तूबर 2025 तक चली। फिर आईएएस अधिकारी राजेश लखानी को जिम्मेदारी सौंपी गई लेकिन नीट-यूजी 2026 से कुछ दिन पहले ही अभिषेक सिंह को प्रभार दे दिया गया यानी दो वर्षों से भी कम समय में तीसरा व्यक्ति एजेंसी का प्रमुख बन गया।
राधाकृष्णन पैनल के ज्यादातर सुझाव लागू ही नहीं हुए : राधाकृष्णन पैनल ने एनटीए में सुधार के लिए कई सुझाव दिए थे। इनमें कई दिनों के दौरान आयोजित मल्टी-सेशन टेस्ट फॉर्मेट, मानकीकृत परीक्षा केंद्रों की स्थापना, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मोबाइल टेस्टिंग केंद्र, डिजिटलपरीक्षा परीक्षा, बायोमेट्रिक्स और एआई आधारित मल्टी-स्टेज ऑथेंटिकेशन सिस्टम, एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्रों के साथ हाइब्रिड टेस्ट, टेस्टिंग सेंटरों पर हाई-स्पीड प्रिंटर और पीपीटी फॉर्मेट में प्रश्नपत्र वितरण और कोचिंग इंडस्ट्री की निगरानी और स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की व्यवस्था आदि थे। हालांकि इनमें से ज्यादातर सुधार लागू ही नहीं किए गए।
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2024 में मिले झटके के बाद नीट-यूजी 2025 सुचारू ढंग से संपन्न हुई थी लेकिन बिजली कटौती जैसी समस्याओं से प्रभावित छात्र हाईकोर्ट पहुंचे थे। हालांकि यह साल एनटीए के लिए एक तरह से शर्मिंदगी वाला वर्ष बन गया है। 6 मई को एनटीए ने नीट-यूजी की प्रोविजनल आंसर-की जारी की। हालांकि भौतिकी (फिजिक्स) के न्यूमेरिकल सवालों को लेकर शक पैदा हुआ। इससे पहले 12 अप्रैल को एनटीए को जेईई मेन की आंसर-की में बदलाव करना पड़ा था। छात्रों की ओर से की गई शिकायतों के बाद रसायन (केमिस्ट्री) खंड की 19 खामियों को सुधारा गया था। कॉमन विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) में परीक्षा केंद्रों को दूरदराज के शहरों में आवंटित किए जाने को लेकर हंगामा हुआ था। हालांकि एनटीए ने सुधार किए लेकिन ऐसे मामले एजेंसी की अक्षमता, लापरवाही और उदासीनता की धारणा को और पुख्ता करती हैं। ये गलतियां मामूली लग सकती हैं लेकिन इसका छात्रों पर मानसिक और शैक्षणिक असर काफी गंभीर होता है।
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गठन के बाद से ही एनटीए रहा बदनाम
2017 में अपने गठन के बाद पिछले नौ साल में एनटीए पेपर लीक और लापरवाही का एक चमकता हुआ उदाहरण बन चुका है। कई प्रश्नपत्र छपाई के दौरान लीक हो जाते हैं, कभी परिवहन के दौरान और कुछ मामलों में तो पेपर बनाने वाले ने ही प्रश्नपत्र लीक कर दिया। इतना ही नहीं, हद तो यह हो गई जब एनटीए महानिदेशक ने छात्रों से खुद अपील की कि अगर प्रश्नपत्र लीक हो जाए तो वे तुरंत एजेंसी को इसकी सूचना दें। इन सब मामलों को देखते हुए एनटीए एक पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली तैयार करे या फिर ऐसी परीक्षाएं आयोजित करने की जिम्मेदारी किसी और संस्था को सौंप दी जाए।
2015 के बाद पहली बार स्वत: संज्ञान लेकर रद्द हुई परीक्षा : नीट-यूजी प्रश्नपत्रों के 420 सवालों में 120 सवाल हू-ब-हू पहले से सार्वजनिक हो गए थे। आरोप है कि ये सवाल परीक्षा से 15 दिन पहले ही प्रसारित हो गए थे। एनटीए ने भी आरोपों को काफी गंभीर माना और 2015 एआईपीएमटी के बाद पहली बार इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई। यह तब हुआ जब एनटीए ने दावा किया था कि 3 मई की परीक्षा पूरी तरह से निष्पक्ष और बिना किसी गड़बड़ी के हुई। 2015 एआईपीएमटी की पूरी परीक्षा को सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक के सबूत मिलने के बाद रद्द कर दिया था। उस समय ब्लूटूथ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से नकल की बात सामने आई थी। 11 साल बाद फिर इतिहास दोहराया गया। राजस्थान में सामने आए बड़े पेपर लीक और गेस पेपर से 120 से अधिक प्रश्नों के मिलने के बाद पूरी परीक्षा रद्द की गई।
दो साल से भी कम समय में तीन डीजी बने
अब एनटीए अपनी नाकामी का दोष अधिकारियों पर मढ़ रहा है लेकिन इसके पीछे एनटीए में निरंतरता और स्थिरता की कमी भी एक बड़ी वजह हो सकती है। जब एनटीए के महानिदेशक (डीजी) सुबोध कुमार सिंह को जून 2024 में पेपर लीक मामले के बीच हटा दिया गया, तब आईटीपीओ के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक को एजेंसी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। यह व्यवस्था अक्तूबर 2025 तक चली। फिर आईएएस अधिकारी राजेश लखानी को जिम्मेदारी सौंपी गई लेकिन नीट-यूजी 2026 से कुछ दिन पहले ही अभिषेक सिंह को प्रभार दे दिया गया यानी दो वर्षों से भी कम समय में तीसरा व्यक्ति एजेंसी का प्रमुख बन गया।
राधाकृष्णन पैनल के ज्यादातर सुझाव लागू ही नहीं हुए : राधाकृष्णन पैनल ने एनटीए में सुधार के लिए कई सुझाव दिए थे। इनमें कई दिनों के दौरान आयोजित मल्टी-सेशन टेस्ट फॉर्मेट, मानकीकृत परीक्षा केंद्रों की स्थापना, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मोबाइल टेस्टिंग केंद्र, डिजिटलपरीक्षा परीक्षा, बायोमेट्रिक्स और एआई आधारित मल्टी-स्टेज ऑथेंटिकेशन सिस्टम, एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्रों के साथ हाइब्रिड टेस्ट, टेस्टिंग सेंटरों पर हाई-स्पीड प्रिंटर और पीपीटी फॉर्मेट में प्रश्नपत्र वितरण और कोचिंग इंडस्ट्री की निगरानी और स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की व्यवस्था आदि थे। हालांकि इनमें से ज्यादातर सुधार लागू ही नहीं किए गए।